
नागपुर: केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी ने नागपुर में एक कार्यक्रम के दौरान बड़ा बयान दिया है. उन्होंने काम की थकान का जिक्र करते हुए कहा मैं पिछले 30 साल से लगातार सार्वजनिक जीवन में काम कर रहा हूं. अब मैं ज्यादा सामाजिक काम नहीं कर सकता. नई पीढ़ी को आगे आना चाहिए. अब उन्हें ये जिम्मेदारी संभालनी चाहिए. गडकरी के इस बयान के बाद महाराष्ट्र के साथ-साथ केंद्र की सियासत में कयासों का दौर शुरू हो गया है. सवाल ये भी क्या गडकरी राजनीति से संन्यास लेने का संकेत दे रहे हैं? हालांकि, उन्होंने इस तरह की बात नहीं कही है.
नागपुर के ‘एकलव्य एकल विद्यालय शिक्षक-पर्यवेक्षक प्रशिक्षण वर्ग’ के कार्यक्रम में गडकरी ने कहा कि सच कहूं तो मैं कोई प्रेरणा स्रोत वगैरह नहीं हूं. आजकल मैं ज्यादा काम नहीं कर पाता हूं. जब कर सकता था तब किया, अब मेरा भी काम में पार्टिसिपेशन कम हो गया है. मैंने सबसे कहा कि अब नई पीढ़ी के हाथों में काम देना चाहिए. नए लोग आए हैं, पुराने उन्हें मार्गदर्शन दे रहे हैं और धीरे-धीरे काम फिर बढ़ रहा है और बढ़े हुए काम में अब और भी ज्यादा बढ़ोतरी हो रही है. उन्होंने आगे कहा कि एक दिन यह काम इतना बढ़ेगा कि महाराष्ट्र के एक भी आदिवासी गांव में अंधेरा नहीं रहेगा, वहां विकास की रोशनी फैलेगी. यह तस्वीर आपको, मुझे, हम सबको बदलनी है और इसे बदलने का कार्य ही हमारे मानकर ट्रस्ट का काम है.
इस दौरान उन्होंने अपने पुराने दिनों को याद किया और कहा कि पहले की उनकी जीवनशैली अलग थी. कभी कुछ भी खा पी लेते थे. पार्टी के लिए काम करते समय समोसा खाकर भी सो जाता था. कोरोना के बाद उन्होंने अपनी सेहत पर ध्यान देना शुरू किया. उन्होंने कहा कि वो अब रोजाना एक्सरसाइज करते हैं. शरीर का स्वस्थ रहना बहुत जरूरी है. गडकरी ने कहा कि अगर इंसान स्वस्थ नहीं है तो फिर सत्ता और पद का क्या फायदा. इसी कारण गडकरी के इस बयान को भावी राजनीतिक और संगठनात्मक बदलावों से जोड़कर देखा जा रहा है.
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