
नई दिल्ली । यूपीआई एमडीआर (UPI MDR) दिवाली तक टाल दिया गया (Deferred until Diwali) ।
यूपीआई से भुगतान स्वीकार करने वाले व्यापारियों को फिलहाल राहत मिली है। रुपए 2,000 से अधिक के कुछ मर्चेंट ट्रांजैक्शन पर प्रस्तावित एमडीआर चार्ज को दिवाली तक टाल दिया गया है। यह नियम पहले 15 अक्टूबर से लागू होने वाला था। नेशनल पेमेंट्स कॉर्पोरेशन ऑफ इंडिया ने त्योहारी सीजन को ध्यान में रखते हुए इसके लागू होने की तारीख आगे बढ़ाने का फैसला लिया है। हालांकि, नई तारीख की आधिकारिक घोषणा अभी नहीं की गई है।
उपलब्ध जानकारी के मुताबिक, दिवाली के तुरंत बाद इसे लागू किया जा सकता है। नए नियमों के तहत, जिन व्यापारियों का मासिक यूपीआई कलेक्शन रुपए 1 लाख से अधिक है, उन्हें रुपए 2,000 से ज्यादा के प्रत्येक पात्र मर्चेंट ट्रांजैक्शन पर 0.4% एमडीआर चार्ज देना होगा। इस शुल्क पर 18% जीएसटी भी लागू होगा, वहीं, जिन व्यापारियों का महीने का कुल यूपीआई कलेक्शन रुपए 1 लाख तक है, उन्हें इस चार्ज से छूट मिलेगी। उनके लिए रुपए 2,000 से अधिक के भुगतान पर भी एमडीआर फीस नहीं लगेगी।
नियमों के अनुसार, यदि किसी छोटे व्यापारी का यूपीआई कलेक्शन लगातार तीन महीने तक रुपए 1 लाख से ज्यादा रहता है, तो बैंक उसे बड़े मर्चेंट की श्रेणी में स्थानांतरित कर सकते हैं। इसके बाद उस व्यापारी पर लागू नियमों के अनुसार एमडीआर चार्ज लग सकता है। हालांकि, नए नियमों के तहत बड़े व्यापारियों को भी रुपए 2,000 या उससे कम के पात्र यूपीआई भुगतान पर एमडीआर नहीं देना होगा। यहां रुपए 2,000 की सीमा पूरे दिन की बिक्री के बजाय प्रत्येक ट्रांजैक्शन के आधार पर तय होगी।
बड़े व्यापारियों के लिए शुल्क की अधिकतम सीमा भी तय की गई है। रुपए 75,000 या इससे अधिक के पात्र ट्रांजैक्शन पर एमडीआर चार्ज अधिकतम रुपए 300 होगा। इसके अतिरिक्त लागू जीएसटी भी देना होगा। कुछ चुनिंदा क्षेत्रों को अलग दरों के तहत रखा गया है। पेट्रोल पंप, रेलवे, बिल पेमेंट, टेलीकॉम, इंश्योरेंस और एजुकेशन से जुड़े पात्र मर्चेंट ट्रांजैक्शन पर रुपए 2,000 से ज्यादा के भुगतान के लिए 0.4% के बजाय 5 रुपए की फ्लैट फीस निर्धारित की गई है।
डिजिटल पेमेंट के अलग-अलग माध्यमों पर लगने वाली फीस की तुलना करें तो यूपीआई का प्रस्तावित एमडीआर चार्ज क्रेडिट और डेबिट कार्ड की तुलना में कम बताया जा रहा है। क्रेडिट कार्ड पर मर्चेंट फीस आम तौर पर 1.5% से 2.5% तक हो सकती है, जबकि डेबिट कार्ड पर यह कुछ मामलों में 0.90% तक रहती है। वास्तविक दरें बैंक, कार्ड नेटवर्क और कारोबारी समझौते के अनुसार अलग-अलग हो सकती हैं।
मर्चेंट डिस्काउंट रेट यानी एमडीआर वह शुल्क है, जो किसी व्यापारी को डिजिटल भुगतान स्वीकार करने की सुविधा उपलब्ध कराने के बदले बैंक या संबंधित पेमेंट सर्विस प्रोवाइडर को देना पड़ सकता है। यह शुल्क कार्ड पेमेंट, पॉइंट ऑफ सेल मशीन और कुछ डिजिटल पेमेंट व्यवस्थाओं से जुड़ा हो सकता है।
इसका उद्देश्य भुगतान प्रक्रिया और उससे जुड़े तकनीकी नेटवर्क के संचालन की लागत को कवर करना है। एमडीआर व्यापारी पर लगाया जाने वाला शुल्क है। इसे ग्राहक से स्वतः वसूला जाने वाला चार्ज नहीं समझना चाहिए। फिलहाल, प्रस्तावित यूपीआई मर्चेंट चार्ज टलने से त्योहारों के दौरान कारोबारियों को अस्थायी राहत मिली है। नई व्यवस्था कब से लागू होगी, इस पर व्यापारियों और भुगतान सेवा प्रदाताओं की नजर रहेगी।
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