
चंडीगढ़ । कांग्रेस सांसद कुमारी सैलजा (Congress MP Kumari Sailja) ने कहा कि हरियाणा का युवा कब तक झेलेगा बेरोजगारी की पीड़ा (How long will Youth of Haryana endure agony of Unemployment) ।
कांग्रेस सांसद एवं पूर्व केंद्रीय मंत्री कुमारी सैलजा ने हरियाणा में सरकारी भर्तियों की स्थिति को लेकर भाजपा सरकार पर सवाल उठाते हुए कहा कि प्रदेश के लाखों पढ़े-लिखे युवा वर्षों से सरकारी नौकरी की तैयारी कर रहे हैं, लेकिन भर्ती में देरी, पदों के खाली रहने और भर्ती प्रक्रियाओं में बदलाव के कारण उनका इंतजार लंबा होता जा रहा है। उन्होंने कहा कि अनेक युवाओं की पीड़ा यह है कि उच्च शिक्षा और पात्रता परीक्षाएं पास करने के बावजूद उन्हें परिवार चलाने के लिए मजदूरी, ड्राइविंग, दुकानदारी, ठेकेदारी और दूसरे छोटे-मोटे काम करने पड़ रहे हैं। सरकार को स्पष्ट करना चाहिए कि समयबद्ध भर्ती सुनिश्चित करने के लिए उसकी ठोस कार्ययोजना क्या है।
कुमारी सैलजा ने मीडिया में प्रकाशित आंकड़ों का उल्लेख करते हुए कहा कि पिछले 21 महीनों में क्लास-1 और क्लास-2 की 55 भर्तियों में 6,222 पदों के मुकाबले 4,317 पद ही भरे जाने और करीब 31 प्रतिशत पद खाली रहने की बात सामने आई है। उन्होंने कहा कि यदि निर्धारित कटऑफ या भर्ती नियमों के कारण बड़ी संख्या में स्वीकृत पद खाली रह जाते हैं तो सरकार को नियमों और परीक्षा प्रणाली की समीक्षा करनी चाहिए, ताकि योग्यता और न्यूनतम मानकों से समझौता किए बिना पात्र युवाओं को उचित अवसर मिल सके। युवाओं की योग्यता पर सवाल खड़ा करने के बजाय यह देखना सरकार की जिम्मेदारी है कि उपलब्ध पद आखिर खाली क्यों रह जाते हैं। सांसद ने कहा कि जुलाई 2025 में हरियाणा कर्मचारी चयन आयोग ने 15 श्रेणियों में कुल 8,653 पदों की भर्ती प्रक्रिया वापस लेने की अधिसूचना जारी की थी, जिसमें 5,600 पुलिस कांस्टेबल पद भी शामिल थे। आयोग ने साथ ही स्पष्ट किया था कि इन रिक्तियों को कैट-01/2025 के बाद पुनः विज्ञापित किया जाएगा और पहले से पात्र उम्मीदवार पुनर्विज्ञापित पदों के लिए पात्र माने जाएंगे।
कुमारी सैलजा ने कहा कि ऐसी प्रक्रियाओं में होने वाली देरी का सबसे अधिक असर उस युवा पर पड़ता है जो वर्षों तक तैयारी करता है और जिसकी आयु लगातार बढ़ती जाती है। कुमारी सैलजा ने कहा कि हरियाणा के युवाओं की सबसे बड़ी मांग किसी राजनीतिक घोषणा की नहीं, बल्कि नियमित, पारदर्शी और तय समय-सीमा में पूरी होने वाली भर्ती प्रक्रिया की है। नेट, एच टेट, केट तथा दूसरी पात्रता परीक्षाएं पास करने के बाद भी यदि अभ्यर्थियों को वर्षों तक नियुक्ति का इंतजार करना पड़े तो उनकी आर्थिक और पारिवारिक परेशानियां बढ़ना स्वाभाविक है। उन्होंने कहा कि सरकार को विभागवार रिक्त पदों, लंबित भर्तियों, विज्ञापन जारी होने की संभावित तारीख और चयन प्रक्रिया पूरी होने की समय-सीमा सार्वजनिक करनी चाहिए। सांसद ने कहा कि फरवरी 2026 में हरियाणा विधानसभा में भी भर्ती व्यवस्था को लेकर सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच बहस हुई थी। मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने उस समय 8,653 पदों वाले विज्ञापन को वापस लेने के संबंध में कहा था कि कैट कराने और नए उम्मीदवारों को अवसर देने के उद्देश्य से ऐसा किया गया तथा बाद में पदों को बढ़ाकर पुनः विज्ञापित किया गया।
कुमारी सैलजा ने कहा कि सरकार का पक्ष अपनी जगह है, लेकिन युवाओं के दृष्टिकोण से असली कसौटी यह है कि भर्ती प्रक्रिया कितनी जल्दी पूरी होती है और चयनित अभ्यर्थियों को नियुक्ति कब मिलती है। कुमारी सैलजा ने कहा कि हरियाणा का युवा मेहनती और योग्य है तथा उसे बार-बार आश्वासन देने के बजाय रोजगार के वास्तविक अवसर उपलब्ध कराना सरकार की जिम्मेदारी है। “सरकार बताए कि वर्षों से भर्ती की प्रतीक्षा कर रहे और आयु सीमा के करीब पहुंच चुके युवाओं के हितों की रक्षा कैसे की जाएगी? लंबित रिक्तियां कब भरी जाएंगी और भर्ती का निश्चित कैलेंडर कब जारी होगा?” उन्होंने मांग की कि सरकार सभी विभागों में रिक्त पदों की वास्तविक स्थिति सार्वजनिक करे, लंबित भर्तियों के लिए समयबद्ध कैलेंडर जारी करे और ऐसी व्यवस्था बनाए जिससे किसी पात्र युवा के रोजगार के अवसर केवल भर्ती में प्रशासनिक देरी के कारण समाप्त न हों।
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