
पटना: CJI ने लॉ स्टूडेंट्स के साथ पहली बार ‘ओपन हाउस’ संवाद किया. एक अनोखी पहल करते हुए CJI सूर्य कांत ने CNLU यूनिवर्सिटी के ऑडिटोरियम में गए और बिना किसी स्क्रिप्ट के सीधे और खुलकर सवालों के जवाब दिए. दरअसल, हैदराबाद के NALSAR और बैंगलोर के NLSIU में CJI के विरोध को देखते हुए यह कार्यक्रम बहुत अहम था, क्योंकि CJI ने पटना की प्रतिष्ठित नेशनल लॉ यूनिवर्सिटी में खुलकर सवाल-जवाब का सेशन करना पसंद किया.
यह पहल खुद स्टूडेंट्स ने की थी, जिन्होंने CJI को उनसे सीधी बातचीत के लिए बुलाया था. आज पटना के चाणक्य नेशनल लॉ यूनिवर्सिटी (CNLU) के अशोक ऑडिटोरियम में हुआ ओपन हाउस संवाद भारतीय इतिहास में अपनी तरह का पहला ऐसा कार्यक्रम था, जिसमें CJI ने लॉ स्टूडेंट्स के साथ लाइव और बिना किसी रोक-टोक के बातचीत की.
पटना हाई कोर्ट के चीफ जस्टिस और CNLU के चांसलर, जस्टिस वी कामेश्वर राव भी इस मौके पर मौजूद थे. यह कार्यक्रम स्टूडेंट्स की एकेडमिक और डिबेटिंग कमिटी और लीगल एड सेल ने मिलकर आयोजित किया था.
शांतिपूर्ण स्टूडेंट प्रोटेस्ट पर पुलिस के रवैये के बारे में एक छात्रा के सवाल का जवाब देते हुए CJI ने साफ तौर पर शांतिपूर्ण विरोध के स्टूडेंट्स के मौलिक अधिकार की रक्षा के लिए न्यायपालिका की प्रतिबद्धता दोहराई. संदेश साफ था अदालतें इस मामले से मुंह नहीं मोड़ेंगी. CJI के इस जवाब पर जोरदार तालियां बजीं.
CJI ने उस कड़वी सच्चाई को मानने से गुरेज नहीं किया, जिसका सामना पहली पीढ़ी के युवा वकीलों को बार में करना पड़ता है. सारिका त्यागी के मामले का जिक्र करते हुए CJI ने युवा वकीलों को उनके शुरुआती सालों में आर्थिक मदद देने के लिए एक समर्पित प्रोफेशनल सहायता कोष बनाने की बात कही. इसे CJI ने दान नहीं, बल्कि पेशे के भविष्य के लिए एक ढांचागत जरूरत बताया.
तेजी से बढ़ती ट्यूशन फीस और अपर्याप्त स्कॉलरशिप को लेकर स्टूडेंट्स की चिंताओं का जवाब देते हुए CJI ने साफ तौर पर वादा किया कि इस मुद्दे पर ध्यान दिया जाएगा, एक ऐसा वादा जो रिकॉर्ड पर है. CNLU के वाइस-चांसलर प्रो फैजान मुस्तफा ने पांच साल की लॉ डिग्री को चार साल की पढ़ाई में बदलने का एक साहसी प्रस्ताव रखा, जिसमें आखिरी साल अनिवार्य कोर्ट अप्रेंटिसशिप के तौर पर हो और न्यायिक सेवा परीक्षाओं के लिए अलग से एक साल की प्रैक्टिस की जरूरत को पूरी तरह खत्म कर दिया जाए.
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