
चंडीगढ़ । राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु (President Droupadi Murmu) ने शक्तिपीठ मां भद्रकाली मंदिर, कुरुक्षेत्र में (In Shaktipeeth Maa Bhadrakali Temple Kurukshetra) विधिवत पूजा-अर्चना की (Offered Prayers with prescribed Rituals) ।
राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने कहा कि शक्तिपीठ मां भद्रकाली के दरबार में आकर उन्हें असीम शांति और ऊर्जा की अनुभूति हुई है। यह स्थान हमारी सनातन संस्कृति और आस्था का महान केंद्र है। भारत की राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने रविवार को विश्व प्रसिद्ध शक्तिपीठ मां भद्रकाली मंदिर कुरुक्षेत्र में देशवासियों की सुख, शांति, समृद्धि और कल्याण के लिए विधिपूर्वक पूजा-अर्चना की। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु का कुरुक्षेत्र पहुंचने पर हरियाणा के राज्यपाल प्रोफेसर असीम कुमार घोष, हरियाणा के मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी और शक्तिपीठ के पीठाध्यक्ष पंडित सतपाल शर्मा ने मंदिर परिसर में पुष्पगुच्छ भेंट कर आत्मीय स्वागत किया।
राष्ट्रपति ने सबसे पहले मंदिर परिसर में स्थित प्राचीन देवी कूप पर विधिपूर्वक पूजा-अर्चना की। उन्होंने परंपरा के अनुसार पूजा की और मंदिर की परिक्रमा भी की। इसके उपरांत राष्ट्रपति गर्भगृह में पहुंचीं, जहां उन्होंने मां भद्रकाली की विधिवत पूजा, आरती और मंत्रोच्चारण के साथ प्रार्थना की। उन्होंने माता को पंचामृत, पंचमेवा, नारियल और चुनरी का प्रसाद अर्पित किया। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु के द्वारा वैदिक मंत्रों के बीच मंदिर के पुजारियों ने देश की मंगलकामना के लिए विशेष पूजा संपन्न कराई। पूजा के दौरान पूरा मंदिर परिसर जय माता दी के जयघोष से गूंज उठा।
पूजा-अर्चना के उपरांत राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु को पीठाध्यक्ष पंडित सतपाल शर्मा ने शक्ति का प्रतीक त्रिशूल, माता की प्रतिमा और चुनरी भेंट स्वरूप प्रदान की। उन्होंने माता का आशीर्वाद और प्रसाद भी राष्ट्रपति को दिया और शक्तिपीठ की महिमा और इतिहास के बारे में विस्तार से जानकारी दी। उन्होंने बताया कि यह मंदिर 51 शक्तिपीठों में से एक है, जहां माता सती के दाएं घुटने का निपात हुआ था। यहां माता आशीर्वाद रूप में विराजमान हैं और इस स्थान के दर्शन मात्र से सभी मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं। महाभारत काल में पांडवों ने युद्ध से पूर्व यहां विजय की कामना के लिए पूजा की थी।
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