
नई दिल्ली । छत्तीसगढ़ (Chhattisgarh) के सुकमा जिले के कोंटा जनपद पंचायत (Konta Janpad Panchayat) के तहत आने वाले पुनपल्ली गांव (Punpalli Village) में ग्राम सभा ने धार्मिक गतिविधियों (Religious Activities) और धर्म परिवर्तन (Religious Conversion) से जुड़े मामलों को लेकर कई फैसले लिए हैं। ग्राम सभा ने पेसा कानून के तहत गांव की पारंपरिक सामाजिक (Social) और सांस्कृतिक व्यवस्था, सामुदायिक हितों तथा स्थानीय धार्मिक गतिविधियों से जुड़े मुद्दों पर चर्चा के बाद 12 प्रस्ताव पारित किए। इन प्रस्तावों में चर्च निर्माण, प्रार्थना सभा और धार्मिक आयोजनों के लिए सामुदायिक जमीन (Community Land) देने पर रोक लगाने का फैसला भी शामिल है।
ग्राम सभा के फैसले के अनुसार, ईसाइयों और धर्म बदल चुके लोगों को चर्च बनाने, प्रार्थना सभा या अन्य धार्मिक आयोजन करने के लिए ग्राम सभा की जमीन उपलब्ध नहीं कराई जाएगी। इसके अलावा धर्म परिवर्तन कर चुके परिवारों के सदस्यों के शव दफनाने के लिए भी पंचायत की सीमा में सामुदायिक जमीन नहीं देने का निर्णय लिया गया है। प्रस्ताव में स्पष्ट किया गया है कि ऐसे मामलों में ग्राम सभा की जमीन उपलब्ध नहीं कराई जाएगी।
पुनपल्ली गांव में इस फैसले की जानकारी देने वाला एक सूचना-पट्ट भी लगाया गया है। इसमें धर्म परिवर्तन, प्रार्थना सभाओं और अन्य धार्मिक गतिविधियों के लिए पादरियों तथा ईसाई प्रचारकों के गांव में प्रवेश पर प्रतिबंध की जानकारी दी गई है। ग्राम सभा के निर्णय में बाहरी धार्मिक प्रचारकों के आने से संबंधित गतिविधियों को लेकर भी व्यवस्था तय की गई है।
विशेष ग्राम सभा की बैठक 2 अक्टूबर को आयोजित की गई थी। बैठक में गांव की पारंपरिक सामाजिक और सांस्कृतिक व्यवस्था के साथ सामुदायिक हितों तथा स्थानीय स्तर पर धार्मिक गतिविधियों से जुड़े विषयों पर चर्चा हुई। जनपद पंचायत सदस्य और भारतीय जनता युवा मोर्चा के नेता मड़कम भीमा ने ग्राम सभा में लिए गए फैसलों की जानकारी दी। बैठक के दौरान कुल 12 प्रस्ताव पारित किए गए।
ग्राम सभा ने धार्मिक प्रचार या इसी तरह की अन्य गतिविधियों के लिए गांव में आने वाले बाहरी लोगों को लेकर भी एक व्यवस्था बनाई है। फैसले के अनुसार, यदि कोई बाहरी व्यक्ति धार्मिक प्रचार या ऐसी गतिविधि के लिए गांव में आता है, तो उसे सबसे पहले शांति और न्याय समिति को इसकी सूचना देनी होगी। ग्राम सभा ने विवादों से निपटने के लिए इसी नाम से एक समिति के गठन का प्रस्ताव भी पारित किया है।
ग्राम सभा ने अपने फैसलों का आधार पंचायत (अनुसूचित क्षेत्रों में विस्तार) अधिनियम, 1996 यानी पेसा कानून को बताया है। पांचवीं अनुसूची वाले अनुसूचित क्षेत्रों में ग्राम सभाओं और पंचायतों को पारंपरिक प्रणालियों की रक्षा और निगरानी से जुड़ी अतिरिक्त शक्तियां प्राप्त हैं। पारित प्रस्ताव में संविधान के अनुच्छेद 244(1), पांचवीं अनुसूची, पेसा अधिनियम, 1996 और छत्तीसगढ़ पेसा कानून, 2022 के संशोधित प्रावधानों का उल्लेख किया गया है।
प्रस्ताव के तहत ग्राम सभा की जमीन का इस्तेमाल ईसाइयों और धर्म बदल चुके लोगों के लिए चर्च निर्माण, प्रार्थना सभा, धार्मिक सभा या शव दफनाने के लिए नहीं किए जाने का निर्णय लिया गया है। ग्राम सभा ने गांव की सांस्कृतिक पहचान, परंपराओं, रीति-रिवाजों और सामाजिक विरासत की रक्षा को इन फैसलों का आधार बताया है।
ग्राम सभा के अनुसार, इन फैसलों से जुड़े किसी भी विवाद की स्थिति में संबंधित प्रशासनिक और कानूनी अधिकारियों को सूचित किया जाएगा तथा निर्धारित कानूनी प्रक्रिया का पालन किया जाएगा। ग्रामीणों से ग्राम सभा के फैसलों और स्थानीय कानूनों का सम्मान करने की अपील भी की गई है।
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