
सुप्रीम कोर्ट में तीन नए जजों की नियुक्ति का रास्ता साफ हो गया है। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने सोमवार को सुप्रीम कोर्ट कॉलेजियम की ओर से भेजी गई सिफारिश को मंजूरी दे दी। इसके तहत जस्टिस सुनीता अग्रवाल, जस्टिस देवेंद्र कुमार उपाध्याय और जस्टिस अपरेश कुमार सिंह को सुप्रीम कोर्ट का न्यायाधीश नियुक्त किया गया है। राष्ट्रपति की मंजूरी के बाद तीनों नवनियुक्त जज मंगलवार, 6 अक्टूबर 2026 को सुप्रीम कोर्ट के न्यायाधीश के रूप में शपथ लेंगे।
सुप्रीम कोर्ट के लिए नियुक्त किए गए तीन जजों में गुजरात हाई कोर्ट की मुख्य न्यायाधीश जस्टिस सुनीता अग्रवाल, दिल्ली हाई कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश जस्टिस देवेंद्र कुमार उपाध्याय और तेलंगाना हाई कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश जस्टिस अपरेश कुमार सिंह शामिल हैं। सुप्रीम कोर्ट कॉलेजियम ने 28 सितंबर को हुई बैठक में इन तीनों के नामों की सिफारिश की थी।
सुप्रीम कोर्ट में जजों की स्वीकृत संख्या 38 है, जिसमें भारत के मुख्य न्यायाधीश भी शामिल हैं। फिलहाल अदालत में 34 जज कार्यरत हैं। तीन नए जजों के शपथ लेने के बाद यह संख्या बढ़कर 37 हो जाएगी। कॉलेजियम ने कहा था कि इन नियुक्तियों से सुप्रीम कोर्ट को मजबूती मिलेगी।
जस्टिस सुनीता अग्रवाल मूल रूप से इलाहाबाद हाई कोर्ट की जज रही हैं। उन्होंने 1989 में अवध विश्वविद्यालय से कानून की पढ़ाई पूरी की और दिसंबर 1990 में वकालत शुरू की। नवंबर 2011 में उन्हें इलाहाबाद हाई कोर्ट का जज नियुक्त किया गया और 2013 में वह स्थायी जज बनीं।
जस्टिस अग्रवाल ने जुलाई 2023 में गुजरात हाई कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश के रूप में शपथ ली थी। सुप्रीम कोर्ट में उनकी नियुक्ति के बाद मौजूदा समय में अदालत में तीन महिला जज हो जाएंगी। वह अप्रैल 2031 में सुप्रीम कोर्ट से सेवानिवृत्त होंगी।
जस्टिस देवेंद्र कुमार उपाध्याय ने लखनऊ विश्वविद्यालय से कानून की पढ़ाई की और मई 1991 में एडवोकेट के रूप में नामांकन कराया। वह मई 2007 से नवंबर 2011 तक उत्तर प्रदेश सरकार के मुख्य स्थायी अधिवक्ता रहे।
नवंबर 2011 में उन्हें इलाहाबाद हाई कोर्ट का जज बनाया गया और अगस्त 2013 में वह स्थायी जज बने। जुलाई 2023 में उन्होंने बॉम्बे हाई कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश का पद संभाला। इसके बाद जनवरी 2025 में उनका तबादला दिल्ली हाई कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश के रूप में कर दिया गया।
जस्टिस अपरेश कुमार सिंह ने दिल्ली विश्वविद्यालय से कानून की पढ़ाई की और 1990 में अधिवक्ता के रूप में नामांकन कराया। उन्होंने 1990 से 2000 के बीच पटना हाई कोर्ट में वकालत की। इसके बाद उन्होंने झारखंड हाई कोर्ट में प्रैक्टिस की।
जनवरी 2012 में उन्हें झारखंड हाई कोर्ट का जज नियुक्त किया गया और जनवरी 2014 में वह स्थायी जज बने। उन्होंने 20 दिसंबर 2022 से 19 फरवरी 2023 तक झारखंड हाई कोर्ट के कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश के रूप में भी काम किया।
इसके बाद अप्रैल 2023 में उन्हें त्रिपुरा हाई कोर्ट का मुख्य न्यायाधीश नियुक्त किया गया। जुलाई 2025 में उनका तबादला तेलंगाना हाई कोर्ट कर दिया गया, जहां उन्होंने 19 जुलाई 2025 को मुख्य न्यायाधीश के रूप में शपथ ली थी।
©2026 Agnibaan , All Rights Reserved