
नई दिल्ली। चार साल से ज्यादा समय से मिसाइलों और ड्रोन हमलों (Missile and Drone Attacks) के बीच जी रहे यूक्रेन (Ukraine) में बच्चों की पढ़ाई ने भी नया रूप ले लिया है। देश में अब 74 पूरी तरह भूमिगत स्कूल संचालित हो रहे हैं। जमीन के ऊपर इन स्कूलों की जगह अक्सर सिर्फ खेल का मैदान या फुटबॉल टर्फ नजर आता है, लेकिन कई मीटर नीचे कंक्रीट की मजबूत दीवारों के बीच क्लासरूम, बेंच, ब्लैकबोर्ड और बच्चों की चहल-पहल दिखाई देती है।
दक्षिणी यूक्रेन के औद्योगिक शहर जापोरिजिया में स्कूल का पहला दिन किसी साइंस-फिक्शन फिल्म के दृश्य जैसा लगता है। रूस के लगातार ड्रोन और मिसाइल हमलों के बीच यहां बनाए गए अंडरग्राउंड स्कूल बच्चों को सुरक्षित माहौल में पढ़ाई जारी रखने का मौका दे रहे हैं। माता-पिता के लिए ये बंकर स्कूल अब मजबूरी से ज्यादा बच्चों की सुरक्षा और शिक्षा का भरोसा बन चुके हैं।
‘बिना जमीन के नीचे गए बच्चों को पढ़ाना मुश्किल’
जापोरिजिया में किराने की दुकान चलाने वाले 39 वर्षीय ऑलेक्सांद्र लागिन के दो बेटे भी भूमिगत स्कूल में पढ़ते हैं। उनका कहना है कि ड्रोन और मिसाइलों के दौर में बच्चों को सुरक्षित रखते हुए पढ़ाई जारी रखना जमीन के नीचे जाए बिना लगभग नामुमकिन हो गया है। खास बात यह है कि युद्ध के मोर्चे से महज 15 किलोमीटर दूर जापोरिजिया, राजधानी कीव की तुलना में बच्चों की निर्बाध शिक्षा के लिए बेहतर तरीके से तैयार दिखाई देता है।
सायरन बजने पर भी जारी रहती है पढ़ाई
कीव में स्कूल के दौरान एक दिन में औसतन 158 मिनट तक हवाई हमले के सायरन बजते हैं। सायरन शुरू होते ही बच्चों को सामान्य बेसमेंट में ले जाया जाता है। वहां जगह सीमित होने के कारण पढ़ाई पूरी तरह रुक जाती है। इसके उलट जापोरिजिया में यूरोपीय फंडिंग से 10 अत्याधुनिक भूमिगत स्कूल बनाए गए हैं। यहां हवाई हमले का सायरन बजने के बावजूद कक्षाएं जारी रह सकती हैं। बच्चों के लिए पढ़ाई और सुरक्षा को एक ही जगह पर सुनिश्चित करने की कोशिश की गई है।
इन स्कूलों को कैसे बनाया गया सुरक्षित?
भूमिगत स्कूलों को इस तरह तैयार किया गया है कि बाहरी हमलों की स्थिति में भी बच्चों की सुरक्षा और जरूरी सुविधाएं बनी रहें।
– अत्याधुनिक एयर डक्ट लगाए गए हैं, जो रेडिएशन और जहरीले धुएं को फिल्टर कर सकते हैं।
– रूस के हमलों के दौरान बिजली ग्रिड ठप होने की स्थिति में स्वतः चालू होने वाले हेवी-ड्यूटी डीजल जनरेटर लगाए गए हैं।
– कंक्रीट की मजबूत दीवारों के सहारे वेंटिलेशन पाइप बनाए गए हैं।
– सुरक्षित माहौल में बच्चों के लिए पढ़ाई के साथ खेल और अन्य गतिविधियों की भी व्यवस्था है।
छात्र बोले- ‘यहां डर नहीं लगता’
8वीं कक्षा के छात्र डामिर को भूमिगत स्कूल में पढ़ना पसंद है। वह कहते हैं कि यहां उन्हें डर नहीं लगता। हालांकि फुटबॉल खेलते समय सायरन बजने पर खेल रोककर नीचे जाना उन्हें अच्छा नहीं लगता।
पिता युद्ध के मोर्चे पर, बेटा बंकर में पढ़ रहा
8वीं कक्षा में पढ़ने वाले 13 वर्षीय डैनिलो के पिता दिमित्रो सिजीख युद्ध के मोर्चे पर तैनात हैं। उनके हाथ में हथियार है और दूसरी ओर उनका बेटा सुरक्षित भूमिगत स्कूल में पढ़ाई कर रहा है। दिमित्रो कहते हैं कि बेटे की सुरक्षा का भरोसा होने के कारण वह बिना उसकी चिंता किए अपना फर्ज निभा पा रहे हैं।
युद्ध का असर बच्चों की पढ़ाई पर भी
सुरक्षित स्कूलों के बावजूद युद्ध का मानसिक असर बच्चों की शिक्षा पर पड़ रहा है। कीव की रिसर्च संस्था ‘सीडोस’ की शिक्षा विश्लेषक टेटियाना झेरियोबकिना के मुताबिक, लगातार युद्ध से पैदा तनाव और डर के कारण परीक्षाओं में बच्चों के स्कोर गिर रहे हैं।
जापोरिजिया के एक स्कूल की प्रिंसिपल हलीना वोल्कोवा गलियारे में एक बच्चे को गले लगाते हुए कहती हैं कि वे इसे भयावह या कयामत का मंजर कहकर नहीं रोते, क्योंकि यही अब उनकी जिंदगी की हकीकत है। युद्ध ने यूक्रेन के बच्चों से सामान्य स्कूल जीवन छीन लिया है, लेकिन इन भूमिगत स्कूलों के जरिए देश यह सुनिश्चित करने की कोशिश कर रहा है कि मिसाइलों के बीच भी उनकी पढ़ाई और भविष्य पूरी तरह न रुके।
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