वॉशिंगटन। अमेरिका (US) की सख्त इमिग्रेशन नीतियों और छात्र वीजा की बढ़ती जांच-पड़ताल के बीच भारतीय छात्रों का अमेरिकी विश्वविद्यालयों से मोहभंग (American universities) होता दिखाई दे रहा है। अमेरिकी सरकार के आंकड़ों के मुताबिक, अक्टूबर 2025 से अक्टूबर 2026 के बीच अमेरिका में सक्रिय भारतीय छात्रों की संख्या में करीब 13.5 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई है। वहीं, वर्ष 2025-26 में अमेरिकी कॉलेजों में दाखिले के लिए आवेदन करने वाले भारतीय छात्रों की संख्या भी पिछले साल के मुकाबले 15 प्रतिशत कम हुई है।
स्टूडेंट एंड एक्सचेंज विजिटर इंफॉर्मेशन सिस्टम (एसईवीआईएस) के आंकड़ों के अनुसार, अक्टूबर 2025 में अमेरिका में 3,66,258 भारतीय छात्र थे। अक्टूबर 2026 में यह संख्या घटकर 3,16,893 रह गई। भारतीय छात्रों के साथ-साथ दूसरे देशों के विद्यार्थियों की संख्या में भी कमी आई है। आंकड़ों के अनुसार, अमेरिका में अंतरराष्ट्रीय छात्रों की कुल संख्या 12,83,240 से घटकर 11,92,572 रह गई है।
अमेरिका में विदेशी छात्रों के मामले में भारत के बाद चीन दूसरे स्थान पर है। आंकड़ों के अनुसार, चीनी छात्रों की संख्या में भी लगभग 10.2 प्रतिशत की गिरावट आई है। पिछले साल अमेरिकी विश्वविद्यालयों में 2,45,038 चीनी छात्र थे, जबकि अक्टूबर 2026 में यह संख्या घटकर 2,20,157 रह गई। विदेशी छात्रों में भारतीय विद्यार्थियों की हिस्सेदारी भी 28.5 प्रतिशत से घटकर लगभग 26.6 प्रतिशत रह गई है।
मास्टर्स प्रोग्राम में सबसे ज्यादा गिरावट
रिपोर्ट के मुताबिक, भारतीय छात्रों की संख्या में सबसे बड़ी कमी मास्टर्स यानी स्नातकोत्तर पाठ्यक्रमों में दर्ज की गई है। अमेरिका में मास्टर्स की पढ़ाई करने वाले भारतीय छात्रों की संख्या 2,92,929 से करीब 20 प्रतिशत घटकर 2,34,034 रह गई है। यह गिरावट ऐसे समय में आई है, जब बड़ी संख्या में भारतीय छात्र उच्च शिक्षा और बेहतर रोजगार के अवसरों के लिए अमेरिकी विश्वविद्यालयों का रुख करते रहे हैं।
हालांकि, डॉक्टोरल यानी पीएचडी स्तर पर तस्वीर अलग है। अमेरिकी गृह सुरक्षा विभाग (डीएचएस) के आंकड़ों के अनुसार, इस स्तर पर भारतीय छात्रों की संख्या 28,609 से बढ़कर 41,729 हो गई है। वहीं, स्नातक पाठ्यक्रमों में भारतीय छात्रों की संख्या अक्टूबर 2025 के 38,522 से घटकर अक्टूबर 2026 में 36,011 रह गई।
ट्रंप प्रशासन की नीतियों पर चिंता
अमेरिका में भारतीय छात्रों की संख्या में गिरावट के बीच छात्र वीजा की जांच-पड़ताल सख्त होने और इमिग्रेशन नियमों में बदलाव को लेकर चिंताएं बढ़ी हैं। ट्रंप प्रशासन ने ऑप्शनल प्रैक्टिकल ट्रेनिंग (ओपीटी) और साइंस, टेक्नोलॉजी, इंजीनियरिंग एवं मैथेमेटिक्स (स्टेम) एक्सटेंशन पर नई फीस लगाने का प्रस्ताव भी दिया है। इन कार्यक्रमों के जरिए विदेशी छात्रों को पढ़ाई के बाद अमेरिका में काम करने का अवसर मिलता है।
अमेरिका में भारतीय मूल के लोगों के संगठन ‘इंडियास्पोरा’ ने भी अपनी रिपोर्ट में इस रुझान पर चिंता जताई है। रिपोर्ट के अनुसार, अमेरिकी विश्वविद्यालयों में पढ़ाई के लिए जाने वाले भारतीय छात्रों की संख्या में कमी आ रही है। यदि यह रुझान जारी रहता है, तो इसका असर अमेरिकी विश्वविद्यालयों में भारतीय विद्यार्थियों की भागीदारी और उच्च शिक्षा के लिए अमेरिका को चुनने के उनके फैसलों पर पड़ सकता है।
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