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मुगलों के बाद अंग्रेजों ने लाल किले को इस काम के लिए किया था इस्‍तेमाल, जानिए इतिहास

August 15, 2026

नई दिल्ली। दिल्ली (Delhi) का लाल किला (Red Fort) कभी मुगल सत्ता का केंद्र और शाही परिवार का स्थायी निवास था। किला-ए-मुबारक के नाम से पहचाने जाने वाले इस किले पर शाहजहां के समय से सितंबर 1857 तक मुगलों का अधिकार रहा। 1857 के प्रथम स्वतंत्रता संग्राम (Freedom Struggle) के बाद अंग्रेजों (British) ने इस पर कब्जा कर लिया और इसकी पहचान ही बदल दी। अंग्रेजों ने लाल किले के बड़े हिस्से को सैन्य छावनी, सैनिक बैरकों और मिलिट्री कोर्ट के तौर पर इस्तेमाल किया।

1857 के बाद अंग्रेजों ने जमाया कब्जा
1857 के प्रथम स्वतंत्रता संग्राम को दबाने के लिए ब्रिटिश ईस्ट इंडिया कंपनी की सेना ने लाल किले पर हमला किया। इस दौरान मुगल बादशाह बहादुर शाह जफर को सत्ता से हटा दिया गया। लाल किले और उसके आसपास अंग्रेजों और भारतीय स्वतंत्रता सेनानियों के बीच भीषण संघर्ष हुआ। हालांकि, अंग्रेजों ने विद्रोह को कुचल दिया।

इसके करीब एक साल के भीतर ब्रिटिश राज ने ईस्ट इंडिया कंपनी से शासन की जिम्मेदारी ले ली। इसके बाद लाल किले को सैन्य छावनी में बदल दिया गया। किले के कई हिस्सों को नुकसान पहुंचाया गया और ऐतिहासिक आवासीय क्षेत्रों को सैनिकों की बैरकों में तब्दील कर दिया गया।


  • कीमती सामान लूटा, इमारतों को भी नुकसान पहुंचाया
    मुगल शासन समाप्त होने के बाद अंग्रेजों ने लाल किले की बहुमूल्य वस्तुओं पर कब्जा कर लिया। किले के अंदर मौजूद लगभग सभी फर्नीचर या तो नष्ट कर दिए गए या इंग्लैंड भेज दिए गए।

    किले की कई ऐतिहासिक इमारतों और स्थलों को भी नुकसान पहुंचाया गया। उनकी जगह पत्थर की बैरकें बनाई गईं। इस तरह लाल किले को अंग्रेजों ने अपनी सैन्य ताकत और नियंत्रण के प्रतीक के रूप में इस्तेमाल किया।

    आर्मी बेस और मिलिट्री कोर्ट भी बना
    अंग्रेजों के दौर में लाल किला केवल सैनिकों के रहने की जगह नहीं था। इसका इस्तेमाल आर्मी बेस और मिलिट्री कोर्ट के रूप में भी किया गया। किले में ब्रिटिश सैनिकों और बड़े सैन्य अधिकारियों की मौजूदगी रहती थी।

    1857 के विद्रोह के बाद अंतिम मुगल बादशाह बहादुर शाह जफर पर लाल किले के दीवान-ए-खास में मुकदमा चलाया गया। उन्हें दोषी ठहराने के बाद बर्मा निर्वासित कर दिया गया।

    लाल किले में हुए कोर्ट-मार्शल
    अंग्रेजों ने लाल किले में सैनिक अदालतें भी लगाईं। आजादी से पहले यहां कई सैन्य मामलों की सुनवाई हुई। इनमें सबसे चर्चित मामलों में से एक आजाद हिंद फौज (INA) के अधिकारियों का मुकदमा था, जिसे इतिहास में ‘लाल किला मुकदमा’ के नाम से जाना जाता है।

    नवंबर 1945 में ब्रिटिश सेना ने आजाद हिंद फौज के अधिकारियों प्रेम सहगल, गुरबख्श सिंह ढिल्लों और शाहनवाज खान के खिलाफ लाल किले में कोर्ट-मार्शल की कार्रवाई शुरू की। 1945-46 के इन मुकदमों ने देशभर में आजाद हिंद फौज के समर्थन और ब्रिटिश शासन के विरोध को और तेज कर दिया।

    आजादी के बाद ASI को सौंपा गया
    भारत की आजादी के बाद लाल किले के एक बड़े हिस्से पर भारतीय सेना का कब्जा रहा। बाद में इसके संरक्षण और जीर्णोद्धार के लिए इसे भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI) को सौंप दिया गया।

    इस तरह जो लाल किला कभी मुगल बादशाहों की शाही सत्ता का केंद्र था, अंग्रेजों के शासन में वही सैन्य छावनी और अदालत का प्रमुख केंद्र बन गया। आज यह भारत के इतिहास, स्वतंत्रता संघर्ष और राष्ट्रीय पहचान से जुड़े सबसे महत्वपूर्ण स्मारकों में शामिल है।

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