img-fluid

बदरीनाथ में आस्था के बीच बड़ा हादसा तप्तकुंड में ज्यादा देर स्नान बना जानलेवा डॉक्टरों ने दी खास सलाह

September 13, 2026
नई दिल्ली। बदरीनाथ धाम (Badrinath Dham)में आस्था के साथ तप्तकुंड(Taptkund) में स्नान करने वाले (Devotees)श्रद्धालुओं के लिए एक गंभीर चेतावनी सामने आई है। चमोली जिले में स्थित प्रसिद्ध तप्तकुंड में अधिक संख्या में डुबकी लगाने और लंबे समय तक गर्म पानी में रहने को चिकित्सकों ने स्वास्थ्य के लिए खतरनाक बताया है। शुक्रवार को कुंड में 108 डुबकी लगाने के दौरान दो सगी बहनों की मौत के बाद श्रद्धालुओं से विशेष सावधानी बरतने की अपील की गई है। चिकित्सकों के अनुसार प्राकृतिक रूप से गर्म और सल्फरयुक्त पानी में अधिक समय तक रहने से शरीर पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ सकता है और कुछ परिस्थितियों में यह जानलेवा भी साबित हो सकता है।

बदरीनाथ के सरकारी अस्पताल के प्रभारी चिकित्सक डॉ. सचिन राणा के अनुसार तप्तकुंड का पानी प्राकृतिक रूप से गर्म और सल्फरयुक्त है। इसके अलावा कुंड के आसपास गर्म हवाओं का प्रभाव भी रहता है। ऐसे वातावरण में लंबे समय तक रहने से शरीर पर अतिरिक्त दबाव पड़ सकता है। उन्होंने श्रद्धालुओं को सलाह दी है कि कुंड में अधिकतम दो से तीन डुबकी लगाने के बाद बाहर निकल जाना चाहिए। खासकर बुजुर्गों और हृदय संबंधी समस्या वाले लोगों को अतिरिक्त सावधानी बरतने की जरूरत है।

शुक्रवार को हुआ हादसा इस चेतावनी की गंभीरता को सामने लाता है। 71 वर्षीय रामू देवी और 63 वर्षीय प्रेमा देवी सगी बहनें थीं। बताया गया कि दोनों करीब एक सप्ताह से प्रतिदिन तप्तकुंड में 108 डुबकी लगा रही थीं। शुक्रवार को भी उन्होंने इसी तरह स्नान किया लेकिन इसके बाद दोनों की तबीयत बिगड़ गई। दोनों की हृदय गति रुकने से मौत हो गई। घटना के बाद तीर्थयात्रियों के बीच भी चिंता बढ़ गई और प्रशासन तथा चिकित्सकों की ओर से सावधानी बरतने की जरूरत पर जोर दिया गया।

तप्तकुंड बदरीनाथ धाम आने वाले श्रद्धालुओं के लिए धार्मिक आस्था का महत्वपूर्ण केंद्र है। मान्यता के चलते बड़ी संख्या में लोग यहां स्नान करते हैं। कई श्रद्धालु धार्मिक संकल्प के तहत बार बार डुबकी लगाते हैं। हालांकि विशेषज्ञों का कहना है कि धार्मिक आस्था के साथ शरीर की क्षमता और स्वास्थ्य का ध्यान रखना भी जरूरी है। गर्म पानी में लंबे समय तक रहने या बार बार डुबकी लगाने से चक्कर आना कमजोरी महसूस होना मूर्छा आना और हृदय संबंधी परेशानी जैसी स्थिति उत्पन्न हो सकती है।

ऊंचाई वाले क्षेत्र में होने के कारण बदरीनाथ में मौसम और वातावरण मैदानी इलाकों से अलग होता है। ऐसे में श्रद्धालुओं को अपनी शारीरिक स्थिति को ध्यान में रखते हुए ही स्नान करना चाहिए। यदि स्नान के दौरान चक्कर घबराहट सांस लेने में परेशानी अत्यधिक कमजोरी या बेचैनी महसूस हो तो तुरंत कुंड से बाहर निकलकर चिकित्सकीय सहायता लेनी चाहिए।


  • चिकित्सकों की सलाह का उद्देश्य श्रद्धालुओं की धार्मिक आस्था को रोकना नहीं बल्कि उसे सुरक्षित बनाना है। तप्तकुंड में स्नान करते समय सीमित समय तक रहना और अधिक डुबकी लगाने से बचना जरूरी है। दो महिलाओं की मौत की घटना ने यह साफ कर दिया है कि आस्था के साथ सावधानी भी उतनी ही महत्वपूर्ण है। श्रद्धालुओं को अपनी सेहत को प्राथमिकता देते हुए चिकित्सकों की सलाह का पालन करना चाहिए ताकि बदरीनाथ की यात्रा श्रद्धा के साथ सुरक्षित भी रहे।

    Share:

  • क्या चाहते हैं किम जोंग उन? त्रिपक्षीय सैन्य अभ्यास खत्म होते ही उत्तर कोरिया ने दागीं मिसाइलें, दक्षिण कोरिया भड़का

    Sun Sep 13 , 2026
    सियोल। दक्षिण कोरिया, अमेरिका और जापान (South Korea, the United States, and Japan) के पांच दिवसीय त्रिपक्षीय सैन्य अभ्यास (Military exercise) के खत्म होने के महज एक दिन बाद उत्तर कोरिया ने पूर्वी सागर की ओर कई कम दूरी की बैलिस्टिक मिसाइलें दाग दीं। शनिवार को हुए इस प्रक्षेपण की जानकारी दक्षिण कोरियाई सेना ने […]
    सम्बंधित ख़बरें
    लेटेस्ट
    खरी-खरी
    का राशिफल
    जीवनशैली
    मनोरंजन
    अभी-अभी
  • Archives

  • ©2026 Agnibaan , All Rights Reserved