
नई दिल्ली। मुख्य निर्वाचन आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार (Gyanesh Kumar) के इस्तीफे (Resignations) की मांग के बीच सोशल मीडिया (Social Media) पर उनके नाम से राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू को भेजा गया कथित इस्तीफा पत्र वायरल हो गया। पत्र में दावा किया गया कि कुमार ने पद से इस्तीफा देने का फैसला किया है। हालांकि, चुनाव आयोग ने इसे पूरी तरह फर्जी बताया है और कहा है कि CEC ने ऐसा कोई इस्तीफा नहीं दिया है। आयोग के प्रवक्ता के मुताबिक वायरल पत्र AI से तैयार किया गया है और मनगढ़ंत है।
वायरल पत्र में आत्मचिंतन के बाद इस्तीफा देने की बात कही गई थी। इसमें भारत सरकार और देश के नागरिकों का भरोसा जताने के साथ दुनिया के सबसे बड़े लोकतंत्र की सेवा करने तथा निर्वाचन आयोग की स्वतंत्रता और निष्पक्षता बनाए रखने को सम्मान बताया गया था। पत्र पर ज्ञानेश कुमार के नाम और हस्ताक्षर का इस्तेमाल किया गया था।
चुनाव आयोग ने क्या कहा?
चुनाव आयोग के प्रवक्ता ने तथाकथित इस्तीफा पत्र को फर्जी बताया है। PTI के मुताबिक, आयोग ने स्पष्ट किया कि ज्ञानेश कुमार की ओर से राष्ट्रपति को ऐसा कोई पत्र नहीं भेजा गया है। प्रवक्ता ने कहा कि वायरल दस्तावेज AI जनरेटेड और मनगढ़ंत है। आयोग ने लोगों से अपील की है कि वे ऐसे फर्जी पत्रों पर भरोसा न करें या उन्हें आगे प्रसारित न करें।
ECI की आधिकारिक वेबसाइट के मुताबिक ज्ञानेश कुमार वर्तमान में मुख्य निर्वाचन आयुक्त हैं और उन्होंने 19 फरवरी 2025 को 26वें CEC के रूप में पदभार संभाला था।
SIR को लेकर पहले से उठ रहे सवाल
इस्तीफे के इस फर्जी पत्र के वायरल होने का घटनाक्रम ऐसे समय सामने आया है, जब मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण यानी SIR को लेकर चुनाव आयोग के कामकाज पर राजनीतिक और सार्वजनिक बहस चल रही है।
25 सितंबर को प्रकाशित इंडियन एक्सप्रेस की एक रिपोर्ट में दावा किया गया था कि निर्वाचन आयुक्त सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी ने पिछले 10 महीनों में SIR से जुड़े फैसलों और आदेशों पर कम से कम 14 बार आधिकारिक आपत्ति दर्ज की। रिपोर्ट के अनुसार, दोनों अधिकारियों ने कुछ फैसलों के बारे में कहा था कि वे उनकी जानकारी या सिफारिश के बिना लिए गए।
इन आपत्तियों में नए मतदाताओं के पंजीकरण, मतदाता सूची से नाम हटाने और बहाल करने की प्रक्रिया, फॉर्म-6 में बदलाव और मतदाता सूची के डेटा तक पहुंच से जुड़े मुद्दे शामिल बताए गए थे। एक अन्य रिपोर्ट के मुताबिक, दोनों निर्वाचन आयुक्तों ने फॉर्म-6 में SIR से जुड़ी नई घोषणा को लेकर भी आपत्ति जताई थी।
आयोग ने मतभेदों से किया था इनकार
इन रिपोर्टों के बाद चुनाव आयोग ने आंतरिक मतभेद की बात से इनकार किया था। आयोग का कहना था कि मतदाता सूची की जांच और SIR से जुड़े फैसले सभी की सहमति से लिए गए थे। आयोग ने यह भी कहा था कि अलग-अलग राय को आपसी टकराव नहीं माना जाना चाहिए।
आयोग के मुताबिक SIR से जुड़े फैसलों को लेकर उसकी प्रक्रिया संस्थागत स्तर पर हुई है। SIR की शुरुआत जून 2025 में बिहार से हुई थी और बाद में दूसरे राज्यों एवं केंद्र शासित प्रदेशों में इसका विस्तार किया गया।
विपक्षी दलों ने उठाए सवाल
SIR को लेकर सामने आई रिपोर्टों के बाद कांग्रेस समेत कई विपक्षी दलों ने चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए और ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग की। कुछ विपक्षी नेताओं ने SIR को रोकने, आयोग की कार्यप्रणाली की जांच कराने और कुछ राज्यों में पिछले चुनावों को दोबारा कराने जैसी मांगें भी उठाईं। ये मांगें संबंधित नेताओं और दलों के राजनीतिक बयान हैं; चुनाव आयोग ने अपने स्तर पर इन आरोपों से जुड़े सवालों का जवाब दिया है।
कॉकरोच जनता पार्टी ने भी रखीं मांगें
इसी विवाद के बीच कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) ने भी मुख्य निर्वाचन आयुक्त के खिलाफ आंदोलन की घोषणा की थी। पार्टी के राष्ट्रीय संयोजक अभिजीत दीपके ने ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे, SIR रोकने और इसकी जांच कराने की मांग रखी थी। पार्टी ने मांगें पूरी नहीं होने पर आंदोलन की चेतावनी दी थी।
पार्टी की ओर से मुंबई से 2 अक्टूबर को आंदोलन शुरू करने की बात कही गई थी। इसके साथ ही प्रेस कॉन्फ्रेंस में बैलेट पेपर से चुनाव कराने की मांग का भी समर्थन किया गया था।
फिलहाल इस्तीफे की खबर फर्जी
फिलहाल उपलब्ध आधिकारिक जानकारी में ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की कोई पुष्टि नहीं है। सोशल मीडिया पर वायरल पत्र को चुनाव आयोग ने फर्जी और AI से तैयार किया हुआ बताया है। ऐसे में SIR को लेकर चल रही राजनीतिक बहस और कथित इस्तीफे के वायरल दावे को अलग-अलग घटनाक्रम के रूप में देखना जरूरी है।
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