
नई दिल्ली। सोलर डिफेंस एंड एयरोस्पेस लिमिटेड (SDAL) ने भारतीय सेना को एक ही खेप में 450 लोइटरिंग म्यूनिशन की आपूर्ति पूरी कर एक महत्वपूर्ण उपलब्धि हासिल की है। कंपनी के मुताबिक, यह किसी भी निर्माता द्वारा भारतीय सेना को एक बार में दी गई लोइटरिंग म्यूनिशन की सबसे बड़ी खेप है। भारतीय सेना ने नागास्त्र-1R की आपूर्ति का ऑर्डर इमरजेंसी प्रोक्योरमेंट के तहत दिया था।
मार्च 2025 में महाराष्ट्र के मकलोह स्थित SFTS में हुए तकनीकी परीक्षणों में चार कंपनियों ने हिस्सा लिया था। कंपनी के अनुसार, इन परीक्षणों में केवल SDAL ही सभी ऑपरेशनल मानकों पर खरी उतरी। नागास्त्र-1R को सेना की विशेष जरूरतों के अनुरूप तैयार किया गया है। यह कम दूरी के ऑपरेशंस में कामिकाजे अटैक के लिए इस्तेमाल किया जा सकता है। इसमें मिशन को बीच में रद्द करने और ड्रोन को वापस सुरक्षित हासिल करने का विकल्प भी दिया गया है।
कंपनी के मुताबिक, सिस्टम की सटीकता का आकलन कई लाइव ट्रायल के दौरान लक्ष्य पर निशाना लगाने की क्षमता के आधार पर किया गया। ईरान, अमेरिका और इजरायल के बीच जारी संघर्षों के मद्देनजर, स्वदेशी रूप से विकसित इस प्रणाली को कम लागत में सटीक हमला करने की क्षमता वाला विकल्प बताया जा रहा है। SDAL अब अपनी लोइटरिंग म्यूनिशन प्रणालियों की तैनाती को और विस्तार देने तथा भारतीय सशस्त्र बलों के साथ दीर्घकालिक सहयोग बढ़ाने पर ध्यान केंद्रित कर रहा है। बता दें कि हाल ही में भारतीय नौसेना ने भी INS मंगरोल को अपने खेमे में शामिल किया है।
बता दें कि स्वदेशी ‘लोइटर म्यूनिशन’ (LM), नागास्त्र-1 को सोलर इंडस्ट्रीज नागपुर की सहायक इकोनॉमिक्स एक्सप्लोसिव्स लिमिटेड (EEL) ने जेड-मोशन, बैंगलोर की मदद से डिजाइन और डेवलप किया है। कंपनी ने बताया है कि 75 फीसदी से ज्यादा स्वदेशी सामग्री वाले ‘नागास्त्र-1’ में कई विश्वस्तरीय विशेषताएं हैं। बता दें कि सैन्य अभियानों में ड्रोन टेक्नोलॉजी काफी अहम साबित हुई है और हाल के संघर्षों-खासकर आर्मेनिया-अजरबैजान, सीरिया, सऊदी अरब के तेल क्षेत्रों तथा रूस-यूक्रेन के मामले में इसका इस्तेमाल काफी अहम रहा है।
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