
काठमांडू। नेपाल के पहाड़ी इलाकों में ग्लेशियर टूटने से आई विनाशकारी फ्लैश फ्लड ने भारी तबाही मचाई है। ताजा आंकड़ों के अनुसार, इस भयावह प्राकृतिक आपदा में अब तक 1,127 लोगों की मौत की पुष्टि हो चुकी है, जबकि 4,800 से ज्यादा लोग अब भी लापता हैं। प्रभावित क्षेत्रों और कई क्षतिग्रस्त हाइड्रोपावर प्रोजेक्ट्स की सुरंगों में फंसे लोगों को निकालने के लिए बड़े पैमाने पर खोज एवं बचाव अभियान चलाया जा रहा है। इसी बीच यह भी सामने आया है कि ग्लेशियर टूटने के 38 मिनट बाद अलर्ट भेजा गया था।
38 मिनट की देरी, ‘अर्ली वार्निंग सिस्टम’ की नाकामी
इस पूरी त्रासदी के बाद नेपाल का आपातकालीन अलर्ट सिस्टम सवालों के घेरे में है। ग्लेशियर ढहने के पूरे 38 मिनट बाद जारी इस अलर्ट ने बालेन सरकार के आपदा प्रबंधन की पोल खोल दी। 26 अगस्त की सुबह 8:37 बजे जब नेपाल-तिब्बत सीमा के पास ग्लेशियर टूटा, तब सरकारी तंत्र भी बेखबर था। आपदा प्रबंधन विभाग को पहला आधिकारिक अलर्ट मिलने के बाद सुबह 9:15 बजे प्रभावित क्षेत्रों, रसुवा, नुवाकोट, धाडिंग और चितवन के लोगों के मोबाइल पर टेक्स्ट मैसेज भेजे गए।
ग्लेशियर ढहने के पूरे 38 मिनट बाद जारी यह अलर्ट मैसेज भेजे गए। पहाड़ी इलाकों में भीषण गति से बहने वाली फ्लैश फ्लड के सामने चेतावनी में हुई यह 38 मिनट की देरी निचले इलाकों में रहने वाले लोगों के लिए काल साबित हुई, जिससे उन्हें सुरक्षित ऊंचे स्थानों पर जाने का पर्याप्त समय नहीं मिल सका।
सेंसर और संचार नेटवर्क की लापरवाही
नेपाल के खान एवं भूविज्ञान विभाग ने सुबह 8:37 बजे 4.4 तीव्रता का सिस्मिक डेटा रिकॉर्ड किया था, लेकिन इसे भूकंपीय झटका न मानकर सामान्य श्रेणी में रख दिया गया और अलर्ट जारी नहीं किया गया। वहीं, सुबह 8:50 बजे रसुवा में भोटेकोशी नदी का गेज तेज बहाव में बह गया। काठमांडू पोस्ट के अनुसार, राष्ट्रीय आपदा जोखिम न्यूनीकरण एवं प्रबंधन प्राधिकरण (NDRRMA) के अधिकारियों का कहना है कि कई इलाकों में बाढ़ के शुरुआती झोंके से ही टेलीकॉम टावर नष्ट हो गए थे। हालांकि, 9:15 बजे भेजे गए टेक्स्ट अलर्ट के बाद कुछ लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुँचाया गया, लेकिन दूर-दराज के गांवों तक जानकारी पहुंचने से पहले ही जलप्रलय तबाही मचा चुका था।
समय पर चेतावनी
विशेषज्ञों का कहना है कि हिंदू कुश हिमालयी क्षेत्र में जलवायु परिवर्तन के कारण ग्लेशियर दोगुनी तेजी से पिघल रहे हैं। इसके बावजूद, नेपाल का चेतावनी तंत्र अब भी केवल सामान्य जलस्तर मापने वाले गेज पर टिका है, जो ऐसी भीषण आपदाओं को भांपने में असमर्थ है। फिलहाल इस भीषण बाढ़ के बाद लापता लोगों का बचाव और खोज अभियान जारी है। राहतकर्मी और सुरक्षा बल बाढ़ प्रभावित इलाकों तथा नदी के निचले हिस्सों में लगातार तलाश कर रहे हैं।
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