नई दिल्ली। भारत के पूर्व चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ (CDS) अनिल चौहान (Anil Chauhan) ने पाकिस्तान (Pakistan) को लेकर एक बार फिर गंभीर सुरक्षा चिंता जताई है। शनिवार, 5 सितंबर 2026 को नई दिल्ली में एक कार्यक्रम को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा कि आने वाले समय में भी पाकिस्तान भारत के लिए बड़ी सुरक्षा चुनौती और खतरा बना रहेगा।
पूर्व CDS ने कहा कि पाकिस्तान के पास परमाणु हथियार होने से भारत और पाकिस्तान के बीच शीर्ष स्तर पर एक हद तक रणनीतिक स्थिरता जरूर बनी है, लेकिन इसका दूसरा पहलू भी है। उनके मुताबिक, परमाणु हथियारों की मौजूदगी ने निचले स्तर पर अस्थिरता की गुंजाइश बढ़ाई है। अंतरराष्ट्रीय रणनीतिक विमर्श में इसे ‘स्टेबिलिटी-इंस्टेबिलिटी पैराडॉक्स’ कहा जाता है।
अनिल चौहान ने कहा कि पाकिस्तान की रणनीति पारंपरिक सैन्य अभियानों की गुंजाइश सीमित रखने और उसकी जगह आतंकवाद तथा सीमा पार गतिविधियों जैसे सब-कंवेंशनल ऑपरेशंस को बढ़ावा देने की रही है।
उन्होंने कहा कि पाकिस्तान परमाणु हथियारों की वजह से बड़े पैमाने पर पारंपरिक युद्ध की संभावना को सीमित रखना चाहता है और इसी माहौल में आतंकवाद तथा प्रॉक्सी वॉर को अपने उद्देश्यों के लिए इस्तेमाल करता है।
पूर्व CDS ने स्पष्ट कहा कि आतंकवाद और प्रॉक्सी वॉर भारत के लिए आगे भी बड़ी चुनौती बने रहेंगे। उनके मुताबिक इसका मुकाबला करने के लिए भारत को विश्वसनीय प्रतिरोधक क्षमता यानी क्रेडिबल डिटरेंस बनाए रखनी होगी।
उन्होंने भारत की पिछली सैन्य कार्रवाइयों का जिक्र करते हुए कहा कि देश ने सीमा पार किए गए तीन प्रमुख अभियानों के जरिए अपनी क्षमता और इरादे का प्रदर्शन किया है। इनमें उरी, बालाकोट और ऑपरेशन सिंदूर शामिल हैं।
अनिल चौहान ने कहा कि भारत को पाकिस्तान के लिए आतंकवाद और प्रॉक्सी वॉर को अपनी नीति के साधन के तौर पर इस्तेमाल करना इतना महंगा बनाना होगा कि वह भविष्य में ऐसी रणनीति अपनाने से पीछे हटे।
उन्होंने जोर देकर कहा कि पाकिस्तान को यह स्पष्ट संदेश मिलना चाहिए कि आतंकवाद या सीमा पार प्रॉक्सी गतिविधियों की कीमत उसे चुकानी पड़ेगी।
पूर्व CDS ने ऑपरेशन सिंदूर, भारत-पाकिस्तान संधि को रोके रखने और कुछ व्यावहारिक कदमों का भी उल्लेख किया। उनके मुताबिक, इन उपायों से पाकिस्तान के व्यवहार में बदलाव लाने या उसे ऐसा करने के लिए मजबूर करने की संभावना हो सकती है।
हालांकि, उन्होंने इसके साथ एक दूसरी आशंका भी जाहिर की। अनिल चौहान ने कहा कि हाल के समय में पाकिस्तान ने कुछ समझौतों और संधियों पर हस्ताक्षर किए हैं। इससे वहां किसी तरह का ओवर-कॉन्फिडेंस पैदा हो सकता है और पाकिस्तान भविष्य में कोई गलत आकलन कर सकता है।
इसी वजह से उन्होंने भारत को सतर्क रहने की जरूरत पर जोर दिया। उनके मुताबिक, पाकिस्तान की रणनीति और उसकी गतिविधियों पर लगातार नजर रखना जरूरी है, क्योंकि परमाणु हथियारों की मौजूदगी के बावजूद आतंकवाद और प्रॉक्सी वॉर का खतरा खत्म नहीं हुआ है।
©2026 Agnibaan , All Rights Reserved