
नई दिल्ली. अमेरिका-ईरान (US-Iran) जंग के बीच जिसका डर था वही हुआ. स्ट्रेट ऑफ होर्मुज (Strait of Hormuz) के बाद दूसरा वॉर फ्रंट खुल गया है. इसकी वजह से भारत-चीन (India and China) आ रहे दो तेल टैंकर्स (Oil tankers) को यू-टर्न लेना पड़ा. ऐसा यमन में मौजूद ईरान-समर्थक हूतियों की धमकियों के बाद हुआ है.
इन टैंकर्स ने लाल सागर में सऊदी अरब के यानबू बंदरगाह से चीन और भारत के लिए कच्चा तेल लोड किया था. लेकिन हूतियों की धमकियों के बाद वे बाब-अल-मंदेब से होते हुए हिंद महासागर में नहीं आए. बल्कि उल्टा स्वेज नहर की ओर बढ़ गए. अब उनको बहुत लंबा घूमकर अपना सफर पूरा करना होगा.
हूतियों ने, जिनका उत्तरी और पश्चिमी यमन (जिसमें लाल सागर के मुहाने पर स्थित तट भी शामिल है) पर कंट्रोल है. उन्होंने सोमवार को सऊदी अरब की नौसैनिक घेराबंदी का ऐलान किया था. फिर शिपिंग कंपनियों को लिखे एक पत्र में, हूतियों ने उन सभी जहाजों पर हमला करने की धमकी दी जो सऊदी तेल लोड या अनलोड करते हैं.
बता दें कि जंग की वजह से खाड़ी से बाहर निकलने का रास्ता ‘स्ट्रेट ऑफ होर्मुज’ बंद हो गया है. ऐसे में लाल सागर सऊदी तेल को निकालने के लिए मुख्य वैकल्पिक रास्ता बन गया है. यानबू के जरिए पाइपलाइन से हर दिन लाखों बैरल सऊदी तेल इसी रास्ते से भेजा जा रहा है. लेकिन अब नया फ्रंट खुलने से इसमें भी चुनौती होगी.
नीचे दिए मैप से इसे समझें- इसमें लाल रंग का प्वाइंट यानबू पोर्ट है. पहले टैंकर्स को यहां से रेड सी के रास्ते होते हुए भारत आना था. लेकिन यमन में बैठे हूतियों की धमकियों की वजह से अब जहाजों ने यू-टर्न लिया. अब वे काहिरा (Cairo) के रास्ते से आएंगे.
इस बीच मंगलवार को तेल की कीमतों में 2% से ज्यादा की बढ़ोतरी हुई. ब्रेंट क्रूड की कीमत $91 प्रति बैरल से ऊपर रही और अमेरिकी गैसोलीन की कीमत फिर से $4 प्रति गैलन से ज्यादा हो गई.
इस घटनाक्रम पर अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप का भी बयान आया है. उन्होंने कहा कि हूतियों ने अभी तक बाब अल-मंडेब (लाल सागर की तरफ वाला रास्ता, जिसे आंसुओं का रास्ता या गेट ऑफ टीयर्स कहा जाता है) को बंद नहीं किया है. ट्रंप ने चेतावनी दी कि अगर वे ऐसा करते हैं तो उनके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी. ट्रंप ने दावा किया कि अब तक ऐसा नहीं हुआ है. अगर ऐसा कुछ होता है, तो हम उससे निपट लेंगे.
राष्ट्रपति ने इस बात की भी पुष्टि की कि अब तक 18 अमेरिकी सैनिक मारे जा चुके हैं. जिनमें पिछले कुछ दिनों में जॉर्डन और इराक में अमेरिकी सैन्य ठिकानों पर ईरानी हमलों में मारे गए चार सैनिक भी शामिल हैं.
दूसरी तरफ अमेरिकी सेना ने लगातार 11वीं रात ईरान पर बमबारी की. तेहरान के साथ दक्षिण-पूर्वी तटीय शहरों चाबहार और कोनारक में भी धमाके हुए. बुशहर में दो धमाके सुने गए, जहां ईरान का एकमात्र परमाणु ऊर्जा संयंत्र मौजूद है. इससे पहले, ईरान ने बहरीन, कुवैत और जॉर्डन में अमेरिकी सैन्य बेसों को निशाना बनाया था और खाड़ी के मुहाने पर होर्मुज में एक टैंकर पर हमला किया गया था.
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