
नई दिल्ली. सऊदी अरब (Saudi Arabia) पर हूती विद्रोहियों (Houthi rebels) के हालिया हमलों को लेकर तुर्की-पाकिस्तान (Türkiye and Pakistan) ने प्रतिक्रिया दी है. इन मुल्कों के विदेश मंत्रालयों ने हमलों की सबसे कड़े शब्दों में निंदा तो की लेकिन रक्षा समझौते के बावजूद बचाव में नहीं उतरे हैं. मक्का में इन तीनों ने एक रक्षा समझौता किया था जिसके तहत ‘एक पर हमला, सभी पर हमला’ माना जाता है. सऊदी अरब इस रक्षा समझौते की अहम कड़ी है.
बीते कई दिनों से हूती सऊदी के ठिकानों पर लगातार हमले कर रहे हैं. बैलिस्टिक मिसाइलें दाग रहे हैं. बावजूद इसके तुर्की-पाकिस्तान ने सऊदी का बचाव नहीं किया. अपनी सेनाएं नहीं भेजीं और हूती पर जवाबी हमले नहीं किए.
हालांकि, तुर्की ने साफ कहा कि वह सऊदी अरब की संप्रभुता और क्षेत्रीय अखंडता का समर्थन करता है. तुर्की के विदेश मंत्रालय ने कहा कि हूतियों की यह कार्रवाई यमन में संघर्ष को स्थायी राजनीतिक समाधान के जरिए खत्म करने की कोशिशों को भी नुकसान पहुंचा रही है. तुर्की ने हूतियों से अपनी आक्रामक कार्रवाई तुरंत बंद करने की अपील की है.
हूती ने सऊदी तेल कंपनी पर किए मिसाइल हमले
यमन के हूतियों ने सऊदी अरब के अबहा, नजरान और जिजान शहरों में सऊदी तेल कंपनी अरामको की सुविधाओं के साथ-साथ खमिस मुशैत में एक एयरबेस को बैलिस्टिक मिसाइलों और ड्रोन से निशाना बनाया. इन हमलों के बाद क्षेत्र में तनाव और बढ़ गया है.
हूतियों ने इन हमलों को सऊदी अरब की कथित कार्रवाई के जवाब में बताया है. हूती स्वास्थ्य मंत्रालय के मुताबिक, सऊदी अरब के एक जेल पर किए गए हमले में 17 लोगों की मौत हुई थी. इसके बाद हूतियों के विदेश मंत्रालय ने कहा कि सऊदी अरब के हमलों का जवाब देना उनका वैध अधिकार है, जिसकी गारंटी अंतरराष्ट्रीय कानूनों, चार्टर और प्रथाओं के तहत है.
सऊदी पर हमले के पीछे ईरान का हाथ
यमन की संसद ने अल-हज्म करेक्शनल फैसिलिटी पर हुए घातक हमले की भी निंदा की है. संसद ने इसे मानवता के खिलाफ अपराध और अंतरराष्ट्रीय कानून का खुला उल्लंघन बताया. साथ ही सऊदी अरब पर यमनी नागरिकों के खिलाफ व्यवस्थित अपराधों का आरोप लगाया.
अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने सऊदी अरब पर हुए कुछ हूती हमलों के पीछे ईरान का हाथ होने का दावा किया है. हालांकि, हूती लगातार अपने हमलों को सऊदी कार्रवाई के जवाब के तौर पर पेश कर रहे हैं.
पाकिस्तान ने भी सऊदी पर हमले की निंदा की
तुर्की के अलावा ओमान, कतर, बहरीन, कुवैत और पाकिस्तान ने भी सऊदी अरब पर हूती हमलों की निंदा की है और सऊदी अरब के समर्थन का ऐलान किया है. इस बीच, दक्षिण-पश्चिमी यमन में हूती विद्रोहियों और सरकार समर्थक बलों के बीच फिर से तेज हुई जंग के कारण करीब 20 हजार लोग अपने घर छोड़ने को मजबूर हुए हैं. इंटरनेशनल ऑर्गनाइजेशन फॉर माइग्रेशन के मुताबिक, बड़ी संख्या में लोगों के विस्थापन से मानवीय हालात भी गंभीर हुए हैं.
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