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सरकारी स्कूलों पर सबसे कम खर्च करने वाले राज्य कौन से? रिपोर्ट में सामने आई तस्वीर

August 26, 2026

नई दिल्ली। देश में सरकारी स्कूलों (Government schools) की संख्या और उनमें छात्रों (Students) के नामांकन में लगातार कमी के बीच शिक्षा (Education) पर राज्यों (States) के खर्च को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं। भारतीय रिजर्व बैंक (Reserve Bank of India) के आंकड़ों के मुताबिक, अधिकांश राज्य अपने कुल बजट का करीब 13-14% ही शिक्षा पर खर्च करते हैं, जो यूनेस्को के 15-20% के मानक से कम है।

कर्नाटक और झारखंड समेत इन राज्यों में खर्च कम

2018-19 से अब तक के औसत के आधार पर कर्नाटक 10.96% के साथ सूची में सबसे नीचे है। इसके बाद झारखंड 13.03%, उत्तर प्रदेश 13.41% और मध्य प्रदेश 13.76% है। वहीं बिहार 18.78% के साथ शिक्षा पर सबसे अधिक बजट खर्च करने वाले राज्यों में शामिल है।


  • राज्य शिक्षा पर कुल बजट का औसत खर्च
    बिहार 18.78%
    उत्तराखंड 17.35%
    राजस्थान 16.90%
    छत्तीसगढ़ 14.95%
    जम्मू-कश्मीर 14.95%
    पश्चिम बंगाल 14.86%
    मध्य प्रदेश 13.76%
    उत्तर प्रदेश 13.41%
    झारखंड 13.03%
    कर्नाटक 10.96%

    सात साल में 84 हजार स्कूल हुए कम
    यूडीआईएसई+ के आंकड़ों के अनुसार, 2018-19 से 2025-26 के बीच देश में सरकारी और सरकारी सहायता प्राप्त स्कूलों की संख्या करीब 11 लाख से घटकर 10 लाख रह गई। इस दौरान इन स्कूलों में नामांकन भी 15.90 करोड़ से घटकर 14.40 करोड़ हो गया। यानी करीब 1.5 करोड़ छात्रों की कमी आई।

    स्कूलों के विलय और कम नामांकन के अलावा घटती जन्म दर भी इसके पीछे एक कारण है। हालांकि, विशेषज्ञों के मुताबिक केवल जनसांख्यिकीय बदलाव को इसके लिए जिम्मेदार नहीं माना जा सकता। निजी स्कूलों में इसी अवधि में करीब 70 लाख छात्रों की वृद्धि हुई है।

    बुनियादी सुविधाओं की भी कमी
    सरकारी स्कूलों में बुनियादी सुविधाओं की स्थिति भी चिंता बढ़ाती है। आंकड़ों के मुताबिक सिर्फ 94.2% सरकारी और सरकारी सहायता प्राप्त स्कूलों में शौचालय उपलब्ध हैं। यानी करीब 63 हजार स्कूल अभी भी इस सुविधा से वंचित हैं।

    कंप्यूटर और इंटरनेट जैसी सुविधाओं में भी सरकारी स्कूल कई मामलों में निजी स्कूलों से पीछे हैं। ग्रामीण इलाकों में पढ़ाई के नतीजे भी निजी स्कूलों की ओर छात्रों के रुझान की एक वजह माने जा रहे हैं।

    कम बजट में सरकारी स्कूलों की बड़ी भूमिका
    सामान्य सरकारी स्कूलों में एक बच्चे की सालाना शिक्षा 5 हजार रुपये से भी कम में संभव हो जाती है, जबकि निजी स्कूल में यह खर्च न्यूनतम करीब 25 हजार रुपये सालाना बताया गया है। इसके बावजूद निजी स्कूलों पर अभिभावकों का भरोसा बढ़ रहा है।

    विश्लेषण में जम्मू-कश्मीर, पश्चिम बंगाल, मध्य प्रदेश, उत्तर प्रदेश, कर्नाटक, राजस्थान, झारखंड, बिहार, उत्तराखंड और छत्तीसगढ़ में सरकारी स्कूल व्यवस्था में सुधार की अधिक जरूरत बताई गई है।

    शिक्षकों और संसाधनों पर भी ध्यान जरूरी
    देश में करीब 1,04,125 एकल-शिक्षक स्कूल हैं, जहां लगभग 33 लाख बच्चे पढ़ते हैं। वहीं करीब 10 लाख शिक्षक अभी प्रशिक्षित या पर्याप्त रूप से कुशल नहीं बताए गए हैं। ऐसे में विशेषज्ञों का जोर शिक्षा बजट बढ़ाने के साथ शिक्षकों की गुणवत्ता, स्कूलों की निगरानी और बुनियादी सुविधाओं को मजबूत करने पर है।

    साफ है कि सरकारी स्कूलों की संख्या बढ़ाने से ज्यादा जरूरी अब उनकी गुणवत्ता सुधारना है। बेहतर संसाधन, पर्याप्त शिक्षक, अच्छी शिक्षा और स्थानीय स्तर पर निगरानी बढ़ेगी, तभी सरकारी स्कूलों से छात्रों का पलायन रोका जा सकेगा।

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