
वाशिंगटन। पिछले दो साल से लगभग पूरी दुनिया में मनमानी चला रहे अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप (American President Donald Trump) को बड़ा झटका लगा है। मिडटर्म चुनाव (Midterm Elections) में ट्रंप की पार्टी रिपबल्किन को करारी हार का सामना करना पड़ा है। राष्ट्रपति ट्रंप ने सीनेट और हाउस में अपना बहुमत खो दिया है। उप राष्ट्रपति जेडी वेंस (Vice President JD Vance) ने इस हार के लिए ईरान युद्ध (Iran War) समेत कुल चार मुद्दों को जिम्मेदार ठहराया। कुछ समय बाद अब डोनाल्ड ट्रंप ने भी इस बात को स्वीकार कर लिया है कि मिडटर्म चुनाव में हार की एक बड़ी वजह ‘ईरान युद्ध’ भी रहा। ट्रंप ने कहा कि इस युद्ध की वजह से डीजल की कीमतों में वृद्धि हुई, जिसका असल अमेरिकी परिवारों के ऊपर पड़ा। हालांकि, ट्रंप ने जोर देकर कहा कि अगर उन्हें दोबारा ऐसा करने को कहा जाए, तो वह दोबारा ईरान पर हमला करेंगे, क्योंकि तेहरान को परमाणु हथियार नहीं रखने दिए जा सकते।
मिडटर्म चुनाव हार के बाद देश-विदेश से असहज स्थिति का सामना कर रहे डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान युद्ध पर पीछे हटने से इनकार कर दिया। वाइट हाउस में मीडिया से बात करते हुए ट्रंप ने जोर देकर कहा कि ईरान को परमाणु हथियार बनाने से रोकने के लिए यह राजनीतिक कीमत चुकाई जा सकती है। ट्रंप ने कहा, “मुझे लगता है कि यह काफी हद तक सच है। (ईरान युद्ध की वजह से मिडटर्म चुनाव में नुकसान) क्योंकि इससे पेट्रोल की कीमतें बढ़ गईं। लेकिन अगर मुझे दोबारा ऐसा करना पड़े, तो मैं दोबारा से यही करूंगा। क्योंकि लंबे समय के हिसाब से यही एकमात्र समाधान है। आप ईरान को परमाणु हथियार नहीं लेने दे सकते।”
ट्रंप का यह बयान ऐसे समय में सामने आया है, जब उप राष्ट्रपति जेडी वेंस ने ईरान युद्ध को मिडटर्म चुनाव में हार की वजह बताया है। दूसरी तरफ ट्रंप के बेटे डोनाल्ड ट्रंप जूनियर ने भी इस बात का समर्थन किया है। मिडटर्म नतीजों के बाद ट्रंप खेमे से आ रही इस तरह की बातों से यह साफ है कि अमेरिकी प्रशासन ईरान युद्ध को एक राजनीतिक बोझ की तरह मान रहा है। हालांकि, चुनाव में रणनीतिक हार के बाद भी ट्रंप चुनाव के नतीजों को स्वीकार करते हुए नजर आ रहे हैं।
रिपब्लिकन पार्टी के लिए मुसीबत बनीं डीजल की कीमत और ईरान युद्ध
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के दूसरे कार्यकाल ईरान युद्ध एक ऐसी घटना रही, जिसमें वह एक बड़ी रणनीतिक भूल करते हुए नजर आए। ट्रंप ने फरवरी में जब इस युद्ध की शुरुआत की थी, तो वह इसे केवल एक महीने या ज्यादा से ज्यादा दो महीने में खत्म करने की बात कह रहे थे। लेकिन फिलहाल 9 महीने हो गए हैं, लेकिन युद्ध जारी है।
इस युद्ध की वजह से ही वैश्विक स्तर पर तेल की कीमतें बढ़ गईं और देखते ही देखते इसका असर आम अमेरिकी नागरिकों की जेब पर भी पड़ने लगा। मिडटर्म चुनाव आते-आते ट्रंप को इसकी भनक लग चुकी थी। इसलिए एक दशक तक रूस पर प्रतिबंध लगातार उसकी कमर तोड़ने की कोशिश कर रहे अमेरिका ने मॉस्को से डीजल खरीदना शुरू कर दिया। दूसरी तरफ भारत को रूसी तेल खरीदने के लिए टैरिफ का डर दिखाने वाला ट्रंप प्रशासन जामनगर जाकर डीजल की डील करता हुआ नजर आया। आखिरी में ट्रंप की यह तमाम कोशिशें नाकामयाब रहीं और उन्हें मिडटर्म में हार का सामना करना पड़ा।
जेडी वेंस ने ईरान युद्ध और इजरायल से संबंध पर फोड़ा हार का ठीकरा
अमेरिका के उपराष्ट्रपति जेडी वेंस ने मिडटर्म चुनाव में हार का ठीकरा ईरान युद्ध पर फोड़ा। उन्होंने सोशल मीडिया साइट एक्स पर लिखे एक लंबे लेख में साफ तौर पर कहा कि चुनाव में हार के लिए ईरान युद्ध, इजरायल से संबंध सबसे बड़े कारक रहे। उन्होंने कहा कि 2024 के राष्ट्रपति चुनाव में ट्रम्प-वेंस टिकट का समर्थन करने वाले कई अमेरिकी मतदाताओं ने अपना पाला बदल लिया और मध्यावधि चुनावों में डेमोक्रेट्स को वोट दिया।
उन्होंने बताया कि शुरुआत में रिपब्लिकन विश्लेषक मतदान के आंकड़ों को देखकर उत्साहित थे, क्योंकि उन्हें लगा कि पार्टी के समर्थक बड़ी संख्या में वोट डालने आ रहे हैं। हालांकि, उनके द्वारा सलाह लिए गए एक डेटा विश्लेषक ने चेतावनी दी थी कि मतदान के आंकड़ों का मतलब यह नहीं है कि ये मतदाता रिपब्लिकन उम्मीदवारों को ही वोट देंगे।
अमेरिका में क्या है राजनीतिक स्थिति?
अमेरिका में इस चुनाव नतीजे के बाद डेमोक्रेटिक पार्टी के पास ट्रंप की प्रशासनिक क्षमताओं को सीमित करने की शक्ति आ गई है। ट्रंप की पार्टी अब हाउस और सीनेट दोनों में अपना बहुमत खो चुकी है। ऐसे में अगर उन्हें डेमोक्रेटिक पार्टी के साथ मिलकर काम करना होगा। वर्तमान चुनाव स्थिति की बात करें, तो हाउस की कुल 435 सीटों में है डेमोक्रेटिक पार्टी ने 228 सीटों पर जीत दर्ज की है। दूसरी तरफ ट्रंप की रिपब्लिकन पार्टी केवल 139 सीटों पर जीत दर्ज करने में सफल रही है। सीनेट की भी 100 में से 35 सीटों पर चुनाव हुए हैं। इसमें भी डेमोक्रेटिक पार्टी ने 20 पर जीत दर्ज की है, जबकि रिपब्लिक पार्टी केवल 13 पर अपना झंडा फहरा पाई है। बाकी दो सीटों पर अभी गिनती जारी है। कुल आंकड़ों की बात करें तो 100 सीटों वाले सीनेट में अब डेमोक्रेटिक के पास 54 और रिपब्लिकन के पास 44 सीट हैं। इस तरह ट्रंप ने सीनेट और हाउस दोनों में बहुमत खो दिया है। हालांकि, इस चुनाव से उनके राष्ट्रपति कार्यकाल पर कोई खास अंतर नहीं पड़ेगा। लेकिन उनकी प्रशासनिक चुनौतियां बढ़ सकती हैं।
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