इस्लामाबाद। पाकिस्तान (Pakistan) में 2026 के दौरान सुरक्षाबलों को हिंसक घटनाओं और आतंकवादी हमलों (Terrorist attacks) का सामना करना पड़ रहा है। साउथ एशियन टेररिज्म पोर्टल (SATP) के ताजा आंकड़ों के अनुसार, 1 जनवरी से 15 सितंबर 2026 के बीच पाकिस्तान में 1,000 से अधिक सुरक्षाकर्मी हिंसक घटनाओं और आत्मघाती हमलों में मारे गए हैं। इस आंकड़े में सेना के अलावा फ्रंटियर कोर (एफसी), पुलिस और लेवीज के जवान भी शामिल हैं।
इसी अवधि में 650 से अधिक आम नागरिकों के मारे जाने की भी जानकारी दी गई है। उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार, 2009 के बाद यह तीसरा अवसर है जब पाकिस्तान में सुरक्षाबलों को इतनी बड़ी संख्या में कर्मियों की जान गंवानी पड़ी है।
पाकिस्तान में आतंकवादी हिंसा से सबसे अधिक प्रभावित इलाकों में खैबर पख्तूनख्वा (केपीके) और बलूचिस्तान शामिल हैं। इन प्रांतों में सुरक्षा बलों के शिविरों, पुलिस थानों, काफिलों और सरकारी प्रतिष्ठानों को निशाना बनाकर हमले किए जाने की घटनाएं सामने आती रही हैं।
खैबर पख्तूनख्वा में तहरीक-ए-तालिबान पाकिस्तान (टीटीपी) समेत विभिन्न आतंकवादी संगठनों की गतिविधियां सुरक्षा के लिए चुनौती बनी हुई हैं। वहीं बलूचिस्तान में अलगाववादी संगठनों की हिंसक गतिविधियां भी लंबे समय से जारी हैं।
खैबर पख्तूनख्वा के कई हिस्से पाकिस्तान-अफगानिस्तान सीमा यानी डूरंड रेखा के करीब हैं। क्षेत्र में सक्रिय टीटीपी का घोषित उद्देश्य पाकिस्तान में अपने प्रभाव का विस्तार करना और देश की मौजूदा संवैधानिक व्यवस्था को बदलना रहा है।
पाकिस्तान और अफगानिस्तान के बीच सीमा पार आतंकवाद को लेकर भी लंबे समय से आरोप-प्रत्यारोप जारी हैं। इस मुद्दे ने दोनों देशों के संबंधों में तनाव बढ़ाया है।
SATP के आंकड़ों के अनुसार, वर्ष 2000 से पाकिस्तान में उग्रवादी हिंसा में 78,000 से अधिक लोगों की जान जा चुकी है। इनमें सुरक्षाकर्मी और आम नागरिक दोनों शामिल हैं।
2026 के शुरुआती साढ़े आठ महीनों में ही सुरक्षाबलों के 1,000 से अधिक कर्मियों की मौत का आंकड़ा पाकिस्तान के सामने मौजूद सुरक्षा चुनौती की गंभीरता को दर्शाता है। खासकर खैबर पख्तूनख्वा और बलूचिस्तान में लगातार हो रही हिंसा के कारण पाकिस्तानी सुरक्षा एजेंसियों पर दबाव बना हुआ है।
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