रांची/पटना। बिहार के बाद अब झारखंड (Jharkhand) में शराबबंदी को लेकर नई चर्चा शुरू हो गई है। राज्य के उत्पाद और मद्य निषेध मंत्री योगेन्द्र प्रसाद (Yogendra Prasad) ने विधानसभा में संकेत दिया कि सरकार इस पर विचार कर सकती है, लेकिन इसके लिए केंद्र से बकाया राशि मिलने की शर्त रखी गई है।
मंत्री ने कहा कि यदि केंद्र सरकार विभिन्न विभागों की करीब दो लाख करोड़ रुपये की बकाया राशि का भुगतान कर दे, तो राज्य सरकार शराबबंदी जैसे बड़े फैसले पर गंभीरता से विचार करेगी।
केंद्र पर बकाया राशि का आरोप
सदन में अनुदान मांगों पर चर्चा के दौरान मंत्री ने बताया कि केंद्र सरकार के पास अभी भी राज्य का करीब 6270 करोड़ रुपये बकाया है। उन्होंने कहा कि इस मुद्दे को लेकर वह चार बार केंद्रीय मंत्रियों से मुलाकात कर चुके हैं।
हर जिले में बनेगी नशा विरोधी टास्क फोर्स
विधानसभा में नशे के बढ़ते कारोबार पर चिंता जताते हुए मंत्री ने घोषणा की कि राज्य के सभी जिलों में विशेष टास्क फोर्स गठित की जाएगी। इसका उद्देश्य ड्रग्स और नशीले पदार्थों के कारोबार पर सख्ती से रोक लगाना होगा।
विधायक Roshan Lal Choudhary ने सदन में कहा कि Hazaribagh के साथ-साथ Patratu, Barkagaon और Keradari जैसे इलाकों में नशीले पदार्थों का कारोबार तेजी से फैल रहा है, जिससे युवाओं में नशे की लत और अपराध बढ़ रहे हैं।
सरकार का दावा—नशे पर नियंत्रण
मंत्री ने कहा कि हाल के वर्षों में सख्त कार्रवाई के कारण नशे के कारोबार में कुछ कमी आई है। सरकारी आंकड़ों के अनुसार वर्ष 2026 में अब तक सिर्फ 17 मामले दर्ज हुए हैं।
हालांकि, हाल ही में Hazaribagh और आसपास के क्षेत्रों में करोड़ों रुपये के ड्रग्स की बरामदगी से यह भी संकेत मिला है कि राज्य में ड्रग माफिया की गहरी पैठ बनी हुई है।
सदन में पेश आंकड़ों के मुताबिक 2019 से 2023 के बीच राज्य में एनडीपीएस एक्ट के तहत 2396 मामले दर्ज किए गए थे।
बिहार में पहले से लागू है शराबबंदी
गौरतलब है कि पड़ोसी राज्य Bihar में कई वर्षों से पूर्ण शराबबंदी लागू है। ऐसे में झारखंड में भी इसे लागू करने को लेकर समय-समय पर राजनीतिक चर्चा होती रही है। फिलहाल सरकार ने इसे केंद्र से बकाया राशि मिलने की शर्त से जोड़ दिया है।
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