
जबलपुर। सरकारी अस्पतालों में मरीजों को बेहतर इलाज और आधुनिक सुविधाएं देने के दावे किए जा रहे हैं, लेकिन जबलपुर के सेठ गोविंददास जिला चिकित्सालय (विक्टोरिया) में 500 बिस्तरों की सुविधा का इंतजार खत्म होने का नाम नहीं ले रहा। करीब 50 करोड़ रुपये की लागत से बन रही चार मंजिला इमारत निर्धारित समयसीमा से दो साल पीछे चल रही है। 28 मई 2022 को इसका वर्चुअल शिलान्यास किया गया था और दिसंबर 2024 तक निर्माण पूरा करने का लक्ष्य रखा गया था, लेकिन अब तक भवन पूरा नहीं हो पाया है। सबसे बड़ी परेशानी यह है कि निर्माण पूरा होने की नई समयसीमा को लेकर भी स्थिति स्पष्ट नहीं है।
नक्शे और डीपीआर में बदलाव ने बढ़ाई देरी
परियोजना में विलंब की प्रमुख वजह डीपीआर और नक्शे में बार-बार बदलाव को बताया जा रहा है। यदि निर्माण शुरू होने से पहले योजना और जरूरतों का आकलन ठीक से किया गया होता, तो बार-बार बदलाव की नौबत क्यों आती? करोड़ों की परियोजना में समयसीमा तय होने के बावजूद निर्माण दो साल पीछे पहुंच गया, लेकिन जिम्मेदारी तय होने और नई समयसीमा सार्वजनिक होने का इंतजार है।
निर्माण के बीच मरीजों और स्टाफ की मुश्किलें
नई इमारत के निर्माण के कारण अस्पताल की मौजूदा व्यवस्थाएं भी प्रभावित हुई हैं। हड्डी रोग वार्ड सहित कुछ महत्वपूर्ण इकाइयों को परेशानी का सामना करना पड़ा है। बारिश के दौरान परिसर में कीचड़ और अब निर्माण से उड़ती धूल मरीजों, परिजनों और अस्पताल के कर्मचारियों के लिए परेशानी का कारण बन रही है।
कई विभागों की सुविधाएं एक ही भवन में प्रस्तावित
नई इमारत में मरीजों को एक ही परिसर में कई आधुनिक सुविधाएं उपलब्ध कराने की योजना है। भूतल पर सोनोग्राफी, सीटी स्कैन, एमआरआई, ओपीडी और डॉक्टरों व नर्सिंग स्टाफ के लिए ड्यूटी रूम प्रस्तावित हैं। पहली मंजिल पर आईसीयू, एनआईसीयू, तीन ऑपरेशन थिएटर और डायलिसिस कक्ष की व्यवस्था रखी गई है। अन्य मंजिलों पर भी ऑपरेशन थिएटर और आधुनिक जांच एवं उपचार सुविधाएं विकसित की जानी हैं। वर्तमान में अस्पताल में जांच और उपचार की सुविधाएं अलग-अलग स्थानों पर संचालित होती हैं। मरीजों को पैथोलॉजी, एक्सरे और दवा काउंटरों के बीच भटकना पड़ता है। नई इमारत पूरी होने से इन परेशानियों में कमी आने की उम्मीद है, लेकिन निर्माण की रफ्तार ने इस सुविधा को फिलहाल दूर कर दिया है।
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