तेहरान/पेरिस। पश्चिम एशिया में जारी ईरान-इजरायल युद्ध (Iran–Israel conflict (2026 escalation) के बीच ऊर्जा संकट को कम करने के लिए अमेरिका ने बड़ा फैसला लिया है। अमेरिकी ऊर्जा सचिव क्रिस राइट (Chris Wright) ने घोषणा की है कि अमेरिका अपने रणनीतिक पेट्रोलियम भंडार से 172 मिलियन बैरल तेल जारी करेगा। यह कदम बढ़ती वैश्विक तेल कीमतों को नियंत्रित करने और बाजार में सप्लाई बढ़ाने के लिए उठाया गया है।
उन्होंने बताया कि तेल जारी करने की प्रक्रिया अगले सप्ताह से शुरू होगी और तय कार्यक्रम के अनुसार इसे पूरा होने में करीब 120 दिन लगेंगे। इसके अलावा अमेरिका अगले एक साल में लगभग 200 मिलियन बैरल अतिरिक्त तेल की आपूर्ति भी करेगा।
अमेरिका के रणनीतिक भंडार Strategic Petroleum Reserve में पिछले महीने के अंत तक करीब 415 मिलियन बैरल से अधिक तेल मौजूद था। अमेरिकी राष्ट्रपति Donald Trump ने भी पुष्टि की कि उनकी सरकार गैसोलीन की कीमतों को कम करने के लिए इस रिजर्व का इस्तेमाल करेगी और बाद में इसे फिर से भरा जाएगा।
ऊर्जा बाजार में बढ़ते दबाव के बीच International Energy Agency (IEA) ने भी अपने सदस्य देशों के साथ मिलकर इतिहास में सबसे बड़े आपातकालीन तेल भंडार जारी करने का फैसला किया है। एजेंसी के अनुसार सदस्य देश मिलकर करीब 400 मिलियन बैरल तेल बाजार में उतारेंगे।
यह मात्रा 2022 में Russian invasion of Ukraine के बाद जारी किए गए 182.7 मिलियन बैरल से भी दोगुनी है।
पेरिस स्थित IEA के कार्यकारी निदेशक Fatih Birol ने कहा कि यह कदम ऊर्जा बाजार में तत्काल राहत देने और सप्लाई में आई रुकावट के असर को कम करने के लिए उठाया गया है। उन्होंने यह भी कहा कि स्थिति सामान्य होने के लिए सबसे जरूरी है कि Strait of Hormuz के रास्ते तेल और गैस की आवाजाही फिर से शुरू हो।
होर्मुज स्ट्रेट पर संकट
ईरान ने अमेरिका और इजरायल के हमलों के जवाब में फारस की खाड़ी में कई वाणिज्यिक जहाजों को निशाना बनाया है। इससे क्षेत्र में तनाव बढ़ गया है और होर्मुज जलडमरूमध्य से गुजरने वाला कार्गो यातायात काफी हद तक रुक गया है।
दुनिया के कुल तेल निर्यात का लगभग पांचवां हिस्सा इसी मार्ग से Persian Gulf से Indian Ocean की ओर जाता है। IEA के अनुसार मौजूदा समय में कच्चे तेल और रिफाइंड उत्पादों का निर्यात युद्ध से पहले के स्तर के 10 प्रतिशत से भी कम रह गया है।
जी-7 देशों का समर्थन
तेल कीमतों को काबू में रखने के लिए Group of Seven (G7) देशों के ऊर्जा मंत्रियों ने भी पेरिस में बैठक कर आपातकालीन भंडार जारी करने पर सहमति जताई। फ्रांस के राष्ट्रपति Emmanuel Macron ने इस फैसले का स्वागत करते हुए कहा कि वैश्विक ऊर्जा उत्पादन बढ़ाने के लिए हर संभव कदम उठाना जरूरी है।
बताया गया कि कुल जारी किए जाने वाले तेल का लगभग 70 प्रतिशत हिस्सा जी-7 देशों की ओर से आएगा, जिसमें फ्रांस करीब 14.5 मिलियन बैरल का योगदान देगा।
अन्य देशों का भी सहयोग
IEA के आह्वान के बाद Germany, Austria और Japan ने भी अपने रणनीतिक तेल भंडार से कुछ मात्रा जारी करने की पुष्टि की है।
जर्मनी की अर्थव्यवस्था मंत्री Katherina Reiche ने बताया कि जर्मनी से करीब 2.64 मिलियन टन तेल जारी करने का अनुरोध किया गया है, जिसकी आपूर्ति जल्द शुरू हो सकती है। वहीं ऑस्ट्रिया के अर्थव्यवस्था मंत्री Wolfgang Hattmannsdorfer ने कहा कि उनका देश भी आपातकालीन तेल भंडार का हिस्सा जारी कर रहा है।
विशेषज्ञों की राय
ऊर्जा विशेषज्ञों का मानना है कि भंडार जारी करने से बाजार को कुछ राहत मिल सकती है। Stanford University से जुड़े ऊर्जा विश्लेषक Maxim Sonin के अनुसार यह कदम कीमतों को स्थिर करने में मदद करेगा, लेकिन अगर युद्ध लंबा चलता है और होर्मुज स्ट्रेट बंद रहता है तो इसका असर सीमित हो सकता है।
वहीं Rice University के सेंटर फॉर एनर्जी स्टडीज के वरिष्ठ निदेशक Kenneth Medlock का कहना है कि भंडार जारी करने से बाजार में घबराहट कम होगी और आने वाले दिनों में ईंधन की कीमतों में उतार-चढ़ाव घट सकता है।
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