
नई दिल्ली: ईरान पर हमले के 10 दिन बाद अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के सलाहकारों ने उनसे सुलह का रास्ता तलाशने की सलाह दी है. इन सलाहकारों का कहना है कि ईरान और अमेरिका के बीच युद्ध अगर लंबा खिंचता है तो इसका सीधा नुकसान अमेरिका को होगा. सलाहकारों ने ट्रंप से उनके कोर वोटरों के नाराज होने की भी आशंका जाहिर की है. यही वजह है कि राष्ट्रपति ट्रंप ने मंगलवार (10 मार्च) को जल्द ही युद्ध खत्म करने का बयान दिया.
वॉल स्ट्रीट जर्नल के मुताबिक ट्रंप के सलाहकारों ने कहा कि ईरान युद्ध से अमेरिका को कोई आर्थिक या सैन्य लाभ फिलहाल हासिल होता नहीं दिख रहा है. जंग और ज्यादा बढ़ता है तो रिपब्लिकन वोटर्स ही नाराज हो सकते हैं, जो मिडटर्म इलेक्शन के लिए घातक साबित हो सकता है. इसी साल के आखिर में अमेरिका में मिडटर्म इलेक्शन प्रस्तावित है.
इन वजहों से भी बैकफुट पर US
जंग की शुरुआत में अमेरिका का मकसद ईरान में तख्तापलट करना था. इसके लिए अमेरिका ने जंग के दूसरे ही दिन ईरान के सुप्रीम लीडर अयातुल्ला अली खामेनेई की हत्या कर दी. ईरान के टॉप-40 कमांडर मार दिए गए. राष्ट्रपति और विदेश मंत्री को भी मारने की कोशिश की गई. इसके बावजूद ईरान जंग में अमेरिका से लड़ता रहा.
1. एसोसिएटेड प्रेस के मुताबिक अमेरिकी राष्ट्रीय खुफिया परिषद ने आकलन के आधार पर एक रिपोर्ट सरकार को सौंपी है, जिसमें कहा गया है कि जिस तरीके से हमले किए जा रहे हैं, उससे तख्तापलट नहीं हो सकता है. रिपोर्ट में कहा गया है कि शीर्ष नेतृत्व के मरने के बाद भी ईरान की जनता सड़कों पर नहीं उतरी.
2. Quinnipiac University के नए सर्वे में 53 प्रतिशत अमेरिकी नागरिकों ने ईरान के खिलाफ सैन्य हमले का विरोध किया है. सर्वे में शामिल 44 प्रतिशत नागरिकों का मानना है कि अमेरिका इजराइल का जरूरत से ज्यादा समर्थन कर रहा है. हाल ही में अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने एक सवाल के जवाब में कहा था- इजराइल की वजह से ईरान पर अमेरिका ने हमला किया.
3. हमले के कारण अमेरिका का खर्च लगातार बढ़ता जा रहा है. वाशिंगटन पोस्ट के मुताबिक ईरान पर हमले के लिए अमेरिका ने शुरुआती 2 दिनों में 5.6 बिलियन डॉलर का गोला-बारूद इस्तेमाल किया. अनादोलु एजेंसी के मुताबिक युद्ध के 10 दिनों में अमेरिका 10 बिलियन डॉलर से ज्यादा का पैसा फूंक चुका है.
एंडगेम पर आया ईरान का बयान
ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने एंडगेम पर बयान जारी किया है. अराघची का कहना है कि अमेरिका को यह भ्रम था कि लड़ाई शुरू होते ही ईरान में तख्तापलट हो जाएगा, लेकिन वे अपने प्लान को सफल नहीं कर पाए. वे फेल हो गए. अब प्लान-बी के जरिए अमेरिका जंग को जीतना चाहता है, लेकिन उसमें भी उसे सफलता नहीं मिलने वाली है.
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