
नई दिल्ली ।खाना पकाने में इस्तेमाल होने वाला तेल (Cooking Oil) हमारी रोजाना की डाइट का अहम हिस्सा है और इसका सीधा संबंध शरीर (Direct connection to the body)को मिलने वाली वसा की मात्रा तथा उसके प्रकार से होता है। ऐसे में लंबे समय तक एक ही तरह के तेल का अधिक सेवन करने के बजाय अलग-अलग स्रोतों से मिलने वाली स्वस्थ वसा (Healthy Fats) को संतुलित मात्रा में डाइट में शामिल करना बेहतर माना जाता है। रिफाइंड तेल (Refined Oil) को लेकर अक्सर कई तरह की बातें कही जाती हैं, लेकिन केवल किसी तेल को रिफाइंड होने के आधार पर पूरी तरह नुकसानदायक मानना सही नहीं है। तेल की गुणवत्ता (Oil Quality), उसमें मौजूद फैटी एसिड, इस्तेमाल की मात्रा और खाना पकाने का तरीका भी उतना ही महत्वपूर्ण है।
दिल की सेहत के लिहाज से विशेषज्ञ आमतौर पर ऐसे वसा स्रोतों को प्राथमिकता देने की सलाह देते हैं जिनमें असंतृप्त वसा अपेक्षाकृत अधिक हो। इसके साथ ही कुल कैलोरी और संतृप्त वसा की मात्रा पर भी ध्यान देना जरूरी है। यदि डाइट में तेल, घी या मक्खन जरूरत से ज्यादा शामिल है तो स्वस्थ विकल्प भी अधिक कैलोरी का कारण बन सकते हैं। इसलिए किसी भी तेल को सीमित मात्रा में इस्तेमाल करना जरूरी है।
घी भारतीय रसोई में लंबे समय से इस्तेमाल होता रहा है। इसमें वसा में घुलने वाले कुछ विटामिन और ब्यूटिरेट जैसे यौगिक पाए जाते हैं। हालांकि घी में संतृप्त वसा की मात्रा भी अधिक होती है, इसलिए इसे सीमित मात्रा में लेना बेहतर है। खासकर जिन लोगों को कोलेस्ट्रॉल या हृदय संबंधी जोखिम है, उन्हें अपनी व्यक्तिगत जरूरत के अनुसार वसा का सेवन तय करना चाहिए।
सरसों का तेल भी भारतीय भोजन का पारंपरिक हिस्सा है। इसमें मोनोअनसैचुरेटेड और पॉलीअनसैचुरेटेड फैटी एसिड पाए जाते हैं। इसमें अल्फा-लिनोलेनिक एसिड भी मौजूद होता है। सामान्य खाना पकाने में सीमित मात्रा में सरसों के तेल का इस्तेमाल किया जा सकता है। इसकी तेज खुशबू और स्वाद के कारण यह कई पारंपरिक व्यंजनों के लिए खास तौर पर पसंद किया जाता है।
ऑलिव ऑयल को भी दिल के अनुकूल वसा के स्रोतों में गिना जाता है। इसमें मुख्य रूप से मोनोअनसैचुरेटेड फैट पाया जाता है और इसमें एंटीऑक्सीडेंट यौगिक भी मौजूद होते हैं। इसे सलाद, हल्की कुकिंग और कई अन्य व्यंजनों में इस्तेमाल किया जा सकता है। हालांकि ऑलिव ऑयल को भी असीमित मात्रा में लेना उचित नहीं है, क्योंकि हर तेल में कैलोरी काफी अधिक होती है।
तिल का तेल भी एक उपयोगी विकल्प हो सकता है। इसमें असंतृप्त वसा के साथ कई प्राकृतिक यौगिक पाए जाते हैं और इसका इस्तेमाल भारतीय तथा एशियाई खान-पान में लंबे समय से किया जाता रहा है। भोजन में इसका सीमित इस्तेमाल स्वाद के साथ वसा के स्रोत में विविधता ला सकता है।
मक्खन का सेवन भी सीमित मात्रा में किया जा सकता है, लेकिन इसमें संतृप्त वसा अधिक होने के कारण इसे रोजाना बड़ी मात्रा में लेना हृदय स्वास्थ्य के लिए उचित नहीं माना जाता। सबसे जरूरी बात यह है कि केवल तेल बदलने से ही दिल स्वस्थ नहीं रहता। संतुलित आहार, पर्याप्त शारीरिक गतिविधि, वजन पर नियंत्रण, धूम्रपान से दूरी और रक्तचाप तथा कोलेस्ट्रॉल की नियमित निगरानी भी बेहद महत्वपूर्ण है। इसलिए रिफाइंड तेल को अचानक पूरी तरह बंद करने के बजाय अपनी डाइट में इस्तेमाल होने वाली वसा की गुणवत्ता और मात्रा दोनों पर ध्यान देना ज्यादा व्यावहारिक तरीका है।
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