
वाशिंगटन। अमेरिका में मध्यावधि चुनावों (midterm elections in the US) में राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और उनकी रिपब्लिकन पार्टी को झटका लगने के बीच ईरान ने होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) को लेकर बड़ा फैसला किया है। ईरान (Iran) ने भारत, चीन, इराक और कतर के जहाजों को इस महत्वपूर्ण समुद्री मार्ग से गुजरने पर लगी पाबंदियों से छूट देने की घोषणा की है। ईरानी संसद की राष्ट्रीय सुरक्षा और विदेश नीति समिति के उपाध्यक्ष अमीर हयात-मोघद्दम के मुताबिक, इन चार देशों के जहाज अब बिना किसी रोक-टोक के इस मार्ग से आवाजाही कर सकते हैं।
भारत से दवाओं का आयात, चीन से राजनीतिक समर्थन की उम्मीद
ईरानियन स्टूडेंट्स न्यूज एजेंसी को दिए साक्षात्कार में हयात-मोघद्दम ने कहा कि फिलहाल भारत, चीन, इराक और कतर को होर्मुज से गुजरने संबंधी प्रतिबंधों में छूट दी गई है। उन्होंने बताया कि इस फैसले का उद्देश्य इन देशों के साथ ईरान के हितों को मजबूत करना है।
भारत के लिए क्यों अहम है होर्मुज?
होर्मुज जलडमरूमध्य भारत की ऊर्जा सुरक्षा के लिहाज से बेहद महत्वपूर्ण है। भारत अपनी कच्चे तेल की जरूरत का करीब 90 प्रतिशत आयात करता है, जिसमें फिलहाल लगभग 30 प्रतिशत तेल होर्मुज के रास्ते आता है। पहले यह निर्भरता करीब 70 प्रतिशत थी। पश्चिम एशिया में संघर्ष शुरू होने के बाद भारत ने रूस, अमेरिका, पश्चिम अफ्रीका और संयुक्त अरब अमीरात के फुजैराह जैसे वैकल्पिक स्रोतों से तेल खरीद बढ़ाकर आयात के स्रोतों में विविधता लाई है।
हालांकि, एलपीजी के मामले में भारत की निर्भरता अब भी काफी अधिक है। भारत का करीब 90 प्रतिशत एलपीजी आयात होर्मुज जलमार्ग से होकर आता है। इसके अलावा कतर और यूएई से होने वाले एलएनजी आयात का 50 प्रतिशत से अधिक हिस्सा भी इसी मार्ग से गुजरता है। उर्वरकों के आयात के लिहाज से भी यह समुद्री रास्ता भारत के लिए महत्वपूर्ण है।
जहाजों की आवाजाही पर अब भी प्रतिबंध
ईरान और ओमान के बीच स्थित होर्मुज जलडमरूमध्य से पश्चिम एशियाई देशों की वैश्विक समुद्री तेल आपूर्ति का करीब 25 प्रतिशत हिस्सा गुजरता है। ईरान की ओर से इस मार्ग को बंद करने और व्यापारिक जहाजों की आवाजाही पर प्रतिबंध लगाने के बाद भारत लगातार अंतरराष्ट्रीय जलमार्गों पर नौवहन की स्वतंत्रता और ऊर्जा आपूर्ति निर्बाध बनाए रखने की मांग करता रहा है।
हयात-मोघद्दम का बयान ऐसे समय आया है, जब होर्मुज में जहाजों की आवाजाही को लेकर प्रतिबंध जारी हैं। यूरोपीय संघ के अनुसार, ईरान के इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स की नौसेना ने ऐसी व्यवस्था लागू की है, जिसके तहत जहाजों को गुजरने से पहले अपनी पहचान, माल और गंतव्य की जानकारी देनी होती है।
हमलों में 19 नाविकों की मौत
अंतरराष्ट्रीय समुद्री संगठन (आईएमओ) के अनुसार, फरवरी में संघर्ष शुरू होने से अगस्त तक व्यापारिक जहाजों पर कम से कम 70 हमले हुए। इन घटनाओं में 19 नाविकों की मौत हुई। पश्चिम एशिया के संघर्ष में अब तक मारे गए 24 भारतीयों में 15 नाविक शामिल हैं। ऐसे हालात में होर्मुज से भारतीय जहाजों को मिली छूट भारत की ऊर्जा आपूर्ति और समुद्री व्यापार के लिहाज से महत्वपूर्ण मानी जा रही है।
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