नई दिल्ली। अमेरिका और ईरान (The United States and Iran) के बीच जारी सैन्य टकराव (Military confrontation) को लेकर अमेरिका के पूर्व रक्षा सचिव और पूर्व CIA निदेशक लियोन पैनेटा ने बड़ा आकलन किया है। उनका कहना है कि मौजूदा हालात को देखते हुए इस संघर्ष के जल्द खत्म होने की संभावना कम है और यह बिना किसी ठोस समाधान के अगले छह महीने तक जारी रह सकता है।
द गार्जियन के मुताबिक, एक हालिया इंटरव्यू में पैनेटा ने कहा कि अमेरिका और ईरान एक ऐसे गतिरोध में फंस चुके हैं, जहां संघर्ष को समाप्त करने के विकल्प लगातार सीमित होते जा रहे हैं। उनके मुताबिक, अगर मौजूदा स्थिति में बड़ा बदलाव नहीं आता है तो यह टकराव लंबे समय तक खिंच सकता है।
2011 से 2013 तक अमेरिकी रक्षा विभाग का नेतृत्व कर चुके पैनेटा ने चेतावनी दी कि अमेरिका-ईरान संघर्ष मध्य पूर्व में इराक और अफगानिस्तान जैसे एक और लंबे और असफल युद्ध में बदल सकता है।
उनका कहना है कि मौजूदा टकराव में अमेरिका के सामने स्पष्ट निकास रणनीति नजर नहीं आ रही है। एक तरफ वॉशिंगटन ईरान पर दबाव बनाए रखना चाहता है, वहीं दूसरी तरफ संघर्ष को इतना बढ़ाने से बचना चाहता है कि पूरा क्षेत्र लंबे युद्ध की चपेट में आ जाए।
पैनेटा ने अमेरिकी सैन्य नेतृत्व की मौजूदा स्थिति को लेकर भी चिंता जताई। उनके मुताबिक अमेरिकी सैनिक ऐसे समय में युद्ध में उतर रहे हैं, जब पेंटागन और कमांड स्ट्रक्चर में कथित तौर पर काफी अव्यवस्था दिखाई दे रही है।
उन्होंने कहा कि इससे विरोधियों को यह संदेश जा सकता है कि अमेरिका अपनी सैन्य शक्ति का प्रभावी ढंग से इस्तेमाल करने की स्थिति में कमजोर पड़ रहा है।
हालांकि, पेंटागन के प्रवक्ता शॉन पार्नेल ने इन आरोपों को सिरे से खारिज किया। उन्होंने कहा कि अमेरिकी युद्ध विभाग के अव्यवस्थित होने की धारणा निराधार है और देश की सुरक्षा के लिए काम कर रहे सैन्यकर्मियों तथा पेशेवरों का अपमान है। उनके अनुसार, मौजूदा प्रक्रिया को सुधार के हिस्से के रूप में देखा जाना चाहिए।
पैनेटा के आकलन के मुताबिक, राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के सामने फिलहाल तीन प्रमुख विकल्प हैं।
पहला विकल्प-पीछे हटना:
अमेरिका संघर्ष से पीछे हट सकता है और इसे हार के रूप में स्वीकार कर सकता है। हालांकि, पैनेटा के मुताबिक इसकी संभावना सबसे कम है।
दूसरा विकल्प-गतिरोध जारी रखना:
अमेरिका जवाबी हमलों के जरिए मौजूदा स्थिति को बनाए रख सकता है और दोनों पक्ष एक बड़े युद्ध से बचने की कोशिश कर सकते हैं। लेकिन बातचीत या आत्मसमर्पण की दिशा में आगे नहीं बढ़ने पर यह रणनीति संघर्ष को लंबा खींच सकती है।
तीसरा विकल्प-होर्मुज पर नियंत्रण:
पैनेटा के अनुसार अमेरिका के पास होर्मुज जलडमरूमध्य को फिर से खोलने और ईरान की उस क्षमता को खत्म करने का विकल्प भी है, जिसके जरिए वह वैश्विक व्यापार की इस महत्वपूर्ण समुद्री धमनी को बाधित कर सकता है।
जब पैनेटा से पूछा गया कि क्या अमेरिका इस संघर्ष में जीत हासिल कर सकता है, तो उन्होंने कहा कि इसके लिए अमेरिकी रणनीति में बड़ा बदलाव जरूरी होगा।
उनके मुताबिक, अमेरिका को स्पष्ट रूप से यह दिखाना होगा कि उसकी सर्वोच्च प्राथमिकता होर्मुज जलडमरूमध्य को फिर से खोलना है। उनके आकलन में इसी लक्ष्य को केंद्र में रखकर आगे की सैन्य और कूटनीतिक रणनीति तय करनी होगी।
पूर्व रक्षा सचिव ने राष्ट्रपति ट्रंप की विश्वसनीयता को लेकर भी टिप्पणी की। पैनेटा का कहना है कि संघर्ष खत्म करने के लिए समझौते और होर्मुज जलडमरूमध्य को खुला रखने को लेकर ट्रंप की ओर से किए गए कुछ दावे बाद में गलत साबित हुए हैं, जिससे उनकी विश्वसनीयता को नुकसान पहुंचा है।
मार्च में भी पैनेटा ने ट्रंप के सामने इसी तरह की दुविधा का जिक्र किया था। उस समय उनका कहना था कि अमेरिकी राष्ट्रपति को यह तय करना होगा कि होर्मुज में ईरान के प्रभाव को खत्म करने के लिए संघर्ष को और बढ़ाया जाए या फिर पीछे हटकर जीत का दावा किया जाए। पैनेटा के मुताबिक, मौजूदा हालात में यह दुविधा अब भी कायम है।
पैनेटा के आकलन ने यह संकेत दिया है कि अमेरिका और ईरान के बीच मौजूदा टकराव का जल्द समाधान आसान नहीं होगा। अगर दोनों पक्ष बातचीत की दिशा में निर्णायक कदम नहीं उठाते और सैन्य जवाबी कार्रवाई जारी रहती है, तो संघर्ष अगले कई महीनों तक खिंच सकता है।
हालांकि, यह पैनेटा का आकलन है, आधिकारिक अमेरिकी टाइमलाइन नहीं। व्हाइट हाउस ने उनकी इन टिप्पणियों पर फिलहाल कोई प्रतिक्रिया नहीं दी है।
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