वाशिंगटन। ईरान और अमेरिका (West Asia Conflict) के बीच जारी सैन्य संघर्ष के बीच अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने दावा किया है कि यह युद्ध अब ज्यादा लंबा नहीं चलेगा। व्हाइट हाउस (the White House) में पत्रकारों से बातचीत के दौरान ट्रंप ने कहा कि उन्हें नहीं लगता कि ईरान के साथ जारी जंग बहुत ज्यादा समय तक चलेगी। उनका यह बयान ईरान पर अमेरिका के हालिया हमलों के कुछ दिन बाद आया है।
यह संघर्ष 28 फरवरी को शुरू हुआ था और हालिया अमेरिकी हमलों के बाद दोनों देशों के बीच तनाव एक बार फिर बढ़ गया है।
ट्रंप ने कहा कि अमेरिकी सेना ने पिछली रात ईरान पर ‘बहुत बड़ा हमला’ किया। उनके मुताबिक, इन हमलों में होर्मुज जलडमरूमध्य के आसपास हाल में स्थापित किए गए सैन्य उपकरणों को निशाना बनाया गया। इनमें रडार और मिसाइल से जुड़ी प्रणालियां शामिल थीं।
अमेरिकी राष्ट्रपति ने दावा किया कि ईरान की ओर से जवाब अपेक्षाकृत हल्का था, जबकि अमेरिका ने जोरदार हमला किया। उन्होंने यह भी कहा कि होर्मुज जलडमरूमध्य पर अमेरिका का ‘बहुत मजबूत नियंत्रण’ है।
ट्रंप के मुताबिक, अमेरिकी सैनिकों ने इस महत्वपूर्ण समुद्री मार्ग से बारूदी सुरंगें हटाई हैं। साथ ही अमेरिकी सेना ऐसे जहाजों को भी सुरक्षित निकालने का काम कर रही है, जो लाखों बैरल तेल लेकर इस मार्ग से गुजर रहे हैं।
ट्रंप ने दावा किया कि ईरानी सेना होर्मुज जलडमरूमध्य में रडार और मिसाइल प्रणालियों को दोबारा स्थापित करने की कोशिश कर रही थी। इसके अलावा ईरान कथित तौर पर बारूदी सुरंगें बिछाने की क्षमता भी फिर से हासिल करने की कोशिश कर रहा था।
उन्होंने कहा कि अमेरिका कई जहाजों को निशाना बना रहा है और ईरान के पास अब रडार नहीं है, क्योंकि अमेरिकी हमलों में उन्हें नष्ट कर दिया गया है। ट्रंप ने यह भी स्पष्ट किया कि अमेरिका जरूरत पड़ने पर आगे और हमले करने के लिए तैयार है।
जब ट्रंप से पूछा गया कि अमेरिका के नए सैन्य अभियान के चलने की अवधि कितनी हो सकती है, तो उन्होंने कहा कि यह जल्द खत्म हो जाएगा।
ट्रंप ने कहा कि उन्हें नहीं लगता कि यह संघर्ष बहुत ज्यादा लंबा चलेगा। उन्होंने साथ ही यह भी कहा कि उन्हें नहीं पता कि ईरान और कितना नुकसान सह सकता है, लेकिन इससे अमेरिकी रुख पर कोई फर्क नहीं पड़ता।
ट्रंप का यह बयान ऐसे समय आया है जब अमेरिकी सेना की मध्य कमान यानी सेंटकॉम ने मंगलवार को ईरान के खिलाफ हमलों की एक नई लहर पूरी किए जाने की जानकारी दी थी।
सेंटकॉम के अनुसार, इन हमलों में ईरान के इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) से जुड़ी कई सुविधाओं को निशाना बनाया गया। इनमें वायु रक्षा प्रणालियां, रडार सिस्टम, समुद्री संसाधन और सुविधाएं, बारूदी सुरंगें बिछाने की क्षमता तथा संचार केंद्र शामिल थे।
अमेरिकी कमान के मुताबिक, ये कार्रवाई IRGC की ओर से होर्मुज जलडमरूमध्य में वाणिज्यिक जहाजों और अमेरिकी सैनिकों को निशाना बनाने के कथित ‘प्रयासों’ के बाद की गई।
दूसरी तरफ, ईरान ने अमेरिका के ताजा हमलों की कड़ी निंदा की है। ईरानी विदेश मंत्रालय ने अमेरिका पर देश की संप्रभुता का उल्लंघन करने का आरोप लगाया।
ईरान का कहना है कि अमेरिकी हमलों में उसके कई प्रांतों में गैर-सैन्य बुनियादी ढांचे और आम लोगों से जुड़े ठिकानों को निशाना बनाया गया। ईरानी विदेश मंत्रालय ने दावा किया कि उसकी सेना ने आत्मरक्षा में अमेरिका के खिलाफ ‘जोरदार हमले’ किए और अमेरिकी सैन्य ठिकानों को निशाना बनाया।
अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते सैन्य तनाव में होर्मुज जलडमरूमध्य रणनीतिक रूप से बेहद महत्वपूर्ण बन गया है। यह दुनिया के सबसे अहम तेल परिवहन मार्गों में से एक है। यहां सैन्य गतिविधियां बढ़ने से केवल दोनों देशों के बीच तनाव ही नहीं, बल्कि वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति और समुद्री व्यापार पर भी असर पड़ने की आशंका बनी हुई है।
फिलहाल ट्रंप जहां युद्ध जल्द खत्म होने की उम्मीद जता रहे हैं, वहीं ईरान लगातार अमेरिकी कार्रवाई को अपनी संप्रभुता के खिलाफ हमला बता रहा है। ऐसे में दोनों देशों के बीच सैन्य टकराव आगे किस दिशा में जाता है, इस पर दुनिया की नजर बनी हुई है।
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