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गहरे समुद्र में तेल और गैस की खोज के लिए आधा खर्च देगी सरकार, सफलता मिलने पर लौटानी होगी रकम

October 25, 2026

नई दिल्ली। देश में तेल और गैस का घरेलू भंडार बढ़ाने तथा आयात पर निर्भरता कम करने के उद्देश्य से केंद्र सरकार ने एक बड़ी घोषणा की है। सरकार ने कहा है कि वो गहरे समुद्र में तेल और गैस की खोज के लिए कुओं की खुदाई में आने वाली कुल लागत का 50 प्रतिशत तक वित्तीय सहायता के रूप में देगी। हालांकि, अगर खोज सफल रहती है, तो संबंधित कंपनियों को सरकार से मिली राशि राजस्व के माध्यम से लौटानी होगी। वहीं, खोज में तेल या गैस नहीं मिलने की स्थिति में सरकार नुकसान वहन करेगी।

सरकार की 84,084 करोड़ रुपये की ‘समुद्र मंथन’ योजना के तहत जारी परिचालन दिशानिर्देशों में ये व्यवस्था की गई है। इसका उद्देश्य गहरे समुद्र में तेल और गैस की खोज से जुड़े शुरुआती वित्तीय जोखिम को कम करना और नई खोज को प्रोत्साहित करना है। दिशानिर्देशों के अनुसार, सहायता राशि की वसूली वाणिज्यिक उत्पादन शुरू होने के 7 साल बाद या कंपनी की खोज एवं विकास लागत का 50 प्रतिशत वसूल हो जाने पर शुरू होगी। दोनों में से जो स्थिति पहले आएगी, उसी के आधार पर वसूली की प्रक्रिया शुरू की जाएगी।


  • राशि सालाना किस्तों में लौटानी होगी और इसमें महंगाई के अनुरूप कोई अतिरिक्त बढ़ोतरी नहीं होगी। योजना के तहत 400 मीटर से ज्यादा गहराई वाले गहरे समुद्री क्षेत्रों और 1500 मीटर से ज्यादा गहराई वाले अति-गहरे समुद्री क्षेत्रों में कुल 60 कुओं की खुदाई को सहायता दी जाएगी। इनमें 56 खोजी कुओं की वास्तविक लागत का 50 प्रतिशत तक अनुदान मिलेगा।

    प्रत्येक कुएं के लिए सहायता की अधिकतम सीमा 675 करोड़ रुपये तय की गई है। वहीं, चट्टानों की परतों और भूगर्भीय संरचना की स्टडी करने वाले 4 ‘स्ट्रैटिग्राफिक’ कुओं के लिए लागत का 100 प्रतिशत तक सहयोग दिया जाएगा। प्रत्येक ऐसे कुएं के लिए अधिकतम 1350 करोड़ रुपये की सीमा निर्धारित की गई है। इस सहायता के लिए केवल सरकारी कंपनियां या उनके नेतृत्व वाले गठबंधन आवेदन कर सकेंगे।

    भुगतान खुदाई की प्रगति के आधार पर किया जाएगा। स्वीकृत गहराई का 40 प्रतिशत पूरा होने पर 40 प्रतिशत राशि और कुएं की खुदाई पूरी होने तथा रिपोर्ट मंजूर होने पर बाकी की 60 प्रतिशत राशि दी जाएगी। निर्धारित अधिकतम सीमाओं के आधार पर केवल कुओं की खुदाई के लिए सरकारी सहायता 43,200 करोड़ रुपये तक पहुंच सकती है। हालांकि, दिशानिर्देशों में योजना के कुल बजट का अलग-अलग मद में विस्तृत ब्योरा नहीं दिया गया है।

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