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चित्रकूट में मंदाकिनी का तांडव: 23 साल बाद आई सबसे भीषण बाढ़

August 30, 2026

चित्रकूट: भगवान श्री राम की तपोभूमि चित्रकूट और मध्य प्रदेश के सतना जिले में कुदरत का भीषण कहर बरपा है. पिछले 20-24 घंटों से जारी मूसलाधार बारिश और मानिकपुर स्थित डोडा डैम के ओव्हरफ्लो होकर टूटने से मंदाकिनी नदी ने विकराल रूप धारण कर लिया है. चित्रकूट की सड़कें दरिया बन चुकी हैं और पानी घरों की पहली मंजिल तक पहुंच गया है. वर्ष 2003 के बाद आई इस सबसे विनाशकारी बाढ़ से निपटने के लिए भारतीय सेना के हेलिकॉप्टरों, NDRF और SDRF की टीमों को मोर्चा संभालना पड़ा.

मंदाकिनी नदी का जलस्तर खतरे के निशान से कई फीट ऊपर पहुंचने के बाद रामघाट, भरतघाट समेत निचले इलाकों के 400 से ज्यादा मकान और दुकानें पानी में समा गए. देखते ही देखते पानी कमरों में घुस गया, जिसके बाद परिजनों को बुजुर्गों और बच्चों के साथ छतों पर शरण लेनी पड़ी.

हालात की गंभीरता को देखते हुए सेना के 2 हेलिकॉप्टरों को राहत अभियान में लगाया गया. मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के अनुसार, टीमों ने मुस्तैदी दिखाते हुए करीब 750 लोगों को छतों और जलमग्न इमारतों से सुरक्षित एयरलिफ्ट व बोट के जरिए रेस्क्यू किया. प्रभावितों के लिए प्रमोद वन, विकास प्राधिकरण, मदन गोपाल और गायत्री पीठ में आश्रय स्थल बनाए गए हैं, जहां भोजन व सूखा राशन बांटा जा रहा है.


  • बारिश के कारण मानिकपुर के पास बने डोडा डैम के टूटने से सतना-मानिकपुर रेलखंड के चितहरा रेलवे स्टेशन के पास पटरियां पूरी तरह पानी में डूब गईं. ट्रैक पर 3 फीट से अधिक पानी भर जाने के कारण रेल यातायात बुरी तरह प्रभावित हुआ.

    इसी बीच सोशल मीडिया पर एक होश उड़ाने वाला वीडियो तेजी से वायरल हो रहा है. वीडियो में देखा जा सकता है कि जलमग्न पटरियों पर लाइनमैन और रेलकर्मी अपनी जान जोखिम में डालकर घुटनों तक भरे पानी में उतरे. एक रेलकर्मी हाथ में लाल झंडी लेकर इंजन के आगे-आगे पैदल पटरी की स्थिति को परखता हुआ चला और उसके पीछे-पीछे ट्रेन पानी को चीरती हुई रेंगती नजर आई. रेलकर्मियों की इस तत्परता की हर तरफ तारीफ हो रही है.

    बाढ़ के कारण चित्रकूट को नयागांव से जोड़ने वाले मुख्य पुल को भारी नुकसान पहुंचा है. लोक निर्माण विभाग (PWD) ने सुरक्षा के मद्देनजर सतना-अटरा मार्ग, सभापुर-नयागांव मार्ग, पिंडरा-नकैला-बरौंदा मार्ग और मझगवां-पटना-पहाड़ी मार्ग समेत आधा दर्जन से अधिक रास्तों पर बैरिकेड्स लगाकर आवाजाही रोक दी है. इसके अलावा आरोग्यधाम, गुप्त गोदावरी, सती अनुसुइया आश्रम और कामदगिरि परिक्रमा मार्ग पर भारी जलभराव होने से श्रद्धालुओं और पर्यटकों का संपर्क कट गया है.

    बाढ़ की स्थिति का जायजा लेने खुद मुख्यमंत्री मोहन यादव चित्रकूट पहुंचे. उन्होंने बाढ़ प्रभावितों से मुलाकात की और अधिकारियों को निर्देश दिए कि पानी उतरते ही घर-घर सर्वे कराकर जनहानि, मकान क्षति व पशुहानि का मुआवजा दिया जाए. सीएम ने कहा कि समय रहते अलर्ट और रेस्क्यू टीमों की सक्रियता के चलते कोई जनहानि नहीं हुई, लेकिन अगले दो-तीन दिन विशेष सतर्कता बरतने की जरूरत है.

    फिलहाल, मंदाकिनी नदी का जलस्तर धीरे-धीरे घटने लगा है, जिससे स्थानीय लोगों ने राहत की सांस ली है. हालांकि, पीछे छूटे कीचड़, तबाह हुए सामान और बंद पड़े बाजारों को दोबारा पटरी पर लाना प्रशासन और स्थानीय निवासियों के लिए बड़ी चुनौती बना हुआ है.

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