
नई दिल्ली ।आंध्र प्रदेश (Andhra Pradesh) के कोनासीमा जिले के अमलापुरम (Amalapuram) में स्थित श्री वासवी कन्यका परमेश्वरी मंदिर (Sri Vasavi Kanyaka Parameswari Temple) में शारदीय नवरात्र के अवसर पर देवी महालक्ष्मी (Mahalakshmi) का विशेष शृंगार किया गया। इस धार्मिक आयोजन में करीब साढ़े चार करोड़ रुपये के करेंसी नोटों (Currency Notes) का इस्तेमाल किया गया। नोटों से की गई आकर्षक सजावट के कारण मंदिर श्रद्धालुओं के बीच चर्चा का विषय बना हुआ है। देवी की प्रतिमा के साथ मंदिर के आसपास के हिस्सों को भी अलग-अलग रंगों के नोटों से सजाया गया।
मंदिर में देवी के शृंगार के लिए करेंसी नोटों को बेहद व्यवस्थित तरीके से लगाया गया। नोटों से तैयार की गई विस्तृत मालाओं और सजावटी आकृतियों ने पूरे आयोजन को खास रूप दिया। इस अनूठे शृंगार को देखने और देवी के दर्शन करने के लिए दूर-दूर से श्रद्धालु मंदिर पहुंच रहे हैं। नवरात्र के दौरान की गई यह सजावट धार्मिक आस्था और भक्तों की सहभागिता का विशेष उदाहरण मानी जा रही है।
मंदिर समिति के सदस्यों के अनुसार, करेंसी नोटों से बनी मालाओं को तैयार करने में करीब 15 दिन का समय लगा। इतनी बड़ी मात्रा में नोटों को एक साथ सजाने के लिए सावधानीपूर्वक योजना और लगातार मेहनत की गई। नोटों को अलग-अलग रंगों और आकारों के अनुसार व्यवस्थित करके मालाओं का रूप दिया गया। इसके बाद इन्हें देवी की प्रतिमा और मंदिर परिसर के निर्धारित हिस्सों में सजाया गया।
इस विशेष शृंगार में इस्तेमाल किए गए नोट श्रद्धालुओं की ओर से उपलब्ध कराए गए थे। आयोजन में भक्तों की भागीदारी महत्वपूर्ण रही, क्योंकि सजावट के लिए आवश्यक धनराशि के नोट विभिन्न श्रद्धालुओं ने दिए। मंदिर में की गई व्यवस्था के माध्यम से भक्तों को अपनी धार्मिक आस्था व्यक्त करने का अवसर मिला। नवरात्र जैसे विशेष अवसर पर देवी को इस तरह सजाने की परंपरा ने मंदिर के आयोजन को अलग पहचान दी है।
मंदिर समिति ने बताया कि नवरात्र का आयोजन पूरा होने के बाद जिन श्रद्धालुओं ने सजावट के लिए नोट दिए हैं, उन्हें उनकी राशि वापस लौटा दी जाएगी। यानी करेंसी नोटों का इस्तेमाल देवी के शृंगार के लिए अस्थायी रूप से किया गया है। सजावट पूरी होने के बाद नोटों को संबंधित श्रद्धालुओं तक वापस पहुंचाने की व्यवस्था की जाएगी।
इस आयोजन से जुड़ी एक मान्यता भी श्रद्धालुओं के बीच प्रचलित है। कुछ भक्तों का विश्वास है कि देवी के शृंगार में इस्तेमाल किए गए नोटों को घर या व्यावसायिक प्रतिष्ठान में रखने से सौभाग्य और आर्थिक समृद्धि प्राप्त होती है। इसी विश्वास के चलते कुछ श्रद्धालु इन नोटों को अपने लिए शुभ मानते हैं। हालांकि, यह धार्मिक आस्था से जुड़ी मान्यता है, जिसका कोई प्रमाणित आर्थिक प्रभाव स्थापित नहीं है।
श्री वासवी कन्यका परमेश्वरी मंदिर में हर साल नवरात्र के दौरान विशेष पूजा-अर्चना और धार्मिक अनुष्ठान किए जाते हैं। इस अवधि में देवी को विशेष भोग अर्पित किया जाता है, जिसे बाद में श्रद्धालुओं में वितरित किया जाता है। मंदिर परिसर में उत्सव के अनुरूप सजावट और अन्य तैयारियां भी की जाती हैं। इस बार करेंसी नोटों से किया गया शृंगार आयोजन का प्रमुख आकर्षण बना है।
करीब साढ़े चार करोड़ रुपये के नोटों से तैयार इस सजावट ने धार्मिक परंपरा, सामूहिक सहभागिता और श्रद्धालुओं की मान्यताओं को एक साथ सामने रखा है। नवरात्र के अवसर पर मंदिर में उमड़ रहे भक्तों के लिए देवी के दर्शन के साथ यह विशेष शृंगार भी आकर्षण का केंद्र बना हुआ है।
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