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ईरान संघर्ष में अमेरिका को हो रहा बड़ा नुकसान! अरब देशों से युद्ध खर्च जुटाने की सोच रहे हैं ट्रंप

March 31, 2026

नई दिल्ली। ईरान (Iran) के खिलाफ सैन्य कार्रवाई (Military Action) को जारी रखने के लिए अमेरिका (America) अब अरब देशों (Arab countries) से वित्तीय मदद (Financial Assistance) मांगने की तैयारी में है। हालांकि अभी कोई आधिकारिक योजना साझा नहीं की गई है, लेकिन राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप (President Donald Trump) इस विचार को गंभीरता से देख रहे हैं। 28 फरवरी को शुरू हुए संघर्ष को अब एक महीने से अधिक समय बीत चुका है, और ईरान ने अमेरिका के मध्यस्थों के जरिए भेजे प्रस्ताव को खारिज कर दिया है।

वाइट हाउस ने संकेत दिए

वाइट हाउस प्रेस सचिव कैरोलीन लेविट ने प्रेस ब्रीफिंग में संकेत दिए कि अमेरिका युद्ध खर्च के लिए अरब देशों का रुख कर सकता है। लेविट ने कहा कि राष्ट्रपति ट्रंप इस मुद्दे पर गंभीरता से विचार कर रहे हैं और जल्द ही इस विषय पर बयान आ सकता है। उन्होंने कहा, “मुझे लगता है कि राष्ट्रपति अरब देशों से मदद लेने में काफी दिलचस्पी लेंगे। यह विचार उनके मन में है और आप जल्द ही इसके बारे में उनसे और सुनेंगे।”


  • ट्रंप ने ईरान को दी धमकी

    रविवार को ट्रंप ने ईरान को चेतावनी दी कि अगर शीघ्र कोई शांति समझौता नहीं हुआ तो अमेरिका ईरान के बिजली संयंत्रों, तेल के कुओं और खार्ग द्वीप को नष्ट कर सकता है। उन्होंने सोशल मीडिया पोस्ट में कहा कि प्रशासन ईरान के साथ ‘गंभीर बातचीत’ कर रहा है, लेकिन अगर जल्दी समझौता नहीं हुआ तो खाड़ी देशों के ऊर्जा संसाधनों पर भी अमेरिका बड़ी कार्रवाई कर सकता है।

    ट्रंप ने पोस्ट में लिखा कि “अगर स्ट्रेट ऑफ होर्मुज तुरंत व्यापार के लिए नहीं खुलता है, तो हम ईरान में सभी बिजली उत्पादन संयंत्र, तेल कुएं और खार्ग द्वीप को पूरी तरह नष्ट कर देंगे।”

    ईरान ने जवाब में कहा – युद्ध का अंत हम तय करेंगे

    ईरान के खातम अल-अनबिया केंद्रीय मुख्यालय के प्रवक्ता लेफ्टिनेंट कर्नल इब्राहिम ज़ोलफकारी ने कहा कि अमेरिका और इजरायल द्वारा थोपे गए युद्ध का अंत ईरान ही तय करेगा। उन्होंने ट्रंप की धमकियों को खारिज करते हुए कहा कि ईरानी सशस्त्र बल युद्ध की शुरुआत नहीं करते, लेकिन किसी भी संघर्ष का अंत वे स्वयं तय करेंगे।

    ईरान के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता इस्माइल बघाई ने कहा कि अब तक अमेरिका के साथ कोई प्रत्यक्ष वार्ता नहीं हुई है, केवल मध्यस्थों के जरिए संदेश पहुंचे हैं। उन्होंने अमेरिकी दावों पर वैश्विक स्तर पर भी भरोसे की कमी जताई और कहा कि अमेरिकी प्रस्ताव ‘अत्यधिक, अव्यावहारिक और तर्कहीन’ हैं।

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