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ट्रंप के ‘बोर्ड ऑफ पीस’ में शामिल क्या हुए, पाकिस्तान में गाजा पर बवाल हो गया

January 24, 2026

वाशिंगटन। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप (Donald trump) से गलबहियां के चक्कर में पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ (Prime Minister Shahbaz Sharif) ने अपने घर में फूट डलवा ली है. पाकिस्तान में विपक्षी दलों की आलोचना के बावजूद प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने गुरुवार, 22 जनवरी को अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की अध्यक्षता में गाजा के लिए गठित ‘बोर्ड ऑफ पीस’ में शामिल होने के करार पर हस्ताक्षर कर दिये.



  • पाकिस्तान समेत 19 देशों के नेताओं का एक समूह स्विटजरलैंड के दावोस में एक हस्ताक्षर समारोह में ट्रंप के साथ मंच पर जमा हुआ और संस्था के संस्थापक चार्टर में अपना-अपना नाम शामिल किया. जब साइन करने का मौका आया तो शहबाज ट्रंप के बगल में बैठकर मुस्कुरा रहे थे. हालांकि पाकिस्तान के अंदर वो अपने इस फैसले पर घिरते दिख रहे हैं.

    वैसे तो ‘बोर्ड ऑफ पीस’ को मूल रूप से गाजा पर इजराइल के दो साल के युद्ध के बाद गाजा में शांति की देखरेख करने के लिए बनाया गया है लेकिन ट्रंप का प्लान इससे कहीं आगे का है. ‘बोर्ड ऑफ पीस’ का चार्टर अंतरराष्ट्रीय संघर्षों को हल करने में एक व्यापक भूमिका की कल्पना करता है. कहा जा रहा है कि ट्रंप इसके जरिए अपना खुद का संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद बना रहे हैं.

    पाकिस्तान में हो रही आलोचना
    इमरान खान की विपक्षी पार्टी PTI के अध्यक्ष बैरिस्टर गोहर अली खान ने इस बात पर अफसोस जताया कि पीएम शहबाज बिना किसी परामर्श के ‘बोर्ड ऑफ पीस’ में शामिल हो गए. गोहर ने कहा, “कल, विदेश कार्यालय ने कहा कि वह बोर्ड ऑफ पीस में शामिल हो गया है. सरकार ने सदन की अनदेखी की.” उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि संसद को बोर्ड में शामिल होने की शर्तों के बारे में सूचित किया जाना चाहिए. उन्होंने कहा, “क्या आप हमास को निरस्त्र (हथियार छोड़ने) करने में कोई भूमिका निभाएंगे? यदि यह संयुक्त राष्ट्र का कोई निकाय (बॉडी) होता, तो सरकार खुद से कदम उठा सकती थी. लेकिन बोर्ड ऑफ पीस संयुक्त राष्ट्र का कोई निकाय नहीं है.”

    डॉन की रिपोर्ट के अनुसार PTI के दिग्गज नेता असद कैसर ने कहा कि यह दुर्भाग्यपूर्ण है कि सरकार ने सर्वसम्मति से इतना संवेदनशील फैसला लेने की जहमत नहीं उठाई. उन्होंने कहा, “उन्हें वैश्विक समुदाय को गलत धारणा देने के लिए कम से कम संसद में इस पर चर्चा करनी चाहिए थी कि पाकिस्तान में लोकतंत्र है.”

    इस बीच, जमीयत उलेमा-ए-इस्लाम फजल (जेयूआई-एफ) प्रमुख मौलाना फजलुर रहमान ने हमास को निरस्त्र करने के किसी भी अभियान का हिस्सा बनने के खिलाफ चेतावनी दी. उन्होंने कहा कि फिलिस्तीनियों की दुर्दशा के लिए जिम्मेदार लोग बोर्ड का हिस्सा हैं. उन्होंने पाकिस्तान की नेशनल असेंबली (संसद) में कहा, “ट्रंप से शांति की उम्मीद करना मूर्खों के स्वर्ग में रहने के समान है.”

    उन्होंने इस बात पर जोर डाला कि ट्रंप ही बोर्ड के अध्यक्ष हैं और उन्होंने अपने विवेक से सदस्यों की नियुक्ति की है. साथ ही यह भी कहा कि ट्रंप ने वेनेजुएला के राष्ट्रपति और उनकी पत्नी का अपहरण कर लिया है. उन्होंने कहा कि गाजा पर बमबारी जारी है और प्रधान मंत्री शहबाज शरीफ और नेतन्याहू इस बोर्ड में “कंधे से कंधा मिलाकर” बैठेंगे.

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