
भोपाल। भाजपा के केंद्रीय संगठन में मध्य प्रदेश की भागीदारी बढ़ाने के लिए अब मोर्चों और प्रकोष्ठों की नियुक्तियों पर नजरें टिक गई हैं। राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन की टीम में प्रदेश के नेताओं को पहले ही आठ पद मिल चुके हैं। अब अगली परीक्षा सामाजिक और क्षेत्रीय समीकरणों के बीच अपनी जगह बनाने की है। खास तौर पर एससी और एसटी मोर्चों के अध्यक्ष पद खाली होने से प्रदेश के दावेदारों के लिए नए अवसर बने हैं। प्रदेश संगठन ने कुछ नामों का पैनल केंद्रीय नेतृत्व को भेजा है। विजयादशमी के बाद राष्ट्रीय मोर्चों की नई कार्यकारिणी घोषित होने की संभावना है। भाजपा में मध्य प्रदेश की हिस्सेदारी का सवाल इसलिए भी अहम है, क्योंकि प्रदेश के कुछ नेताओं को पदोन्नति मिलने के बाद मोर्चों में बदलाव की गुंजाइश बनी है।
बंशीलाल गुर्जर किसान मोर्चा के राष्ट्रीय अध्यक्ष हैं। वहीं, लाल सिंह आर्य को एससी मोर्चा अध्यक्ष से राष्ट्रीय उपाध्यक्ष और गजेंद्र पटेल को एसटी मोर्चा अध्यक्ष से राष्ट्रीय महामंत्री बनाकर झारखंड का प्रभारी बनाया गया है। इनके बाद एससी और एसटी मोर्चों के अध्यक्ष पद खाली हैं। इन नियुक्तियों में प्रदेश को कितनी हिस्सेदारी मिलती है, यह केंद्रीय नेतृत्व के सामाजिक प्रतिनिधित्व और संगठनात्मक जरूरतों पर निर्भर करेगा। एससी वर्ग से हरिशंकर खटीक और गंगा बाई पटले के नाम चर्चा में हैं। लाल सिंह आर्य के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष बनने के बाद इस वर्ग से प्रदेश के किसी नए चेहरे को जिम्मेदारी मिलने की संभावना भी जताई जा रही है।
महिला और युवा मोर्चे पर नजर
महिला मोर्चे में नेहा बग्गा का नाम चर्चा में है। शहडोल की सांसद हिमाद्री सिंह भी राष्ट्रीय स्तर पर जिम्मेदारी पाने की दावेदारों में शामिल बताई जा रही हैं। उनके नाम पर महिला प्रतिनिधित्व के साथ आदिवासी वर्ग के समीकरण भी अहम हो सकते हैं। हालांकि, उन्हें महिला मोर्चे में जिम्मेदारी मिलेगी या केंद्रीय मंत्रिमंडल में जगह, इसे लेकर अभी स्थिति स्पष्ट नहीं है। युवा मोर्चे में मध्य प्रदेश से भक्ति शर्मा, वैभव पवार और गजेंद्र तोमर के नाम संभावित दावेदारों के तौर पर सामने आए हैं। इनके चयन से प्रदेश के युवा नेताओं को राष्ट्रीय संगठन में जगह मिल सकती है।
ओबीसी दावेदारों में ज्यादा प्रतिस्पर्धा
ओबीसी वर्ग में दावेदारों की संख्या अधिक होने से मुकाबला भी दिलचस्प है। दर्शन सिंह चौधरी, गौरव रणदिवे और नारायण सिंह कुशवाह जैसे नाम चर्चा में हैं। पार्टी के सामने इस वर्ग को प्रतिनिधित्व देने के साथ संगठन में सक्रियता, अनुभव और क्षेत्रीय संतुलन साधने की चुनौती होगी। इसके अलावा निर्मला बारेला और हरिशंकर बाबा के नाम भी दावेदारों में बताए जा रहे हैं। भिंड की सांसद संध्या राय को भी राष्ट्रीय स्तर पर जिम्मेदारी मिलने की संभावना जताई जा रही है।
प्रतिनिधित्व के साथ संगठनात्मक संतुलन की चुनौती
राष्ट्रीय मोर्चों की नियुक्तियां केवल पद भरने की प्रक्रिया नहीं होंगी। इनके जरिए भाजपा को अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति, ओबीसी, महिला और युवा वर्ग के बीच संगठनात्मक संतुलन भी साधना है। मध्य प्रदेश में पार्टी की मजबूत राजनीतिक स्थिति के बावजूद केंद्रीय संगठन में किस वर्ग और क्षेत्र को कितनी जगह मिलती है, यह नियुक्तियों के बाद ही साफ होगा। फिलहाल प्रदेश के नेताओं की नजर केंद्रीय नेतृत्व के फैसले पर है। राष्ट्रीय टीम में मिली आठ पदों की हिस्सेदारी के बाद अब मोर्चों और प्रकोष्ठों की नियुक्तियां तय करेंगी कि मध्य प्रदेश का प्रभाव केवल शीर्ष संगठन तक सीमित रहता है या पार्टी के विभिन्न राष्ट्रीय मंचों पर भी उसका विस्तार होता है।
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