
नई दिल्ली। कॉकरोच जनता पार्टी के संस्थापक और संयोजक अभिजीत दीपके ने सोमवार को सभी राज्यों के शिक्षा मंत्रियों को पत्र लिखा। इसमें उन्होंने सरकारी स्कूलों की स्थिति पर राज्यवार आंकड़े मांगे। पत्र में उन्होंने सरकारी स्कूलों में बुनियादी सुविधाओं, शिक्षकों की कमी, मरम्मत और सरकारी फंड के इस्तेमाल से जुड़े सवाल उठाए। दीपके ने कहा कि सार्वजनिक शिक्षा की स्थिति को तत्काल प्राथमिकता के तौर पर देखा जाना चाहिए। उनके अनुसार, बच्चों को पढ़ाई के लिए सुरक्षित और सम्मानजनक माहौल मिलना जरूरी है।
दीपके ने सरकारी स्कूलों की ऐसी तस्वीरों का जिक्र किया, जो सोशल मीडिया पर सामने आ रही हैं। उनके मुताबिक, कई स्कूलों में पीने का सुरक्षित पानी, काम करने वाले शौचालय, ठीक कक्षाएं और बच्चों के बैठने के लिए पर्याप्त बेंच जैसी मूल सुविधाओं को लेकर सवाल हैं। उन्होंने पूछा कि अगर बच्चों को पढ़ने के लिए जरूरी सुविधाएं ही नहीं मिलेंगी तो उनसे बेहतर शिक्षा की उम्मीद कैसे की जा सकती है। उन्होंने राज्यों से स्कूलों की स्थिति में तेजी से सुधार करने की अपील की।
दीपके ने शिक्षा मंत्रियों को भेजे प्रश्नों में पिछले पांच वर्षों में सरकारी स्कूलों की मरम्मत और नए निर्माण से लेकर शिक्षकों की स्थिति तक की जानकारी मांगी है। उन्होंने पूछा है कि कितने स्कूलों का नवीनीकरण हुआ, कितने स्कूलों को अभी मरम्मत या पूरी तरह दोबारा बनाने की जरूरत है और कितने स्वीकृत शिक्षकीय पद खाली हैं। इसके साथ ही पिछले पांच वर्षों में स्कूलों के लिए कितना बजट आवंटित हुआ और उसमें से कितना पैसा खर्च किया गया, इसकी जानकारी भी मांगी गई है।
पत्र में सीजेपी ने सरकार से कौन से सवाल पूछे?
प्रश्नावली में स्कूलों की डिजिटल और दूसरी सुविधाओं से जुड़े सवाल भी शामिल हैं। इसके अनुसार, राज्यों से पूछा गया है कि कितने सरकारी स्कूलों में कंप्यूटर और डिजिटल शिक्षा की पर्याप्त सुविधा है। साफ और काम करने वाले शौचालयों तथा खेल के लिए जरूरी मैदान, उपकरण और दूसरी सुविधाओं की उपलब्धता के बारे में भी जानकारी मांगी गई है। इसके अलावा यह भी पूछा गया है कि हर बच्चे को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा तक उचित पहुंच देने के लिए राज्य में और कितने सरकारी स्कूलों की जरूरत है।
दीपके ने शिक्षकों की भूमिका से जुड़ा सवाल भी उठाया है। उन्होंने राज्यों से पूछा है कि पढ़ाने के अलावा सरकारी स्कूलों के शिक्षकों को किन गैर-शैक्षणिक कामों और जिम्मेदारियों में लगाया जाता है। यह सवाल इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि प्रश्नावली में शिक्षक संख्या के साथ उनके काम के स्वरूप की जानकारी भी मांगी गई है। सीजेपी का कहना है कि स्कूलों की स्थिति समझने के लिए केवल शिक्षकों की संख्या जानना पर्याप्त नहीं है, बल्कि यह भी देखना जरूरी है कि शिक्षक अपना कितना समय पढ़ाने में लगा पा रहे हैं।
सीजेपी ने इस महीने ‘स्कूल ठीक करो’ अभियान शुरू किया है। इसके तहत संगठन की टीमें अलग-अलग राज्यों के सरकारी स्कूलों में जाकर उनकी स्थिति का जायजा और ऑडिट कर रही हैं। संगठन का कहना है कि वह स्कूलों की वास्तविक स्थिति को सामने लाना चाहता है। यह अभियान ऐसे समय में आगे बढ़ाया जा रहा है, जब सीजेपी पहले कथित नीट अनियमितताओं को लेकर छात्र प्रदर्शन के मुद्दे पर भी सक्रिय रहा है। अब संगठन ने अपना ध्यान सरकारी स्कूलों की बुनियादी स्थिति पर केंद्रित किया है।
अभिजीत दीपके ने कहा कि यह अभियान किसी एक सरकार या केवल राजनीति के लिए नहीं है, बल्कि बच्चों के भविष्य से जुड़ा है। उनका कहना है कि बच्चे का जन्म किसी भी जगह हुआ हो या उसके परिवार की आर्थिक स्थिति कैसी भी हो, उसे सुरक्षित कक्षा, साफ पीने का पानी, काम करने वाला शौचालय, बैठने के लिए बेंच और पढ़ाने वाला शिक्षक मिलना चाहिए। उन्होंने राज्यों से इन सवालों के जवाब सार्वजनिक करने और बुनियादी ढांचे की कमी के कारण किसी बच्चे को सम्मानजनक शिक्षा से वंचित न होने देने के लिए तत्काल कदम उठाने की अपील की।
दीपके का तर्क है कि समस्या को ठीक करने से पहले यह पता होना जरूरी है कि अलग-अलग राज्यों में सरकारी स्कूलों की वास्तविक स्थिति क्या है। इसी वजह से उन्होंने शिक्षा मंत्रियों से राज्यवार आंकड़े सार्वजनिक करने को कहा है। इसमें स्कूलों की मरम्मत, शिक्षकों के खाली पद, बजट और खर्च, डिजिटल सुविधाएं, शौचालय, खेल सुविधाएं और अतिरिक्त स्कूलों की जरूरत जैसे मुद्दे शामिल हैं। यानी अभियान का जोर केवल शिकायत करने पर नहीं, बल्कि आंकड़ों के जरिए स्कूलों की स्थिति सामने लाने पर है।
अब निगाह इस बात पर रहेगी कि राज्य शिक्षा मंत्रालय सीजेपी की प्रश्नावली पर क्या प्रतिक्रिया देते हैं और क्या मांगी गई जानकारी सार्वजनिक की जाती है। अगर आंकड़े सामने आते हैं तो उनसे अलग-अलग राज्यों में सरकारी स्कूलों की बुनियादी स्थिति की तस्वीर स्पष्ट हो सकती है। लेकिन केवल आंकड़े सामने आना पर्याप्त नहीं होगा। असली चुनौती यह होगी कि जहां पीने के पानी, शौचालय, कक्षाओं, शिक्षकों या डिजिटल सुविधाओं की कमी है, वहां सरकारें कितनी तेजी से सुधार करती हैं। सीजेपी ने इसी वजह से शिक्षा को तत्काल प्राथमिकता देने और स्कूलों में जरूरी सुविधाएं सुनिश्चित करने की मांग की है।
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