
दादा के दरबार में चिंटू की हाजिरी
दादा दयालु, यानी अपने दो नंबरी विधायक रमेश मेंदोला। कब-क्या कर जाएं, किसी को मालूम ही नहीं चलता है। दादा ने इस बार एक नई पहल की और कांग्रेस के अध्यक्ष चिंटू चौकसे को गणेश उत्सव का बुलावा भेज दिया। वैसे दोनों के बीच राजनीतिक तौर पर कभी पटी नहीं है। हैं भी दोनों एक-दूसरे के विरोधी दल के, लेकिन दयालु ने जिस तरह से नई पहल की है, उससे चिंटू को भी एक बार तो आश्चर्य लगा, लेकिन बड़ा दिल दिखाते हुए वे भी पहुंच गए दादा दयालु के दरबार में हाजिरी देने। वहां सुमित मिश्रा मिल गए और कुर्सी भी चिंटू को उनके पास वाली ही मिली। जो नेता एक-दूसरे पर हमेशा बयानों के तीर छोड़ते थे, वे दोनों गलबहियां करते रहे। देखने वालों को भी आश्चर्य लगा कि आज ऐसा क्या हो गया कि दोनों कुंभ के बिछड़ोंं की तरह मिल रहे हैं। खैर ये पॉलिटिक्स है प्यारे… यहां कब क्या हो जाता है, पॉलिटिक्स करने वालों को भी पता नहीं रहता।
भाजपा नेताओं के चैक बाउंस, नकदी जमा करने में आनाकानी
25 साल लगातार सत्ता का स्वाद चखने वाले भाजपा नेताओं की जेब ढीली नहीं हो पा रही है। साल की शुरुआत में शुरू हुई आजीवन सहयोग निधि अभियान में नेता तो लंबी-चौड़ी राशि देने का वादा कर बैठते हैं, लेकिन जब चैक बाउंस होने लगते हैं, तब उन्हें जवाब देते नहीं बनता है। ऐसे ही कुछ नेताओं के चैक बाउंस पड़े हैं और उन्हें भाजपा कार्यालय से फोन लगाने के बाद भी राशि जमा नहीं हो पा रही है। जिन पर राशि जमा कराने की जवाबदारी है, वे बार-बार फोन करके थक गए हैं, लेकिन बकायादार नेताओं के कानों पर जूं तक नहीं रेंग रही है।
मेडम को तो बयान देना है, चाहे उसका कुछ भी असर हो
उषा ठाकुर ने नवरात्रि में गरबा खेलने वाली लड़कियों के मामले में जो बयान दिया है, उससे भाजपा के कई नेता इत्तेफाक नहीं रखते हैं। उन्होंने इसके खिलाफ जो आंकड़ा दिया है, वह कहीं से भी मेल नहीं खा रहा है। हालांकि नवरात्रि आने के पहले उषा ठाकुर का ये सालाना बयान अखबारों में जरूर छपते हैं, लेकिन इस बार कुछ ज्यादा ही वे बोल गईं और कांग्रेस को भी बोलने का मौका मिल गया कि इन आंकड़ों में कहां तक सच्चाई है। बयान हकीकत के आसपास हो सकता है, लेकिन आंकड़े कहां से आए हैं, इस बारे में ठाकुर का अब तक कोई जवाब नहीं आया है।
झांसी की रानी को क्या हो गया?
कभी झांसी की रानी कहलाने वाली नेता प्रतिपक्ष सोनिला मिमरोट को लेकर अब कांग्रेस में ही तरह-तरह की बातें होने लगी हैं। कार्यकर्ता ही कह रहे हैं कि कांग्रेस के आयोजनों में सोनिला का जो रूआब देखने को मिलता था, वह अब नेता प्रतिपक्ष बनने के बाद कम हो गया है और वे एक सामान्य पार्षद की तरह ही व्यवहार कर रही हैं। उनके रौद्र रूप को देखकर चिंटू चौकसे ने तो उन्हें झांसी की रानी का खिताब दे दिया था, लेकिन अब झांसी की रानी ठंडी पड़ती जा रही हैं। जिस तरह से चिंटू चौकसे नेता प्रतिपक्ष रहते हुए नगर निगम की नाक में दम किए हुए थे, वैसा अब कुछ नजर नहीं आ रहा है। अब इसे क्या माने? मेडम निगम की कार्यप्रणली में रच-बस गई है या फिर अब निगम में सबकुछ सही चलने लगा है।
बड़े मियां तो बड़े मियां छोटे मियां सुभान अल्लाह
कांगे्रस के जिलाध्यक्ष विपिन वानखेड़े जिस स्पीड में चल रहे हैं, उससे लग रहा है कि वे इंदौर जिले में किसी न किसी सीट से विधानसभा टिकट तो ले ही आएंगे, लेकिन दावा करना अलग बात है और टिकट मिलना अलग। खैर विपिन तो बड़े मियां की तरह आगे बढ़ रहे हैं, लेकिन छोटे मियां यानी उनके सुपुुत्र भी पिता के नक्शे कदमों पर चल रहे हैं। खेलने-खाने की उम्र में वे सामाजिक दायित्व पूरा करने में अपने पिता के साथ लगे हुए हैं। सामाजिक सेवा में वे अग्रणी हैं और पूत के पांव पालने में अभी से नजर आ रहे हैं।
फिलहाल तो सौगात को ही करना पड़ रही है मेहनत
भाजपा युवा मोर्चा के नए अध्यक्ष की घोषणा नहीं हुई है और अभी पुराने अध्यक्ष यानी सौगात मिश्रा से ही काम चलाया जा रहा है। प्रधानमंत्री के सेवा संकल्प अभियान को लेकर जितने कार्यक्रम युवा मोर्चा को सौंपे गए, उन्हें पूरा करने की जवाबदारी सौगात को ही लगातार दी जा रही है। बात चल पड़ी है कि क्या सौगात को फिर से रिपीट तो नहीं किया जा रहा है, क्योंकि जिस हिसाब से सौगात मेहनत कर रहे हैं, उससे दावेदारों में भी खुटका बना हुआ है। हालांकि ऊपर वाले कह रहे हैं कि नवरात्रि तक नया अध्यक्ष मिल जाएगा, जिस पर लगभग सहमति बन गई है।
मंत्री ने दिया आश्वासन और पार्षद ने गाली
कल मन की बात सुनने गए मंत्री तुलसी सिलावट को लोगों ने घेर लिया और उनसे पानी की मांग की। लोग इतने गुस्से में थे कि वे मंत्री के सामने ही बिफर पड़े और कहा कि पिछले 4 साल से पीने के पानी के लिए उन्हें भटकना पड़ रहा है। सिलावट ने लोगों को आश्वासन दिया और कहा कि वे पीने के पानी की व्यवस्था कराएंगे, लेकिन ये बात क्षेत्रीय पार्षद को नागवार लगी। थोड़ी देर में एक ऑडियो वायरल हुआ, जिसमें पार्षद राकेश सोलंकी फोन पर गाली-गलौच करते हुए सुनाई दे रहे हैं। लोगों का कहना था कि मंत्रीजी तो हमें आश्वासन दे रहे हैं, लेकिन पार्षद का यह व्यवहार बता रहा है कि वे काम नहीं करना चाहते। (हालांकि हम वायरल ऑडियो की पुष्टि नहीं करते)
संगठन महामंत्री की नियुक्ति होने के बाद उन पुराने खाटी भाजपाइयों में आस जगी है, जो भाजपा के सिस्टम से चलते हैं। अभी तक तो संगठन के नाम पर मनमाने फैसले हो रहे हैं, जिसमें कांग्रेसियों की पौ-बारह हो रही है। -संजीव मालवीय
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