
डेस्क: बच्ची की परवरिश को लेकर एक मां की लापरवाही की वजह से उस पर भारी जुर्माना लगाया है. अबू धाबी की एक महिला पर 80,000 दिरहम यानी 20 लाख रुपये का जुर्माना ठोंक दिया है. उसने अपनी बहुत ही छोटी बेटी को 8 दिनों के लिए एक नैनी (आया) के भरोसे छोड़ दिया था और खुद विदेश चली गई थी, वो भी तब जब बच्ची के पिता उसकी देखभाल करने के लिए मौजूद और तैयार थे.
अबू धाबी सिविल फैमिली कोर्ट ने पाया कि मां की लापरवाही की वजह से बच्ची की सुरक्षा खतरे में पड़ गई और माता-पिता के बीच तय ‘जॉइंट कस्टडी’ के नियमों का भी उल्लंघन हुआ. कोर्ट के फैसले के खिलाफ मां ने अपील की, लेकिन अपीलीय कोर्ट ने उसकी चुनौती को खारिज कर दिया. साथ ही जुर्माना और उसकी राशि, दोनों को बरकरार रखा.
हालांकि यह मामला यह साबित नहीं करता कि माता-पिता बच्चों को नैनी के पास नहीं छोड़ सकते. बजाय इसके, कोर्ट का फैसला इस मामले की खास परिस्थितियों पर केंद्रित था. खासकर यह कि बच्चे की देखभाल में मदद करने वाले दूसरे माता-पिता (पिता) को नजरअंदाज किया गया. 8 दिन के विदेश दौरे के दौरान बच्ची को नैनी के भरोसे छोड़ दिया गया.
बच्ची, जिसके माता-पिता का तलाक हो चुका है और दोनों के पास संयुक्त कस्टडी है, को नैनी के पास तब छोड़ दिया गया था जब उसकी मां विदेश गई थी. पिता ने कोर्ट को बताया कि मां की गैरमौजूदगी के दौरान वह वहां उपलब्ध थे और खुद बच्ची की देखभाल करने के लिए तैयार थे.
कोर्ट ने यह भी पाया कि मां की गैरमौजूदगी के दौरान बच्ची एक ऐसे वयस्क पुरुष के साथ उसी कमरे में रह रही थी जो परिवार का सदस्य भी नहीं था. इन 8 दिनों के दौरान, बच्ची को एक बिल्ली ने खरोंच भी दिया और उसे रेबीज से बचाव के लिए वैक्सीनेशन शुरू करना पड़ा. मां ने इस घटना से इनकार नहीं किया.
सुनवाई के दौरान कोर्ट ने सिर्फ नैनी रखने के लिए बच्ची की उपेक्षा नहीं माना. इसके बजाय, उसने यह देखा कि क्या मां के काम माता-पिता के जॉइंट कस्टडी अधिकारों के अनुरूप थे और क्या बच्ची की सुरक्षा का पर्याप्त ध्यान रखा गया.
अबू धाबी के सिविल फैमिली कानून के तहत, जॉइंट कस्टडी माता-पिता दोनों को अपने बच्चे के संबंध में समान अधिकार और जिम्मेदारियां देती है. 2022 के रिजॉल्यूशन नंबर 8 का आर्टिकल 40 कोर्ट को आर्थिक जुर्माना लगाने की अनुमति देता है, जब कोई माता-पिता जॉइंट कस्टडी की व्यवस्था या जज द्वारा जारी आदेश या उपाय का पालन करने में नाकाम रहता है. हालांकि जुर्माने की राशि और उसे तय करने का अधिकार कोर्ट पर निर्भर करता है.
इस मामले में, कोर्ट ने यह पाया कि विदेश जाते समय बच्ची को आया के पास छोड़ने की जगह मां को उसके पिता की मदद लेनी चाहिए थी. लेकिन मां के 8 दिनों तक बेटी से दूर रहने को लेकर हर दिन के लिए 10 हजार दिरहम के जुर्माने के साथ 80 हजार दिरहम का जुर्माना लगा दिया.
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