
नई दिल्ली: लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष और कांग्रेस सांसद राहुल गांधी ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के जन्मदिन पर देश भर में दिए जलाए जाने को लेकर निशाना साधा है. उन्होंने इसे छात्रों की बुनियादी जरूरतों से जोड़ते हुए तीखा हमला किया. उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार के पास दीयों पर खर्च करने के लिए पैसा है, लेकिन ग्रामीण क्षेत्रों के छात्रों के लिए बुनियादी ढांचे और वित्तीय सहायता प्रदान करने के लिए पैसा नहीं है.
राहुल गांधी ने रविवार (20 सितंबर) को सोशल मीडिया पर एक पोस्ट शेयर किया, जिसमें उन्होंने इंदौर में आयोजित अपने छात्रों की गूंज कार्यक्रम के दौरान एक छात्रा की ओर से उठाए गए सवाल का जिक्र किया. अपनी पोस्ट में उन्होंने उच्च शिक्षा के लिए गांव से शहर जाने वाली महिलाओं की व्यवस्थागत बाधाओं को रेखांकित किया.
अपनी पोस्ट में कांग्रेस सांसद ने कहा ‘सरकार के पास दिया जलाने के लिए पैसा है – हमारे हॉस्टल के लिए क्यों नहीं?’. यह सवाल कल इंदौर में एक छात्रा ने मुझसे पूछा. गांव से पढ़ने शहर आई. हॉस्टल है नहीं, तो PG में रहना पड़ता है. सिर्फ़ सुरक्षित रहने में लाखों ख़र्च हो जाते हैं. हर महीने किराए की चिंता, और बेघर होने का डर – इसी में पढ़ाई करनी पड़ती है’.
इसके अलावा प्रधानमंत्री से जवाब मांगते हुए राहुल गांधी ने इस बात पर भी प्रकाश डाला कि आवास और सुरक्षा संबंधी चिंताओं के कारण कई महिला छात्राएं अपनी पढ़ाई बीच में ही छोड़ देती हैं. उन्होंने कहा ‘कई लड़कियां इसी वजह से पढ़ाई छोड़ देती हैं. सिर्फ़ इसलिए कि रहने की जगह नहीं है. और आवास भत्ता? महंगाई के साथ बढ़ता नहीं, ऊपर से भ्रष्टाचार की भेंट चढ़ जाता है’. उन्होंने पीएम मोदी से पूछा कि क्या उस बच्ची के सवाल का उनके पास कोई जवाब है.
इससे पहले शनिवार को इंदौर में छात्रों की गूंज कार्यक्रम के दौरान राहुल गांधी ने देश की व्यवस्था को लेकर केंद्र सरकार पर कई आरोप लगाए थे. उन्होंने कार्यक्रम में देश पर सिस्टम का कब्जा नाम से प्रस्तुति देते हुए दावा किया कि देश के कई प्रमुख संस्थानों पर राजनीतिक, प्रशासनिक, वैचारिक और कारोबारी हितों से जुड़े एक नेटवर्क का प्रभाव है.
राहुल गांधी ने परीक्षा के प्रश्नपत्रों के लीक होने, संस्थागत कामकाज, अर्थव्यवस्था में निजी क्षेत्र के खिलाड़ियों की भूमिका और अमित शाह के बेटे जय शाह की क्रिकेट प्रशासन में नियुक्ति जैसे मुद्दों को उदाहरण के तौर पर पेश किया. जिन्हें छात्र उठा सकते हैं.
उन्होंने कहा ‘एक छात्र पूछता है कि अमित शाह का बेटा क्रिकेट एसोसिएशन का चेयरमैन कैसे बन गया. एक छात्र पूछता है कि दो व्यक्तियों ने भारत के पूरे व्यापारिक परिदृश्य पर कब्जा कैसे कर लिया. एक छात्र पूछता है कि न्यायपालिका और अन्य संस्थाएं अपना काम करने में विफल क्यों हैं, या चुनाव आयोग अपने कर्तव्यों का पालन क्यों नहीं कर रहा है’. उन्होंने कहा कि व्यवस्था को छात्रों की जरूरत नहीं है, उसे ‘अंधभक्त’ चाहिए.
राहुल गांधी ने अंधभक्त शब्द का इस्तेमाल करते हुए कहा कि जो सवाल नहीं पूछता, वह छात्र की भूमिका नहीं निभा रहा है. उन्होंने कहा कि अंधभक्त कभी सवाल नहीं पूछता. विद्यार्थी ही वह व्यक्ति है जो यह आवाज उठाता है. उन्होंने कहा कि अंधभक्त विद्यार्थी का बिल्कुल विपरीत होता है. विद्यार्थी सवाल पूछता है और जिज्ञासु बना रहता है, जबकि अंधभक्त अपने ही भ्रमों की दुनिया में जीता है. विद्यार्थी निडर होता है, जबकि अंधभक्त कायर होता है.
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