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रेत की मची लूट: नर्मदा तट से महज 20 मीटर दूर बना डाली अवैध खदान

November 03, 2026

  • गौबच्छा घाट पर बेखौफ खनन का आरोप, 400 हाइवा रेत निकालने का दावा, 400 डम्पर से ज्यादा का स्टॉक

जबलपुर। नर्मदा के घाटों पर आस्था का सैलाब उमड़ता है, लेकिन इसी जीवनदायिनी नदी के किनारों पर रेत के कारोबार का ऐसा खेल चलने की जानकारी सामने आई है, जिसमें नियमों और पर्यावरणीय चिंताओं को दरकिनार किए जाने के आरोप हैं। शहपुरा तहसील के खैरी गांव स्थित गौबच्छा घाट के पास करीब 20 एकड़ क्षेत्र में रेत का कथित अवैध खनन किया जा रहा है। खदान नदी के तट से महज 20 मीटर की दूरी पर बताई जा रही है। यहां रेत के कई बड़े ढेर जमा हैं और हाइवा-डम्परों के जरिए लगातार परिवहन किए जाने की जानकारी सामने आई है। स्थानीय स्तर पर सामने आए विवरण के मुताबिक, इस स्थान से अब तक करीब 400 हाइवा रेत निकाले जाने का दावा है, जबकि मौके पर 400 डम्पर से अधिक रेत का स्टॉक होने की बात कही जा रही है। यदि ये आंकड़े जांच में सही पाए जाते हैं, तो यह केवल अवैध खनन का मामला नहीं, बल्कि नर्मदा के तटीय क्षेत्र में बड़े पैमाने पर प्राकृतिक संसाधनों के दोहन का गंभीर मामला होगा।


  • मुरम की अनुमति, रेत का कारोबार होने का आरोप
    मामले में खनिज अधिकारी सतीश मिश्रा का कहना है कि खैरी गांव के पास सड़क निर्माण करने वाली एजेंसी को मुरम-मिट्टी के खनन की अनुमति दी गई है। यदि वहां रेत निकाली जा रही है तो इसकी जांच कराई जाएगी। अधिकारी के इस बयान के बाद सबसे बड़ा मुद्दा यही है कि अनुमति किस सामग्री के खनन की है और मौके पर वास्तव में क्या निकाला जा रहा है। यदि मुरम की अनुमति की आड़ में रेत का उत्खनन हो रहा है, तो जिम्मेदार एजेंसी और निगरानी तंत्र की भूमिका की जांच जरूरी है। गौबच्छा घाट के पास जिस स्थान पर खनन की बात सामने आई है, वहां से नर्मदा की दूरी लगभग 20 मीटर बताई गई है। नदी के इतने करीब बड़े पैमाने पर खुदाई होने से तट की स्थिरता, नदी के प्रवाह और आसपास की कृषि भूमि पर संभावित असर को लेकर चिंता जताई जा रही है। गहराई और खुदाई की सीमा का वैज्ञानिक आकलन जरूरी है, ताकि बाढ़ के दौरान नदी की धारा और तटवर्ती इलाकों पर पडऩे वाले प्रभाव का पता चल सके।

    ठेका सरेंडर, फिर भी घाटों पर रेत का कारोबार
    जिले में जुलाई 2025 से रेत का ठेका सरेंडर बताया जा रहा है। इसके बाद माइनिंग कॉरपोरेशन पांच बार टेंडर जारी कर चुका है, लेकिन ठेका प्रक्रिया आगे नहीं बढ़ पाई। इस बीच शहपुरा और बेलखेड़ा क्षेत्र में अवैध खनन और परिवहन की शिकायतें सामने आती रही हैं। गौबच्छा घाट के अलावा मगरमुहां घाट पर भी नर्मदा की धार से रेत निकालने के आरोप हैं। ऐसे में सवाल यह है कि जब वैध ठेका ही नहीं है, तो घाटों से रेत का उत्खनन और बड़े पैमाने पर उसका भंडारण किसकी अनुमति से हो रहा है।

    हाईवे और रिंग रोड के पास चल रहा खेल, निगरानी पर सवाल
    गौबच्छा घाट जबलपुर-भोपाल हाईवे से करीब चार किलोमीटर की दूरी पर है। इसी क्षेत्र में जबलपुर रिंग रोड का निर्माण कार्य भी चल रहा है। निर्माण एजेंसियों और अधिकारियों की आवाजाही के बावजूद यदि इतने बड़े क्षेत्र में खनन और रेत का भंडारण हो रहा है, तो खनिज विभाग की निगरानी व्यवस्था पर सवाल उठना स्वाभाविक है। इससे पहले मेरेगांव में जिला प्रशासन की टीम ने जबलपुर-भोपाल हाईवे पर करीब 300 हाइवा रेत जब्त की थी। यह घटनाक्रम बताता है कि क्षेत्र में रेत के अवैध भंडारण और परिवहन की शिकायतों को हल्के में नहीं लिया जा सकता।

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