
- कंटगी-पाटन बायपास के आसपास पटाखों के कथित गोदामों की अनुमति और स्टॉक की पुष्टि बाकी
जबलपुर। दीपावली का बाजार अभी दूर है, लेकिन कटंगी और पाटन बायपास के आसपास पटाखों के भंडारण की खबरें सामने आ रही हैं। स्थानीय स्तर पर दावा है कि दो-तीन दर्जन से अधिक कारोबारियों ने बाहरी इलाकों के गोदामों में पटाखों का स्टॉक रखा है। इन ठिकानों की अनुमति, सुरक्षा इंतजाम और वास्तविक स्टॉक की पुष्टि होना बाकी है। अगर बिना मानकों के भंडारण हो रहा है, तो खतरा सिर्फ कारोबारियों तक सीमित नहीं रहेगा—आसपास के लोगों और संपत्तियों पर भी असर पड़ सकता है।
प्रशासन ने हाल ही में पटाखा कारोबारियों के भंडारण स्थलों की जांच और लाइसेंस में दर्ज मात्रा से वास्तविक स्टॉक का मिलान करने के लिए अधिकारियों की ड्यूटी लगाई थी। राजस्व और पुलिस अधिकारियों की संयुक्त टीमों को गोदामों, संग्रहण स्थलों और आतिशबाजी दुकानों की जांच करनी है। इसके बावजूद बायपास किनारे कथित भंडारण की खबरें मिल रही हैं। ऐसे में सवाल है—जांच का दायरा इन इलाकों तक पहुंचा या नहीं? स्थानीय पुलिस को इन ठिकानों की जानकारी होने के दावे भी किए जा रहे हैं। यदि यह जानकारी सही है, तो अब तक कार्रवाई क्यों नहीं हुई? और यदि जानकारी नहीं है, तो निगरानी व्यवस्था किस आधार पर चल रही है? पटाखे ज्वलनशील सामग्री हैं। उनका भंडारण तय नियमों और सुरक्षा उपायों के साथ ही किया जाना चाहिए। किसी गोदाम में लापरवाही हुई, तो आग या विस्फोट का खतरा आसपास के मकानों, दुकानों और राहगीरों तक पहुंच सकता है। खतरे का आकलन केवल लाइसेंस देखकर नहीं, बल्कि मौके पर रखे स्टॉक और वास्तविक सुरक्षा इंतजामों की जांच से होगा।
जांच में इन बिंदुओं का मिलान जरूरी
- स्टॉक सत्यापन: गोदाम में रखी मात्रा का स्टॉक लाइसेंस में दर्ज सीमा से मिलान।
- दस्तावेज: बिल, कैश मेमो और जीएसटी रिकॉर्ड की जांच।
- लाइसेंस व नियम: लाइसेंस की शर्तों और लागू विस्फोटक सुरक्षा नियमों का पालन।
- अग्नि सुरक्षा: फायर एनओसी और पर्याप्त अग्निशमन उपकरणों की मौजूदगी।
- सुरक्षित दूरी: भंडारण स्थल की आबादी, स्कूल, अस्पताल, सुरक्षा संस्थानों और पेट्रोल पंपों से निर्धारित दूरी की पुष्टि।