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नागपंचमी और सावन के तीसरे सोमवार का अद्भुत संयोग, काशी से देवघर तक… शिवालयों में उमड़ी भक्तों की भीड़

August 17, 2026

नई दिल्ली। सावन (Sawan) के तीसरे सोमवार और नाग पंचमी (Nag Panchami) के अवसर पर देश के कई हिस्सों में सुबह से ही भक्त मंदिरों में पूजा-अर्चना करने पहुंच रहे हैं. उत्तर प्रदेश (Uttar Pradesh) के वाराणसी में इस पावन अवसर पर श्री काशी विश्वनाथ मंदिर (Shri Kashi Vishwanath Temple) में भगवान श्री विश्वेश्वर की मंगला आरती की गई।

झारखंड के देवघर में श्री बाबा बैद्यनाथ ज्योतिर्लिंग मंदिर में भी भक्तों और कांवड़ियों का जनसैलाब उमड़ पड़ा है. अयोध्या में भी भक्तों ने नाग पंचमी के अवसर पर नागेश्वर नाथ महादेव मंदिर में पूजा-अर्चना की।

वहीं, काशी में आस्था सिर्फ मंदिरों और घाटों तक सीमित नहीं है. शहर की गलियों में कई ऐसी प्राचीन जगहें मौजूद हैं, जिनसे जुड़ी मान्यताएं आज भी लोगों के कौतूहल का केंद्र बनी हुई हैं. जैतपुरा का नागकूप भी ऐसी ही रहस्यमयी धार्मिक धरोहर है, जिसे नागलोक और महर्षि पतंजलि की तपस्थली से जोड़कर देखा जाता है।


  • 100 फीट नीचे विराजमान शिव
    कहा जाता है कि हजारों वर्ष पुराने इस नागकूप की बनावट साधारण कूप जैसी दिखाई देती है, लेकिन इसके भीतर सात कुओं और उनसे जुड़ी सीढ़ियों की चर्चा मिलती है. धार्मिक मान्यता है कि इन्हीं मार्गों से महर्षि पतंजलि नागलोक तक जाते थे. हालांकि, इन दावों की ऐतिहासिक या वैज्ञानिक पुष्टि अलग विषय है, लेकिन आस्था में नागकूप का विशेष स्थान है।

    नागकूप की सबसे रहस्यमयी मान्यता इसके भीतर मौजूद एक प्राचीन शिवलिंग को लेकर है. बताया जाता है कि यह शिवलिंग जमीन की सतह से करीब 100 फीट या उससे अधिक नीचे स्थित है. साल में एक बार कूप की सफाई के दौरान पुजारी नीचे जाकर शिवलिंग की पूजा करते हैं. पूजा के बाद कूप में दोबारा पानी भर दिया जाता है और आम श्रद्धालुओं के लिए अंदर जाना संभव नहीं रहता।

    नाग पंचमी पर उमड़ती है आस्था
    नाग पंचमी के दिन नागकूप पर श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ती है. लोग नाग देवता की पूजा करते हैं और मनोकामना पूर्ति की कामना करते हैं. धार्मिक मान्यता के अनुसार यहां पूजा करने से कालसर्प दोष से मुक्ति मिलती है. कई श्रद्धालु कूप के जल को घर ले जाकर उसका छिड़काव भी करते हैं।

    मान्यता यह भी है कि नागकूप की पूजा करने से सर्प भय से राहत मिलती है. हालांकि ऐसे धार्मिक विश्वास आस्था का विषय हैं और इनके वैज्ञानिक प्रमाण उपलब्ध नहीं हैं।

    काशी का यह नागकूप इसलिए खास है क्योंकि यहां रहस्य, पुरानी परंपरा और धार्मिक आस्था एक साथ दिखाई देती है. नाग पंचमी के मौके पर इसकी कहानी और भी दिलचस्प हो जाती है. एक ऐसा प्राचीन कूप, जिसके नीचे छिपी दुनिया को लेकर सदियों से नागलोक की कथाएं सुनाई जाती रही हैं।

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