
नई दिल्ली । प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (Prime Minister Narendra Modi) ने कहा कि क्रांतिकारी श्यामजी कृष्ण वर्मा के बलिदान को (Sacrifice of revolutionary Shyamji Krishna Varma) राष्ट्र कभी भुला नहीं सकता (Nation can never Forget) । प्रधानमंत्री मोदी ने स्वतंत्रता सेनानी, क्रांतिकारी और विद्वान श्यामजी कृष्ण वर्मा की जयंती पर उन्हें श्रद्धांजलि दी ।

उन्होंने कहा कि मातृभूमि के स्वाभिमान की रक्षा के लिए उन्होंने जिस पराक्रम और पुरुषार्थ का परिचय दिया, कृतज्ञ राष्ट्र उसे कभी भुला नहीं सकता। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने रविवार को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर पोस्ट किया, “महान क्रांतिकारी और स्वतंत्रता सेनानी श्यामजी कृष्ण वर्मा को उनकी जयंती पर सादर नमन। मां भारती की पराधीनता की बेड़ियों को तोड़ने के लिए उन्होंने अपना जीवन समर्पित कर दिया। मातृभूमि के स्वाभिमान की रक्षा के लिए उन्होंने जिस पराक्रम और पुरुषार्थ का परिचय दिया, कृतज्ञ राष्ट्र उसे कभी भुला नहीं सकता।”
केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने लिखा, “भारत मां के वीर सपूत, महान राष्ट्रभक्त श्यामजी कृष्ण वर्मा की जयंती पर उन्हें कोटि-कोटि नमन। उन्होंने विदेश की धरती पर रहकर भी भारत की स्वतंत्रता की अलख जगाई और देश के युवाओं में राष्ट्रभाव का संचार किया। आज उनकी जयंती पर हम सब यह संकल्प लें कि देशहित को सर्वोपरि रखेंगे, अपने कर्तव्य को पूरी निष्ठा से निभाएंगे व भारत को और मजबूत बनाने में अपना योगदान देंगे। यही श्यामजी कृष्ण वर्मा जी के प्रति सच्ची श्रद्धांजलि होगी।”
केंद्रीय महिला एवं बाल विकास राज्य मंत्री सावित्री ठाकुर ने लिखा, “महान क्रांतिकारी, स्वतंत्रता सेनानी और इंडिया हाउस व इंडियन होम रूल सोसाइटी’ के संस्थापक, श्यामजी कृष्ण वर्मा को उनकी जयंती पर शत शत-नमन। आपके योगदान, समर्पण और कृतित्व के लिए देश सदैव कृतज्ञ रहेगा।” केंद्री ग्रामीण विकास राज्य मंत्री कमलेश पासवान ने पोस्ट किया, “महान क्रांतिकारी एवं स्वतंत्रता सेनानी श्यामजी कृष्ण वर्मा जी की जयंती पर उन्हें शत-शत नमन।”
बता दें कि श्यामजी कृष्ण वर्मा का जन्म 4 अक्टूबर, 1857 को गुजरात के कच्छ जिले के मांडवी कस्बे में हुआ था। वे देशभक्ति की प्रबल भावना और राष्ट्र के प्रति निस्वार्थ सेवा के लिए जाने जाने वाले भारत के स्वतंत्रता आंदोलन के इतिहास के अग्रणी स्वतंत्रता सेनानियों में से एक थे। उन्होंने लंदन स्थित ‘इंडिया हाउस’ में एक क्रांतिकारी केंद्र का आयोजन किया और अपने प्रकाशन ‘द इंडियन सोशियोलॉजिस्ट’ में अपने लेखों के माध्यम से भारत की स्वतंत्रता के उद्देश्य का प्रचार किया।
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