
नई दिल्ली।प्रयागराज के माघ मेले में शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद(Shankaracharya Swami Avimukteshwaranand) के साथ प्रशासन (administration)की कथित बदसलूकी और फिर उत्तर प्रदेश सरकार(state government) की तरफ से नोटिस जारी (notice issued)किए जाने को लेकर कांग्रेस ने बीजेपी पर निशाना साधा है। कांग्रेस ने कहा कि पहले यह सरकार मुसलमानों (government Muslims)से नागरिकता का कागज मांगती थी और अब शंकराचार्य से भी कागज दिखाने को कहा जा रहा है।
पार्टी के मीडिया विभाग के प्रमुख पवन खेड़ा ने यह भी कहा कि किसी मुख्यमंत्री या प्रशासन की यह तय करने की हैसियत नहीं है कि शंकराचार्य कौन हैं। दरअसल, माघ मेले में स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती को मौनी अमावस्या स्नान करने से मेला पुलिस और प्रशासन द्वारा कथित तौर पर रोके जाने को लेकर उठे विवाद के बीच मेला प्रशासन ने उन्हें एक नोटिस जारी करके पूछा है कि वह स्वयं को ज्योतिष्पीठ के शंकराचार्य के रूप में कैसे प्रचारित कर रहे हैं।
खेड़ा ने यहां संवाददाताओं से कहा, ‘गुरु-शिष्य की एक अखंड परंपरा होती है, जिसके तहत शंकराचार्य चुने जाते हैं। लेकिन सरकार आधी रात को नोटिस देकर पूछ रही है कि आप शंकराचार्य हैं या नहीं।’ उनका कहना था, ‘‘जब प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी, अविमुक्तेश्वरानंद जी के सामने नतमस्तक हुए, तब तक वह शंकराचार्य थे, जब तक वह गौ मांस पर सरकार से सवाल नहीं पूछते थे, तब तक वह शंकराचार्य थे, जब तक अविमुक्तेश्वरानंद जी, आधे-अधूरे मंदिर की प्राण प्रतिष्ठा का विरोध नहीं कर रहे थे, तब तक वह शंकराचार्य थे…. लेकिन अब वह शंकराचार्य नहीं रहे, क्योंकि वह राजा के सामने नतमस्तक नहीं हुए, इसलिए आदित्यनाथ आज इनसे कागज मांग रहे हैं।’
उन्होंने कटाक्ष करते हुए कहा, ‘बीजेपी वाले पहले मुसलमानों से कहते थे कि कागज दिखाओ। अब स्थिति यहां तक पहुंच गई है कि शंकराचार्य से भी कागज मांग रहे हैं।’ खेड़ा ने कहा, ‘‘1954 में सुप्रीम कोर्ट का आदेश था कि मठ के संचालन में हस्तक्षेप का किसी को अधिकार नहीं है। ऐसे में अजय सिंह बिष्ट (योगी आदित्यनाथ) ने जो नोटिस भेजा है, वह कानून का उल्लंघन है। पूरा देश मोदी और अजय सिंह बिष्ट के मौन को देख रहा है, देश इन्हें कभी माफ नहीं करेगा।’
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