
नई दिल्ली। कई राज्यों में चल रहे मतदाता सूची (Voter List) के SIR यानी विशेष गहन पुनरीक्षण (Special In-depth Review) को लेकर मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार (Chief Election Commissioner Gyanesh Kumar) पर एकतरफा फैसला लेने के आरोपों के बाद राज्यसभा में उनके खिलाफ लंबित महाभियोग का मुद्दा फिर गरमा गया है। विपक्षी दलों ने फिर से इस मुद्दे को उठाया है। विपक्ष के 73 सदस्यों ने गत 24 अप्रैल को राज्यसभा के सभापति को मुख्य चुनाव आयुक्त (सीईसी) के खिलाफ महाभियोग का नोटिस सौंपा था।
कांग्रेस, तृणमूल कांग्रेस और समाजवादी पार्टी सहित विपक्ष की कई अन्य पार्टियों की तरफ से दिए गए महाभियोग के नोटिस में सीईसी के खिलाफ कई गंभीर आरोप लगाए गए थे। इनमें सबसे गंभीर पक्षपातपूर्ण और भेदभावपूर्ण आचरण के आरोप शामिल हैं। साथ ही बड़े पैमाने पर मतदाताओं के नाम हटाना, चुनाव आचार संहिता के क्रियान्वयन में अनियमिता, दस्तावेजी शिकायतों पर कार्रवाई नहीं करना सहित नौ आरोप लगाए गए हैं।
नोटिस लंबित, पर खारिज नहीं
एसआईआर को लेकर दो चुनाव आयुक्त सुखबीर संधू (Sukhbir Sandhu) और विवेक जोशी (Vivek Joshi) के पिछले 10 महीनों में आयोग के फैसलों पर 14 बार लिखित आपत्तियां दर्ज कराने की खबरों के बाद विपक्ष ने फिर से ज्ञानेश कुमार के खिलाफ महाभियोग के नोटिस को लेकर सरकार को घेरा है। कांग्रेस महासचिव जयराम रमेश ने कहा कि राज्यसभा के सभापति के पास 24 अप्रैल से यह नोटिस लंबित है, इसे खारिज नहीं किया गया है।
माकपा सांसद जॉन ब्रिटास ने एक पोस्ट कर कहा कि संसद को ज्ञानेश कुमार को पद से हटाने की प्रक्रिया तत्काल शुरू करनी चाहिए। उन्होंने कहा कि विपक्षी सांसदों ने इस संबंध में नोटिस दिया था। उसमें ज्ञानेश कुमार के खिलाफ नौ आरोप लगाए गए थे।
SIR पर बड़ा विवाद
SIR पर दो चुनाव आयुक्तों की असहमति के मीडिया दावे के बाद सियासी पारा चढ़ गया है। विपक्षी दलों ने बुधवार को मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ मोर्चा खोलते हुए उनका इस्तीफा मांगा। साथ ही सुप्रीम कोर्ट से संज्ञान लेने और एसआईआर तुरंत रोकने की मांग की है। लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने भाजपा, आरएसएस, निर्वाचन आयोग पर निशाना साधते हुए कहा कि जिन्होंने इसे किया है, उन्होंने देशद्रोह का कृत्य किया है।
सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव ने इसे लोकतंत्र के लिए गंभीर मामला करार देते हुए कहा कि चुनाव आयोग जैसे संवैधानिक संस्थान के भीतर ही अधिकारियों की तरफ से आपत्ति दर्ज की जा रही है। ऐसे में सवाल लाजमी है कि आयोग किसके हित में काम कर रहा है। आप के राष्ट्रीय संयोजक अरविंद केजरीवाल ने आरोप लगाया कि मुख्य चुनाव आयुक्त अकेले चुनाव आयोग को चला रहे हैं। उन्होंने एसआईआर को तत्काल रद्द किए जाने की मांग की।
चुनाव आयोग ने तोड़ी चुप्पी
चुनाव आयोग ने दो चुनाव आयुक्तों की असहमतियों से जुड़े विवाद पर स्पष्ट किया कि आयोग के अंदर सभी फैसले सर्वसम्मति से हो रहे हैं। आयोग ने कहा कि वैचारिक मतभेद का मतलब टकराव नहीं समझा जाना चाहिए। आयोग ने कहा कि न केवल तीनों आयुक्त बल्कि आयोग का हर अधिकारी व्यवस्था को बेहतर बनाने के लिए सुझाव देने को अधिकृत है। आयोग ने एक बयान में कहा कि दस महीनों के दौरान की कुछ खास आंतरिक टिप्पणियों, अवलोकनों को उजागर करना, जबकि बड़ी संख्या में मंजूरियों, फैसलों, निर्देशों और पहलों को नजरअंदाज करना, तस्वीर का केवल एक हिस्सा दिखाता है।
आयोग के मुताबिक ईसीआई नेट जैसे डिजिटल प्लेटफॉर्म सख्त डाटा सुरक्षा प्रोटोकॉल के तहत काम करते हैं। मतदाता सूची में नाम जोड़ने या हटाने का काम निर्वाचक पंजीकरण अधिकारियों, जिला निर्वाचन अधिकारियों जैसे अधिकारी निर्धारित अधिकारों के अनुसार करते हैं।
सीईसी-ईसी नियुक्ति का मुद्दा संविधान पीठ सुनेगी
सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार को मुख्य निर्वाचन आयुक्त और निर्वाचन आयुक्तों (नियुक्ति, सेवा की शर्तें और कार्यकाल) अधिनियम, 2023 की वैधता को चुनौती देने वाली याचिकाओं को संविधान पीठ को भेज दिया। दो जजों की पीठ का बंटा फैसला आने पर यह कदम उठाया गया।
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