
महाराष्ट्र। महाराष्ट्र (Maharashtra) की महायुति सरकार (Mahayuti Government) में चल रही खींचतान को खत्म करने की दिशा में मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस (Chief Minister Devendra Fadnavis) ने अहम पहल की है। फडणवीस के सरकारी आवास वर्षा पर देर रात डिनर के दौरान महायुति के तीनों प्रमुख दलों के नेताओं की बैठक हुई। इसमें सरकारी निगमों में नियुक्तियों को लेकर लंबे समय से बने गतिरोध को दूर करने के लिए फॉर्मूला तय किया गया।
विधायकों की संख्या के आधार पर होगा निगमों का बंटवारा
बैठक में तय हुआ कि सरकारी निगमों में हिस्सेदारी महायुति के घटक दलों के विधायकों की संख्या के आधार पर होगी। सबसे ज्यादा विधायक होने के कारण बीजेपी को सबसे अधिक निगम मिलेंगे। इसके बाद एकनाथ शिंदे की शिवसेना और एनसीपी को हिस्सेदारी दी जाएगी।
सरकारी निगमों को ए, बी और सी तीन श्रेणियों में बांटा जाएगा। ए कैटेगरी में महत्वपूर्ण निगम शामिल होंगे। जल्द ही इनके अध्यक्षों और सदस्यों के नाम तय कर सरकार को भेजे जाएंगे।
हर मंगलवार होगी बैठक, एक महीने में विवाद खत्म करने का लक्ष्य
मुख्यमंत्री फडणवीस ने नेताओं को लंबित मामलों का जल्द समाधान करने के निर्देश दिए हैं। इसके लिए हर मंगलवार बैठक आयोजित की जाएगी। सरकार का लक्ष्य है कि अगले एक महीने में सभी लंबित विवादों को सुलझा लिया जाए।
नेतृत्व परिवर्तन की अटकलों को बीजेपी ने किया खारिज
बैठक के बाद बीजेपी नेता और मंत्री चंद्रशेखर बावनकुले ने मुख्यमंत्री के नेतृत्व में बदलाव की चर्चाओं को खारिज कर दिया। उन्होंने विपक्ष पर अफवाह फैलाने का आरोप लगाया।
बावनकुले ने कहा कि महाराष्ट्र की जनता ने महायुति को बड़ा जनादेश दिया है और 235 विधायक एनडीए सरकार के साथ हैं। ऐसे में नेतृत्व परिवर्तन की चर्चा का कोई आधार नहीं है। उन्होंने कहा कि विपक्ष फडणवीस के मजबूत नेतृत्व से परेशान है, इसलिए इस तरह की बातें फैलाई जा रही हैं।
DPDC में भी तय हुआ हिस्सेदारी का फॉर्मूला
बैठक में जिला योजना विकास समिति (DPDC) को लेकर भी सहमति बनी। इसके तहत उन क्षेत्रों में जहां महायुति के अलग-अलग दलों के विधायक हैं, सत्ताधारी दलों के विधायक 60% सदस्यों की नियुक्ति और फंड पर नियंत्रण रखेंगे। संबंधित पालक मंत्री को 30% और छोटे सहयोगी दलों को 10% हिस्सेदारी मिलेगी।
तीनों दलों के प्रमुख नेता रहे मौजूद
बैठक में बीजेपी की ओर से देवेंद्र फडणवीस, गिरीश महाजन और चंद्रशेखर बावनकुले शामिल हुए। शिवसेना की ओर से एकनाथ शिंदे, उदय सामंत, शंभूराज देसाई और दादा भुसे मौजूद रहे। एनसीपी की ओर से सुनेत्रा पवार, छगन भुजबल, हसन मुश्रीफ और संजय खोडके ने बैठक में हिस्सा लिया।
बैठक के बाद महायुति के भीतर मतभेद कम करने की कोशिश साफ दिखाई दे रही है। अब नजर सरकारी निगमों में होने वाली नियुक्तियों पर है। सरकार जल्द ही अध्यक्षों और सदस्यों के नामों की घोषणा कर सकती है।
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