
मध्य प्रदेश। राजधानी भोपाल (Bhopal) की झुग्गी बस्ती से निकलकर मॉडलिंग (Modeling) की दुनिया में पहचान बनाने की कोशिश कर रहीं 22 वर्षीय प्रीति प्रजापति (Preeti Prajapati) की कहानी मेहनत, पारिवारिक सहयोग (Family Support) और आत्मविश्वास (Confidence) की मिसाल है। लहारपुर (Laharpur) के रामेश्वरम एक्सटेंशन (Rameshwaram Extension) की संकरी गलियों में रहने वाली प्रीति ने सीमित संसाधनों के बीच बड़े सपने देखने का साहस किया। उनके पास न महंगे डिजाइनर कपड़े थे और न ही मॉडलिंग का अभ्यास करने के लिए कोई विशेष स्थान। इसके बावजूद उन्होंने अपने घर के सामने की गली को ही रैंप (Ramp) बनाया और वहीं से अपने सफर की शुरुआत की।
प्रीति ने घर के आसपास रैंप वॉक का अभ्यास किया और अपने वीडियो सोशल मीडिया पर साझा करने शुरू किए। धीरे-धीरे उनके वीडियो लोगों तक पहुंचने लगे और उनकी प्रतिभा को पहचान मिलने लगी। जिस गली में कभी वह अकेले अभ्यास करती थीं, वहां से निकलकर अब वह बड़े रैंप वॉक कार्यक्रमों में हिस्सा लेने लगी हैं। उनका लक्ष्य मॉडलिंग के क्षेत्र में आगे बढ़ना और अंतरराष्ट्रीय मंचों पर अपनी प्रतिभा का प्रदर्शन करना है।
प्रीति के इस सफर में उनकी बहन रेखा प्रजापति का योगदान बेहद महत्वपूर्ण है। मॉडलिंग के लिए महंगे कपड़े खरीदना परिवार के लिए आसान नहीं था। ऐसे में रेखा ने अपनी सिलाई के हुनर का इस्तेमाल करते हुए बहन के लिए कपड़े तैयार किए। इन कपड़ों ने प्रीति को अपने सपने की दिशा में आगे बढ़ने में मदद की। रेखा खुद भी फैशन की दुनिया में अपनी पहचान बनाना चाहती हैं और उनका सपना फैशन डिजाइनर बनने का है। इस तरह दोनों बहनें अपने-अपने हुनर के जरिए आगे बढ़ने की कोशिश कर रही हैं। एक मॉडलिंग में करियर बनाना चाहती हैं, तो दूसरी कपड़ों की डिजाइनिंग के क्षेत्र में अपनी जगह बनाना चाहती हैं।
प्रीति के पिता मोतीलाल प्रजापति मिस्त्री का काम करते हैं, जबकि उनकी मां कलिंदा प्रजापति गृहिणी हैं। परिवार में दो भाई और तीन बहनें हैं। सभी तीन कमरों के एक छोटे से मकान में रहते हैं। परिवार की आर्थिक परिस्थितियां भले ही सीमित हों, लेकिन प्रीति के सपनों को लेकर उनके माता-पिता का नजरिया सकारात्मक रहा है। पिता चाहते हैं कि उनकी बेटी मेहनत के दम पर आगे बढ़े और परिवार का नाम रोशन करे। वहीं, मां भी बेटी की प्रगति देखकर खुश हैं। परिवार से मिले इस सहयोग ने प्रीति को अपनी राह पर आगे बढ़ने का हौसला दिया है।
प्रीति के लिए यह सफर हमेशा आसान नहीं रहा। जब वह घर के सामने की गली में रैंप वॉक का अभ्यास करती थीं, तब आसपास के लोग उनसे सवाल करते थे कि वह ऐसा क्यों कर रही हैं। उस समय उनके मॉडल बनने के सपने को हर कोई समझ नहीं पाता था। हालांकि, प्रीति ने लोगों की बातों से पीछे हटने के बजाय अपने अभ्यास पर ध्यान दिया। समय के साथ उनकी मेहनत और बढ़ती पहचान को देखकर आसपास के लोगों की सोच में भी बदलाव आया। अब वही लोग उनकी कोशिशों की तारीफ करते हैं। प्रीति का अनुभव बताता है कि अपने लक्ष्य की ओर लगातार बढ़ते रहने से लोगों का नजरिया भी बदल सकता है।
प्रीति ने राजनीति विज्ञान में स्नातक की पढ़ाई पूरी की है। कोरोना काल में पढ़ाई प्रभावित होने के बाद उन्होंने मॉडलिंग में आगे बढ़ने का फैसला किया। शिक्षा पूरी करने के साथ-साथ उन्होंने अपने सपने को भी समय दिया और लगातार अभ्यास जारी रखा। अब उनकी नजर अंतरराष्ट्रीय फैशन रैंप पर चलने और दुनिया के सामने अपनी प्रतिभा दिखाने पर है।
प्रीति की कहानी केवल एक लड़की के मॉडल बनने की कोशिश तक सीमित नहीं है। इसमें परिवार के सहयोग, बहनों के आपसी विश्वास और सीमित साधनों के बीच अवसर तलाशने की कोशिश भी शामिल है। बहन के हाथों से तैयार किए गए कपड़े और पिता का हौसला उनके सफर का महत्वपूर्ण हिस्सा हैं। प्रीति उन युवतियों के लिए प्रेरणा बनना चाहती हैं, जो आर्थिक परिस्थितियों या सुविधाओं की कमी के कारण अपने सपनों को आगे बढ़ाने से हिचकिचाती हैं। उनका लक्ष्य अपनी मेहनत से मॉडलिंग की दुनिया में आगे बढ़ना और अपने परिवार के सपनों को भी नई पहचान दिलाना है।
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