
नई दिल्ली । मुख्य चुनाव आयुक्त (Chief Election Commissioner) ज्ञानेश कुमार (Gyanesh Kumar) के खिलाफ विपक्ष का आंदोलन (Opposition Protest) अब केवल एक-दो दिन के प्रदर्शन तक सीमित रहने के बजाय लंबे अभियान का रूप लेता दिख रहा है। विपक्षी दलों ने मतदाता सूची (Voter List) में विशेष गहन पुनरीक्षण (Special Intensive Revision) यानी SIR को लेकर अपना विरोध तेज किया है। इस अभियान में कांग्रेस के साथ इंडिया गठबंधन के कई दल शामिल हैं और आने वाले समय में इसे देशभर तक ले जाने की तैयारी की जा रही है।
विपक्षी रणनीति के तहत संसद से लेकर चुनाव आयोग तक प्रदर्शन के अलावा मतदाताओं के बीच पहुंचने पर भी जोर दिया जा रहा है। कांग्रेस ने SIR के दौरान मतदाता सूची से हटाए गए नामों को दोबारा जुड़वाने के लिए एक महीने का अभियान शुरू करने की घोषणा की है। इसके जरिए इस मुद्दे को घर-घर तक ले जाने की कोशिश की जा रही है।
इससे पहले इंडिया गठबंधन की बैठक में भी SIR के खिलाफ कई महीने तक अभियान चलाने का फैसला लिया गया था। इसके बाद विपक्षी दलों ने संयुक्त रूप से प्रदर्शन की गतिविधियां बढ़ाईं। मंगलवार को संसद भवन से चुनाव आयोग की ओर मार्च किया गया। प्रदर्शन के दौरान आकाशवाणी भवन के पास धरना भी दिया गया। इस कार्रवाई में इंडिया गठबंधन के कई दलों की भागीदारी दिखाई दी और बीजू जनता दल की मौजूदगी ने भी विपक्षी एकजुटता को सामने रखा।
विपक्ष इस मुद्दे को पिछले एक साल से लगातार उठा रहा है। सात अगस्त 2025 को राहुल गांधी ने महाराष्ट्र, हरियाणा और कर्नाटक का उदाहरण देते हुए मतदाता सूची से जुड़े सवाल उठाए थे। इसके बाद अलग-अलग मौकों पर विपक्षी दलों ने चुनाव प्रक्रिया और मतदाता सूची में बदलाव को लेकर अपनी आपत्तियां सामने रखीं।
पश्चिम बंगाल में SIR के दौरान बड़ी संख्या में मतदाताओं के नाम हटाए जाने के मुद्दे के बाद विपक्ष का अभियान और तेज हुआ। विपक्षी दलों ने इसे लेकर चुनाव प्रक्रिया की निष्पक्षता पर सवाल उठाए हैं। मतदाता सूची में नामों के हटने और उन्हें दोबारा जोड़ने की प्रक्रिया को लेकर भी राजनीतिक बहस बढ़ी है। विपक्ष का कहना है कि इस मुद्दे को केवल संसद तक सीमित न रखकर आम मतदाताओं तक ले जाने की जरूरत है।
मंगलवार के प्रदर्शन ने भी इस अभियान को नया राजनीतिक आयाम दिया। राहुल गांधी समेत विपक्षी नेताओं ने चुनाव आयोग तक मार्च करने की कोशिश की। दिल्ली पुलिस ने कई नेताओं को हिरासत में लिया। इसके बावजूद विपक्षी दलों ने आंदोलन जारी रखने का संकेत दिया। विपक्ष की ओर से यह भी कहा गया है कि जब तक उनकी मांगों पर कार्रवाई नहीं होती, तब तक दबाव बनाए रखा जाएगा।
विपक्षी रणनीति में एकजुटता को महत्वपूर्ण माना जा रहा है। संसद के मानसून सत्र के दौरान विभिन्न विपक्षी दल कई मुद्दों पर साथ दिखाई दिए थे। अब SIR और मुख्य चुनाव आयुक्त के खिलाफ कार्रवाई की मांग को लेकर भी साझा अभियान चलाने की तैयारी है। विपक्षी दलों की ओर से देशभर में पांच बड़ी रैलियां आयोजित करने की योजना भी सामने आई है।
आने वाले समय में यह आंदोलन संसद के शीतकालीन सत्र तक भी पहुंच सकता है। विपक्षी रणनीति के अनुसार यदि ज्ञानेश कुमार अपने पद से इस्तीफा नहीं देते हैं तो संसद के अगले सत्र में इस मुद्दे पर विरोध और तेज हो सकता है। इसके साथ ही मतदाता सूची से जुड़े अभियान को राज्यों और स्थानीय स्तर तक ले जाने की तैयारी है।
इस पूरे विवाद में SIR प्रक्रिया और मतदाता सूची में नामों को लेकर उठाए जा रहे सवाल केंद्र में हैं। विपक्ष इन मुद्दों के जरिए चुनाव प्रक्रिया में पारदर्शिता और मतदाताओं के अधिकारों से जुड़े सवाल उठा रहा है। आने वाले महीनों में यह मुद्दा राजनीतिक गतिविधियों और विपक्षी एकजुटता का प्रमुख केंद्र बना रह सकता है।
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