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नेपाल में अचानक आई बाढ़ की 3 वजहें, भारत तक पहुंच सकता है बाढ़ का पानी, बिहार-UP में अलर्ट

August 27, 2026

नई दिल्ली। नेपाल (Nepal) में बुधवार सुबह अचानक आई बाढ़ (flood) ने कुछ ही घंटों में रसुवा, नुवाकोट, धादिंग और चितवन में भारी नुकसान पहुंचाया। कई पुल टूट गए और बिजली से जुड़े ढांचे भी प्रभावित हुए। बाढ़ का पानी तिब्बत सीमा (Tibet Border) के पास ल्हेंदे नदी के ऊपरी हिस्से से आने की बात सामने आई है। अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि नदी में अचानक इतना पानी आया कहां से। शुरुआती जांच में इसकी तीन संभावित वजहें सामने आई हैं, लेकिन अभी किसी एक कारण की पुष्टि नहीं हुई है।

बुधवार सुबह करीब 9 बजे बाढ़ का पानी नेपाल के रसुवा जिले में पहुंचा। इसके बाद तेज बहाव नुवाकोट और धादिंग तक फैल गया। इंडिया टुडे की ओपन-सोर्स इंटेलिजेंस (OSINT) टीम ने बाढ़ से प्रभावित तीन प्रमुख स्थानों—तिब्बत सीमा पर रसुवागढ़ी, नुवाकोट के न्यू त्रिशूली ब्रिज और धादिंग के मालेखु ब्रिज—की लोकेशन का मिलान किया है।

पहली थ्योरी: मलबे से नदी का रास्ता बंद हुआ
जांच में पहली संभावना पहाड़ से बर्फ, चट्टानों और मलबे के खिसकने की सामने आई है। आशंका है कि बड़ी मात्रा में मलबा नदी में गिरने से कुछ समय के लिए पानी का बहाव रुक गया। इसके पीछे पानी जमा होता गया और दबाव बढ़ने पर रुकावट टूट गई। इसके बाद जमा पानी तेजी से निचले इलाकों की ओर बह निकला।

नेपाल के आपदा प्रबंधन प्राधिकरण के अनुसार, रसुवागढ़ी से करीब 20 किलोमीटर दूर बर्फ और चट्टानों के खिसकने के निशान मिले हैं। सैटेलाइट तस्वीरों में भी नदी के फैलाव में अचानक बढ़ोतरी दिखाई देती है। हालांकि, केवल इन तस्वीरों के आधार पर यह तय नहीं किया जा सकता कि बाढ़ ग्लेशियर झील फटने से आई थी।


  • दूसरी थ्योरी: भूकंप नहीं, लैंडस्लाइड का कंपन
    शुरुआत में बाढ़ से कुछ समय पहले तिब्बत के इस क्षेत्र में दर्ज हुए कंपन को भूकंप से जोड़कर देखा गया था। हालांकि, USGS की ओर से स्टेटस अपडेट किए जाने के बाद तस्वीर बदली है। भूकंपीय आंकड़ों और सैटेलाइट तस्वीरों के विश्लेषण से संकेत मिला कि यह कंपन लैंडस्लाइड के कारण दर्ज हुआ था। ऐसे में भूकंप को बाढ़ की वजह मानने वाली शुरुआती आशंका कमजोर हो गई है।

    तीसरी थ्योरी: ग्लेशियल झील फटने से आई बाढ़
    तीसरी और अहम संभावना GLOF यानी ग्लेशियल लेक आउटबर्स्ट फ्लड की है। पहाड़ों पर बनी बर्फीली झील का पानी अचानक बाहर निकलने पर नीचे की ओर बेहद तेज बहाव पैदा हो सकता है।

    नेपाल के मौसम विभाग के वरिष्ठ मौसम विज्ञानी मिन कुमार आर्याल के मुताबिक, भोटेकोशी में आई बाढ़ सिर्फ बारिश के कारण नहीं हुई। उनका कहना है कि रसुवा में पिछले 24 घंटे में बारिश 7 मिलीमीटर से अधिक नहीं हुई थी। ऐसे में ग्लेशियल झील के फटने की संभावना की भी जांच की जा रही है। फिलहाल मलबा खिसकने, लैंडस्लाइड और ग्लेशियल झील फटने—इन तीनों संभावनाओं में से किसी को अंतिम कारण नहीं माना गया है। जांच अभी जारी है।

    भारत तक पहुंच सकता है बाढ़ का पानी
    नेपाल में आई इस बाढ़ को लेकर भारत की चिंता इसलिए बढ़ी है क्योंकि प्रभावित नदी तंत्र आगे चलकर भारत में गंडक नदी का रूप लेता है। त्रिशूली नदी देवघाट में काली गंडकी से मिलकर नारायणी बनती है। यही नदी भारत में वाल्मीकिनगर के पास पहुंचने के बाद गंडक कहलाती है। इसी वजह से भारतीय एजेंसियां गंडक के जलस्तर पर नजर रख रही हैं। केंद्रीय जल आयोग ने बिहार और उत्तर प्रदेश में गंडक के किनारे बसे इलाकों को सतर्क रहने की सलाह दी है।

    बिहार के 6 जिलों में निगरानी बढ़ी
    बाढ़ के संभावित असर को देखते हुए बिहार के पश्चिम चंपारण, पूर्वी चंपारण, गोपालगंज, सारण, मुजफ्फरपुर और वैशाली पर नजर रखी जा रही है। पश्चिम चंपारण बाढ़ के संभावित रास्ते में आने वाला पहला बड़ा भारतीय जिला है। बेतिया, गोपालगंज और मुजफ्फरपुर में NDRF की टीमें तैनात की गई हैं। इसके अलावा संवेदनशील क्षेत्रों में SDRF की टीमें भी मौजूद हैं।

    UP के महराजगंज-कुशीनगर भी अलर्ट
    गंडक में पानी बढ़ने की आशंका के चलते उत्तर प्रदेश के महराजगंज और कुशीनगर जिलों को भी सतर्क किया गया है। गंडक आगे हाजीपुर और सोनपुर के पास गंगा में मिलती है। हालांकि, पहाड़ी क्षेत्र से निकलकर जब पानी मैदानी इलाकों में पहुंचता है तो नदी का फैलाव बढ़ जाता है और बहाव की रफ्तार कम होने की संभावना रहती है।

    दूसरी नदियों पर सीधा असर नहीं
    कोसी, बागमती, बूढ़ी गंडक और घाघरा नदियों का रास्ता अलग है। इसलिए नेपाल से आई इस बाढ़ का पानी सीधे इन नदियों में नहीं पहुंचता। फिलहाल संभावित असर मुख्य रूप से गंडक नदी के रास्ते वाले क्षेत्रों तक सीमित रहने की बात कही जा रही है।

    भारत में सबसे ज्यादा निगरानी नारायणी से वाल्मीकिनगर और वहां से गंडक के रास्ते उत्तर बिहार तक के हिस्से पर है। नेपाल में अचानक आई बाढ़ की वास्तविक वजह जांच पूरी होने के बाद ही स्पष्ट होगी, लेकिन पानी के भारत तक पहुंचने का रास्ता स्पष्ट है नेपाल से नारायणी, नारायणी से गंडक और फिर गंगा।

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