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बांग्लादेश-चीन के बीच मोंगला आर्थिक क्षेत्र पर समझौता, भारत की रणनीतिक चिंताएं बढ़ीं

June 27, 2026

बीजिंग/नई दिल्ली। बांग्लादेश और चीन (Bangladesh and China) ने मोंगला बंदरगाह के निकट एक नए आर्थिक क्षेत्र (Economic Zone) के विकास के लिए समझौता किया है। यह परियोजना उस प्रस्ताव की जगह लेगी, जिसे पहले भारत के सहयोग से विकसित किए जाने की योजना थी। माना जा रहा है कि इस फैसले से बंगाल की खाड़ी क्षेत्र में चीन की रणनीतिक मौजूदगी और मजबूत हो सकती है, जबकि भारत के लिए नई कूटनीतिक और सामरिक चुनौतियां खड़ी हो सकती हैं।

यह समझौता बांग्लादेश के प्रधानमंत्री तारिक रहमान की चीन यात्रा के दौरान हुआ। बीजिंग में उनकी मौजूदगी में चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग के साथ हुई बैठक के बाद दोनों देशों ने कई सहयोग समझौतों पर हस्ताक्षर किए। इनमें मोंगला बंदरगाह के निकट आर्थिक क्षेत्र का विकास भी शामिल है।

भारत से जुड़ी परियोजना की जगह चीन को मिला अवसर

जानकारी के अनुसार, मोंगला आर्थिक क्षेत्र के लिए पहले भारत के सहयोग से परियोजना प्रस्तावित थी और इसके लिए भूमि भी चिह्नित की गई थी। हालांकि, बाद में यह योजना रद्द कर दी गई और अब इसी क्षेत्र के विकास का जिम्मा चीन की एक सरकारी कंपनी को सौंप दिया गया है।

मोंगला बांग्लादेश का दूसरा सबसे बड़ा समुद्री बंदरगाह है और इसकी सामरिक स्थिति के कारण इसे क्षेत्रीय व्यापार और समुद्री संपर्क के लिहाज से महत्वपूर्ण माना जाता है।

हिंद महासागर क्षेत्र में बढ़ेगी चीन की मौजूदगी

विश्लेषकों का मानना है कि मोंगला परियोजना से बंगाल की खाड़ी और हिंद महासागर क्षेत्र में चीन की रणनीतिक उपस्थिति और मजबूत हो सकती है। इससे पहले चीन पाकिस्तान के ग्वादर बंदरगाह, श्रीलंका के हंबनटोटा बंदरगाह और पूर्वी अफ्रीका के जिबूती में भी बड़े पैमाने पर निवेश कर चुका है। ऐसे में मोंगला परियोजना को भी उसकी व्यापक समुद्री रणनीति का हिस्सा माना जा रहा है।


  • बेल्ट एंड रोड पहल पर भी बनी सहमति

    बैठक के दौरान राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने अपनी महत्वाकांक्षी बेल्ट एंड रोड इनिशिएटिव (BRI) को आगे बढ़ाने पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि चीन बांग्लादेश की नई सरकार के साथ उच्च गुणवत्ता वाले बुनियादी ढांचा और आर्थिक सहयोग को आगे बढ़ाने के लिए तैयार है।

    दोनों देशों ने चटगांव में प्रस्तावित चीनी आर्थिक एवं औद्योगिक क्षेत्र के विकास पर भी सहमति जताई।

    तीस्ता परियोजना में सहयोग का आश्वासन

    चीन ने बांग्लादेश की तीस्ता नदी प्रबंधन एवं पुनर्जीवन परियोजना में सहयोग देने का भी भरोसा दिलाया है। यह परियोजना लंबे समय से चर्चा में रही है। इससे पहले पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना के कार्यकाल में इस परियोजना में भारत की भागीदारी की संभावना जताई गई थी, लेकिन बाद के राजनीतिक घटनाक्रमों के बाद बांग्लादेश ने चीन के साथ सहयोग बढ़ाने की दिशा में कदम बढ़ाए हैं।

    विशेषज्ञों का मानना है कि तीस्ता परियोजना में चीन की भागीदारी दक्षिण एशिया में जल संसाधन प्रबंधन के क्षेत्र में उसकी बढ़ती सक्रियता को दर्शाती है।

    भारत के लिए क्यों अहम है यह घटनाक्रम?

    भारत और बांग्लादेश के बीच 54 साझा नदियां हैं और दोनों देशों के बीच जल बंटवारे सहित कई रणनीतिक मुद्दों पर समय-समय पर बातचीत होती रही है। ऐसे में मोंगला आर्थिक क्षेत्र और तीस्ता परियोजना में चीन की बढ़ती भागीदारी को भारत की क्षेत्रीय रणनीति के लिहाज से महत्वपूर्ण घटनाक्रम माना जा रहा है।

    हालांकि, इन परियोजनाओं का वास्तविक प्रभाव उनके क्रियान्वयन, निवेश की गति और क्षेत्रीय भू-राजनीतिक परिस्थितियों पर निर्भर करेगा।

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