
नई दिल्ली । दिवाली (Diwali) के बाद मनाया जाने वाला भाई दूज (Bhai Dooj) का त्योहार भाई-बहन (Brother-Sister) के प्रेम, विश्वास और अटूट रिश्ते का प्रतीक है। वर्ष 2026 में इस पर्व की तारीख को लेकर लोगों के बीच असमंजस बना हुआ है। कुछ लोग इसे 10 नवंबर को मनाने की बात कर रहे हैं, जबकि पंचांग (Hindu Calendar) के अनुसार इस साल भाई दूज 11 नवंबर, बुधवार को मनाई जाएगी। इस दिन बहनें अपने भाइयों के माथे पर तिलक (Tilak) लगाकर उनकी लंबी उम्र, अच्छे स्वास्थ्य और सुख-समृद्धि की कामना करती हैं। वहीं भाई अपनी बहनों को उपहार देकर उनके साथ हमेशा खड़े रहने और उनकी रक्षा करने का संकल्प लेते हैं।
भाई दूज को यम द्वितीया के नाम से भी जाना जाता है। हिंदू पंचांग के अनुसार यह पर्व कार्तिक महीने के शुक्ल पक्ष की द्वितीया तिथि को मनाया जाता है। वर्ष 2026 में द्वितीया तिथि 10 नवंबर को दोपहर 2 बजे शुरू होगी और 11 नवंबर को दोपहर 3 बजकर 53 मिनट पर समाप्त होगी। उदया तिथि के आधार पर भाई दूज का पर्व 11 नवंबर को मनाया जाएगा। इसी वजह से 10 और 11 नवंबर की तारीख को लेकर भ्रम की स्थिति बन रही है।
भाई दूज 2026 पर तिलक लगाने के शुभ समय को लेकर भी श्रद्धालुओं के बीच उत्सुकता है। पंचांग के अनुसार, 11 नवंबर को दोपहर 1 बजकर 10 मिनट से 3 बजकर 20 मिनट तक तिलक लगाने का शुभ मुहूर्त रहेगा। इस दौरान बहनें पूजा की तैयारी करके अपने भाइयों को तिलक लगा सकती हैं। हालांकि, अलग-अलग स्थानों पर पंचांग और स्थानीय समय के अनुसार मुहूर्त में अंतर हो सकता है, इसलिए अपने क्षेत्र के पंचांग से भी समय की पुष्टि करना उचित रहेगा।
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, भाई दूज के दिन बहन द्वारा भाई के माथे पर तिलक लगाने की परंपरा उसके मंगलमय जीवन की कामना से जुड़ी है। बहनें पूजा करके भाइयों की लंबी उम्र, बेहतर स्वास्थ्य और खुशहाली की प्रार्थना करती हैं। इसके बदले भाई अपनी बहनों को उपहार देते हैं और उनके सुख-दुख में साथ निभाने का वचन देते हैं। यह पर्व पारिवारिक रिश्तों को मजबूत करने और आपसी स्नेह को व्यक्त करने का अवसर माना जाता है।
भाई दूज से जुड़ी एक प्रचलित पौराणिक कथा यमराज और उनकी बहन यमुना से संबंधित है। मान्यता है कि एक बार यमराज अपनी बहन यमुना से मिलने उनके घर पहुंचे थे। यमुना ने भाई का स्वागत किया, उनके माथे पर तिलक लगाया और आदरपूर्वक भोजन कराया। बहन के स्नेह और आतिथ्य से प्रसन्न होकर यमराज ने उनसे वरदान मांगने को कहा।
कथा के अनुसार, यमुना ने इच्छा जताई कि हर वर्ष इस दिन भाई अपनी बहनों के घर आएं और उनसे स्नेह प्राप्त करें। यमराज ने उनकी इच्छा स्वीकार करते हुए आशीर्वाद दिया कि इस दिन बहन से तिलक करवाने वाले भाइयों को सुख-समृद्धि का आशीर्वाद मिलेगा और अकाल मृत्यु का भय दूर होगा। इसी मान्यता के कारण इस पर्व को यम द्वितीया भी कहा जाता है।
भाई दूज पर तिलक, पूजा, भोजन और उपहार देने की परंपराएं अलग-अलग परिवारों में अपने रीति-रिवाजों के अनुसार निभाई जाती हैं। इस त्योहार का मुख्य भाव भाई-बहन के बीच प्रेम, सम्मान और एक-दूसरे के प्रति जिम्मेदारी को मजबूत करना है। वर्ष 2026 में यह पर्व 11 नवंबर को मनाया जाएगा, जबकि द्वितीया तिथि 10 नवंबर दोपहर से ही शुरू हो जाएगी। इसलिए पर्व मनाने की तैयारी करने वाले लोग तिथि और तिलक के शुभ समय को ध्यान में रख सकते हैं।
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